बवासीर से बचाव के लिए आयुर्वेदिक औषधियां
* 100 ग्राम मुर्दा शंख और 25 ग्राम कपूर को पीसकर कपड़े से छानकर चूर्ण बना लें। इसे गाय के शुध्द घी में मिलाकर मलहम बना लें। रात को सोते समय यह मलहम मस्सों पर लगाकर साफ सूती कपड़ों से बांध दें।
* नीम की निम्बौली 21 दिन तक क्रमश: बढ़ती मात्रा में खाएं। फिर 22वें दिन से एक-एक दाना कम करते जाएं और एक दाने के आने तक खाएं।
* सुबह मुंह धोकर मूली की जड़ खाएं। खूनी या वादी बवासीर दोनों में फायदेमंद है। इसमें घाव भी सूखकर ठीक हो जाएगा।
* अगर मस्सा भीतर हो तो नीम की गूदी या मूली की जड़ खाएं। अगर बाहर हो तो मलहम लगाएं।


