डीम्ड ओनर
इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार, हाउस प्रोपर्टी से होने वाली इनकम पर टैक्स की देनदारी सिर्फ असली मालिक की ही नहीं होती, बल्कि डीम्ड ओनर भले ही कागजों में या कानूनन प्रोपर्टी का मालिक न हो, लेकिन प्रोपर्टी से उसके संबंधों को देखते हुए उसे मालिक माना जा सकता है। टैक्स की दृष्टि से उसे असली मालिक की तरह मानकर उसपर टैक्स लगाया जाता है। वैसे प्रोपर्टी के असली मालिक से भी इनकम फ्राम हाउस प्रोपर्टी के अंतर्गत कर तभी वसूला जा सकता है, जब वह कुछ नियमों के घेरे में आता हो, जैसे वह व्यक्ति प्रोपर्टी का मालिक हो, वहां बिजनेस या कोई और कामर्शियल एक्टिविटी न चलायी जा रही हो, उस प्रोपर्टी का इस्तेमाल रेजिडेंशल यूज के लिए किया जा रहा हो और इसे रहने के लिए ही किराये पर दिया गया हो।
अगर इनकम ऐसी किसी प्रोपर्टी से होती है, जिस पर संबंधित व्यक्ति का मालिकाना हक नहीं है, तो उस इनकम पर इनकम फ्रॉम हाउस प्रोपर्टी के अंतर्गत कर नहीं लगेगा, बल्कि इस आय को अन्य आय के रूप में देखा जाएगा और उसी के अनुसार इसपर कर भी लागू होगा। कुछ मामलों में प्रोपर्टी का कानून मालिक न होने पर भी किसी व्यक्ति पर कर लागू किया जाता है, क्योंकि उसे प्रोपर्टी का डीम्ड आनर मान लिया जाता है। तब, उस व्यक्ति को प्रोपर्टी का मालिक मानते हुए उस प्रोपर्टी से होने वाली उसकी इनकम को इनकम फ्राम हाउस प्रोपर्टी की श्रेणी में ही रखा जाता है। डीम्ड आनर से कर वसूली के लिए भी कुछ नियम तय किये गये हैं। ये हैं :-
प्रोपर्टी ट्रांसफर
अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रोपर्टी को अपनी पत्नी/पति या नाबालिग बच्चे के नाम ट्रांसफर करता है या गिफ्ट देता है, तो प्रोपर्टी ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति को ही डीम्ड आनर माना जाएगा। हालांकि कानूनी कागजात में अब प्रोपर्टी का मालिकाना हक उसके जीवनसाथी या बच्चे के नाम हो चुका है। इस प्रोपर्टी से होने वाली कोई भी इनकम उक्त व्यक्ति की इनकम में शामिल की जाएगी, न कि पत्नी/पति या बच्चे की इनकम में।
ज्वाइंट फैमिली
अगर कोई प्रोपर्टी किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर है, जो हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली के अनुसार ज्वाइंट फैमिली का सदस्य हो, तो इस प्रोपर्टी पर पूरे परिवार का मालिकाना हक मान लिया जाता है। भले ही कानूनी कागजात में यह प्रोपर्टी परिवार के किसी एक ही सदस्य के नाम पर हो।
लम्बे समय की लीज
अगर किसी व्यक्ति ने रेजिडेंशल प्रोपर्टी की 12 साल से ज्यादा की लीज हासिल की है, तो उस व्यक्ति को संबंधित प्रॉपर्टी का डीम्ड आनर माना जाएगा और उस प्रोपर्टी से होने वाली इनकम पर देय टैक्स उसे देना होगा। कुल मिलाकर इन सभी मामलों में डीम्ड आनर को प्रोपर्टी के असली मालिक की तरह ही इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी के अंतर्गत कर चुकाना पड़ता है।
को-आपरेटिव सोसाइटी सेंटर
को-आपरेटिव सोसाइटी, कंपनी या किसी और एसोसिएशन का कोई सदस्य अगर ऐसी किसी प्रोपर्टी में रहता है, जो उसे संबंधित सोसाइटी/कंपनी या एसोसिएशन की किसी हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत अलॉट की गयी है, तो उस व्यक्ति को भी प्रोपर्टी का डीम्ड आनर समझा जाएगा।
सेक्शन 53ए
कई बार ऐसा होता है कि मकान की डील फाइनल हो जाती है, लेकिन एग्रीमेंट लम्बे समय तक रजिस्टर्ड नहीं हो पाता। ट्रांसफर आफ प्रोपर्टी एक्ट के सेक्शन 53ए के अंतर्गत इस बीच प्रोपर्टी खरीदने वाले व्यक्ति को डीम्ड आनर माना जाता है। बशर्ते वह इस सेक्शन की तमाम शर्तों को पूरा करता हो।


