क्या और कैसे होता है ‘लैग अटैक’?
अभी तक माना जाता रहा है कि रक्त ले जाने वाली रक्त वाहिनियां में किसी भी तरह की खराबी या रुकावट दिल को कमजोर करने के साथ ही दौरे या हार्ट अटैक का भी कारण बनती है। इस तरह का दौरा सिर्फ दिल ही नहीं बल्कि पैरों में भी पड़ता है और पैरों को भी दिल की तरह एंजियोप्लास्टी व बाईपास सर्जरी की जरूरत होती है। कई बार कोई काम करते समय पैरों में अचानक ही भयंकर दर्द होने लगता है और वह सुन्न सा हो जाता है। ऐसी स्थिति खतरनाक होती है। यदि इस तरह कुछ होता है तो इसका मतलब है कि पैर की कोई रक्त वाहिनी काम नहीं कर रही है और इस कारण दिमाग तक सही संदेश नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसी स्थिति में अगर बंद रक्तवाहिनी का सही इलाज नहीं किया जाए तो पैर में ‘लैग अटैक’ पड़ने की संभावना बढ़ जाती है धीरे-धीरे पूरा पैर काला पड़कर गैग्रीन बीमारी से ग्रस्त हो जाता है। इस बीमारी के कारण पैर काटने भी नौबत आ सकती है। जिस तरह हार्ट अटैक की पुष्टि एंजियोग्राफी से होती है, ठीक उसी तरह लैग अटैक का पता भी एंजियोग्राफी से ही लगाया जा सकता है और उसके बाद जरूरत के मुताबिक एंजियोप्लास्टी या फिर बाईपास सर्जरी की जाती है। पैरों में अचानक दर्द शुरू होना और चलने में इसकी तीव्रता बढ़ना पैर की किसी नस में रुकावट होने का संकेत है। अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज या उच्च रक्तचाप की शिकायत है तो लेग अटैक होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।
पैरों को रक्त पहुंचाने का काम करने वाली मुख्य रक्तवाहिनी पेट में स्थित होती है और इसमें किसी तरह की रूकावट कमर दर्द का कारण बनती है। इसी तरह काम करते-करते अचानक ही हाथों में तीव्र पीड़ा होना और हाथों का काम करना बंद कर देने पर यह पीड़ा अपने आप ही समाप्त होना भी इस बात का संकेत है कि हाथ को रक्त की सही आपूर्ति नहीं हो रही है। इस रूकावट का पता डॉप्लर टेस्ट या फिर एंजियोग्राफी से कर समय पर उचित इलाज के जरिये अपंग होने से बचा जा सकता है।
इस तरह करें पैरों की रक्षा
>> कम से कम आधा घंटा पैदल जरूर चलें।
>> धूम्रपान से बचें।
>> खाने में तले भोजन की जगह फल और सब्जियां अधिक मात्रा में लें।
>> रक्तचाप और कोलेस्ट्राल को नियंत्रित रखें तथा तनावमुक्त रखें।


