झारखंड में लोक अदालतों की भूमिका
राज्य की अदालतों पर लम्बित मामलों का भार कम करने में लोक अदालतों की भूमिका उल्लेखनीय मानी जा रही है। बताया गया है कि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) द्वारा संचालित लोक अदालतों में अब तक एक लाख 97 हजार मामलों का निपटारा किया गया है। यह आंकड़ें पिछले 10 वर्षों में लगायी गयी 2234 लोक अदालतों में निपटाये गये मामलों के हैं। निष्पादित मामलों में सम्बध्द पक्षों को 84 करोड़ 97 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। देश के न्यायालयों में लम्बित मुकदमों का भारी दबाव न्याय मिलने में विलम्ब का एक मुख्य कारण रहा है। समय-समय पर लम्बित मामलों को निपटाने के उपाय किये जाते रहे हैं। लोक अदालतों की परिकल्पना भी इसी तरह के उपायों में एक है। इन लोक अदालतों में समझौतों के माध्यम से मामलों का निपटारा किया जाता है। ऐसे मामले, जिनमें समझौते का प्रावधान नहीं है, उन्हें छोड़कर सभी प्रकार के मामलों का निपटारा होता है। इन अदालतों के फैसले न्यायालय के फैसले माने जाते हैं। लोगों को त्वरित न्याय मिलने, न्यायालयों में होने वाले खर्च से राहत के कारण आमलोगों में लोक अदालतों के प्रति आकर्षण बढ़ा है। लोक अदालतों में हुए फैसले के खिलाफ किसी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती, ऐसे प्रावधान से लोगों में लोक अदालत के प्रति विश्वास पैदा हुआ है। झालसा के प्रयासों का नतीजा है कि लोग अब लोक अदालतों में मामला ले जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। विधिक जागरूकता शिविरों की इसमें बड़ी भूमिका है। इस प्रयास को ग्रामीण क्षेत्र और कस्बाई इलाकों तक ले जाने की जरूरत है ताकि लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक कर लोक अदालतों को और कारगर बनाया जा सके।


