जैसी जरूरत वैसी सजावट
कई लोग घर की इंटीरियर डिजाइनिंग पर काफी पैसा खर्च करने के बावजूद कंफर्टेबल फील नहीं कर पाते। इसका सबसे बड़ा कारण होता है कि उन्होंने घर का इंटीरियर वर्क कराने से पहले अपनी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया। वे अपनी पर्सनैलिटी और अपने टेस्ट को लेकर भी अवेयर नहीं होते और न ही अपनी पसंद से घर डिजाइन कर पाते हैं। नतीजतन, अपने ही घर का माहौल उन्हें सकुन नहीं दे पाता। इसके अलावा, वे इंटीरियर के नाम पर इतने ज्यादा डेकोरेटिव पीस खरीद लेते हैं कि उनका घर सजावटी कम और स्टोर रूम ज्यादा नजर आने लगता है। वे ये आइटम सिर्फ इसलिय खरीद डालते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सुंदर दिखने वाले इन पीसेज को घर में रखने का मतलब ही इंटीरियर डिजाइनिंग होता है, भले ही उन्हें इनमें से कुछ पीस पसंद नहीं हों। वास्तव में, इंटीरियर डिजाइनिंग के फील्ड में ‘राइट स्कीम’ जैसी कोई चीज नहीं होती।
सजावट और सुंदरता तो इंडिविजुअल टेस्ट का मामला है यानी हर व्यक्ति के लिए सुंदरत के अलग मायने होते हैं और हर किसी को उसी के हिसाब से घर की इंटीरियर कराना चाहिये। खुद को पसंद आने वाली स्कीम ही आपके लिये राइट रहेगी और आपको अपना घर दुनिया की सबसे खूबसूरत और शांत जगह नजर आयेगा।
लिविंग रूम
लिविंग रूम किसी भी घर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आने वाला हिस्सा होता है। यह सजा-संवरा रहे या बिखरा, आने वाले मेहमान पर आपका इंप्रेशन उसी अनुसार पड़ता है, इसलिये लिविंग रूम की सजावट पर खास ध्यान देना चाहिये। लिविंग रूम के इंटीरियर के दो मेन फैक्टर होते हैं, इसमें रखा सजावटी सामान यानी शो-पीस और इसका सिटिंग अरेंजमेंट। आपके रूम की खूबसूरती और आपका आराम, इन्हीं दोनों चीजों के इर्द-गिर्द घूमता है।
शो-पीस
शुरूआत करने से पहले आपको यह देखना होगा कि आके लिविंग स्पेस में किस-किस तरह का इंटीरियर कराया जा सकता है। मान लीजिय कि आपका लिविंग रूम काफी बड़ा है, तो आप इसमें स्टैचू रख सकते हैं या फिर वाटर फाउंटेन जैसा डेकोरेटिव पीस भी ट्राई कर सकते हैं। इसके विपरीत अगर लिविंग रूम छोटा है, तो इसमें पिक्चर और वाल हैगिंग जैसी ऐसी चीजें लगाएं, जो ज्यादा जगह नहीं घेरतीं। छोटे लिविंग रूम में बड़े आकार की कोई स्टैचू बड़ी अजीबो गरीब लगेगी इसलिये अपने रूम के साइज के अनुसार ही शो-पीस चुनें।
सिटिंग अरेंजमेंट
लिविंग रूम में सिटिंग स्कीम का फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी फैमिली में मेंबर्स कितने हैं और आपके घर कितने मेहमान अक्सर आते हैं? सिटिंग स्कीम पर ध्यान देने की ज्यादा जरूरत छोटे घरों में होती है, जहां इस्तेमाल के लिये जगह काफी कम होती है। ऐसे मकानों में यह भी संभव है कि आप उस जगह को सिटिंग एरिया में बदल डालें, जिसका बेहतर इस्तेमाल आप डाइनिंग एरिया या वर्क स्पेस के रूप में कर सकते है। मान लीजिये कि आपके घर में जगह कम है और जो है भी, वहां आप लंबा-चौड़ा सोफा डालकर रिजर्व कर दें, तो बात कुछ बनेगी नहीं।
रंगों का चुनाव
अगर आपके पास कम स्पेस हैं, तो वहां हल्के रंग ज्यादा अच्छे लगेंगे। इससे कमरा बड़ा सा नजर आयेगा। डार्क कलर्स बड़ी स्पेस में ही अच्छे लगते हैं। बोल्ड रेट और ब्राइट ग्रीन कलर लिविंग रूम के लिये सबसे अच्छे माने जाते हैं। इन कलर्स के बेस वाले टेक्सचर हमेशा आकर्षण का केंद्र रहते हैं। हालांकि डार्क कलर इस्तेमाल करने हों, तो उनके साथ कमरे की लाइटिंग पर भी खासा ध्यान देना चाहिये। डार्क कलर्स के साथ ब्राइट लाइट की जरूरत होती है, क्योंकि डार्क कलर्स डार्क इंटीरियर पैदा करते हैं।
सजावटी सामान
जब भी घर के लिए कोई सजावटी सामान खरीदने जायें तो ध्यान रखें कि वह इंटीरियर की बाकी स्कीम यानी कलर और थीम आदि के साथ मैच करता हुआ हो। उदाहरण के तौर पर कंटेपररी थीम के साथ ट्रडिशनल पेंटिंग अच्छी नहीं लगेगी। ग्लास और ब्रास की बनीं चीजें हर तरह की इंटीरियर स्कीम के साथ चलती हैं, लेकिन इनके डिस्प्ले पर ध्यान देना जरूरी होता है। अगर आपके पास कोई महंगा स्पेशल पीस है, तो उसे हाईलाइट करने के लिये इस पर लाइटिंग इफेक्ट देना न भूलें। मान लीजिये कि आपको किसी पिक्चर को हाईलाइट करना है, तो उसके ठीक ऊपर एक लाइट का अरेंजमेंट करें। सजावटी सामान खरीदते समय अपने घर में उपलब्ध जगह, कलर्स, लाइटिंग अरेंजमेंट आदि बातों को ध्यान में रखें। इन पीसेज को खरीदने में जल्दबाजी न दिखाएं, बल्कि बाकी जरूरी चीजों की तरह इन्हें खरीदने में भी पूरा समय दें। हो सके, तो एंटीक और आर्ट पीसेज के लिए घर में एक अलग जगह तय कर लें।


