खतरे में धरती
यह बड़े खेद की बात है कि विश्व के छोटे-बड़े सभी देश जलवायु की समस्या के समाधान के लिए तो सहमत हैं लेकिन इस दिशा में क्या सार्थक कार्रवाई की जाये उस पर एकमत नहीं है। ब्राजील के शहर रियो द जनेरो में धरती सम्मेलन की 20वीं सालगिरह पर आयोजित सम्मेलन में पारित गोलमोल प्रस्ताव इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकारें ठोस कदम उठाने से कतरा रही हैं। गरीबी हटाने को सर्वोच्च प्राथमिकता और टिकाऊ विकास के लिए अपना रास्ता आप चुनने का अधिकार जैसे शब्द इस बात को छिपा नहीं सकते कि धरती के वातावरण में जमा हो रहे कार्बन और जलवायु परिवर्तन के खतरे पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है। जबकि वैज्ञानिकों के अनुसार औद्योगिकीकरण और नगरीकरण के कारण वर्तमान गति से अगर वायु प्रदूषण जारी रहा तो एक समय ऐसा आयेगा कि पृथ्वी का तापक्रम इतना बढ़ जायेगा कि जल के वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज हो जाने से जहां आकाश में हमेशा बादल छाये रहेंगे वहीं सूर्य की रोशनी के अभाव में पेड़-पौधों का विनाश होने लगेगा और आक्सीजन के अभाव में स्वयं मानव जाति खतरे में पड़ जायेगी। पूरी परिस्थिति का तकाजा है समय रहते इस खतरे को समझा जाये।


