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महात्मा गांधी सेतु की दुर्दशा

कभी बिहार की ‘लाइफ लाइन’ कहे जाने वाली महात्मा गांधी सेतु की हालत दयनीय हो गयी है। पहले यह पुल जितना सुविधाजनक और उपयोगी था, अब नहीं रहा। करीब साढ़े पांच किलोमीटर इस लम्बे पुल पर हमेशा जाम लगा रहता है। इस वजह से पुल पार करने में काफी समय लगता है। मरीज, छात्र, कर्मचारी व अन्य लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। पुल जर्जर हो चुका है और कभी-भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बारहों महीने इसमें मरम्मत का काम चलता रहता है। इस वजह से दो-तरफा रास्ते वाले इस पुल का एक रास्ता ज्यादातर समय बंद ही रहता है। करीब 30 साल पुराने 45 खम्भों वाले इस पुल पर भारी यातायात को देखते हुए सरकार इसके समानांतर एक और पुल बनाने की तैयारी में है। पर सवाल यह है कि महात्मा गांधी सेतु की यह जर्जर स्थिति कैसे हुई। स्पष्ट है कि रख-रखाव के काम में लापरवाही बरती गयी। अगर इस पुल की निरंतर देखभाल की जा रही होती तो यह स्थिति नहीं आती। नया पुल बनाने की तैयारी हो चुकी है यह अच्छी बात है। आबादी बढ़ रही है। इसलिये एक और पुल तो बनना ही चाहिए। लेकिन रख-रखाव के काम को नजरअंदाज करने पर कुछ वर्षों बाद उसका भी यही हाल होगा। यह रख-रखाव पर उचित ध्यान देते रहना होगा, ताकि कोई बड़ी दुर्घटना न हो और यातायात सुगम हो।

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