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Home » Education Express » 20 March 2012 »

बच्चे पढ़ेंगे ‘अन्न बचाओ’ का पाठ

नयी दिल्ली, भोजन और अनाज की बर्बाजी रोकने की मुहिम में अब बच्चों को भी शामिल किया जायेगा। निजी और सरकारी समारोहों में भोजन की बर्बादी से चिंतित सरकार ने अब बच्चों को स्कूल में ही इसके प्रति सचेत करने का फैसला किया है। प्रतिवर्ष लगभग 40 प्रतिशत भोजन देश में बर्बाद होता है जिसके लिये विवाह समारोह, पार्टियां और सरकारी कार्यक्रम समेत होटल व रेस्टोरेंट जिम्मेदार हैं। यही वजह है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों के पाठयक्रम में इस मुहिम को एक अध्याय के रूप में शामिल करने को कहा है। एनसीईआरटी, सीबीएसई समेत राज्यों के शिक्षा बोर्ड मंत्रालय के निर्देश की तामील में जुट गये हैं। सभी को माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्तर में राष्ट्रीय पाठयक्रम रूपरेखा के तहत बच्चों को यह शिक्षा देने को कहा गया है। सरकारी व निजी कार्यक्रमों में भोजन सहित अन्य स्तर पर खाद्यान को नुकसान से बचाने के लिये एनसीईआरटी और सीबीएसई ने सामान्य पृष्ठभूमि के तहत कक्षा तीन और चार में एनवायरमेंट स्टडीज के पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा, जबकि कक्षा छह व नौ में विज्ञान की किताब में बच्चों को इस संबंध में शिक्षा दी जायेगी। वहीं कक्षा 10 और 12 में अनिवार्य विषय स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा में ‘अन्न बचाओ’ के पाठ को स्थान मिलेगा। याद रहे कि हाल ही में राज्यों को केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर केंद्रीय दिशा-निर्देशों को लागू करने को कहा था। दरअसल, कई राज्यों ने पहले से खाद्य सामग्री के नुकसान के बचाव में नियम बनाये हैं, जिसके चलते केंद्रीय अभियान की हवा निकलने लगी। इसी वजह से केंद्र ने राज्यों को अपने तौर-तरीकों से चलने को कहा है। खाद्य मंत्रालय को मानव संसाधन मंत्रालय ने इस संबंध में अभी तक उठाये गये कदमों की जानकारी देते हुए साफ किया है कि एनसीईआरटी, सीबीएसई इस मुद्दे को पाठयक्रम में शामिल करने के लिए जुट गए हैं, जबकि राज्यों के बोर्ड इस मामले में ना-नुकुर कर रहे हैं। उनसे भी बातचीत चल रही है। भोजन की बर्बादी को रोकने के लिये शिक्षा मंत्रालय सभी राज्य सरकारों को माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में इस संबंध में कदम उठाने को पहले ही कह चुका है। मिजोरम ने तो इसी वर्ष से खाद्य बचाव के महत्वपूर्ण मुद्दे को बच्चों की किताबों डालने का निर्णय ले लिया है। राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए खाद्य मंत्रालय ने भी राज्य सरकारों से बच्चों को अन्न को नुकसान से बचाने का पाठ पढ़ाने की अपील की है। गौरतलब है कि प्रतिवर्ष लगभग 40 प्रतिशत भोजन देश में बर्बाद होता है जिसके लिये विवाह समारोह, पार्टियां और सरकारी कार्यक्रम समेत होटल व रेस्टोरेंट जिम्मेदार हैं।

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