जॉन्डिस लिवर की गड़बड़ी से होता है
लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग जो पेट के ऊपरी हिस्से में दाहिनी तरफ होता है। यह भोजन पचाने में सहायता करता है। शरीर में होने वाली रसायनिक क्रियाओं तथा परिवर्तनों में यह विशेष योगदान देता है। यदि लिवर सही ढंग से काम नहीं करता या काम करना बन्द कर देता है तो हम विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
गर्मी या बरसात के दिनों में फैलने वाली बीमारियों में जॉन्डिस एक प्रमुख रोग है जिससे हमारा लिवर प्रभावित होता है। यह एक गंभीर रोग है। इलाज में लापरवाही करने से रोगी की जान भी जा सकती है। हमारा लिवर स्वस्थ रह तथा यह ठीक तरीके से काम करता रहे, उसके लिए जरूरी है कि भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाया जाए।
हम आहार के रूप में जो कुछ भी ग्रहण करते हैं, उसका पाचन होकर रस बनता है। फिर रस से रक्त बनता है। रस को रक्त बनाने की कार्य मुख्य रूप से लिवर ही करता है। लिवर के अन्दर पित्ताशय होता है। यहां से दो वाहिनियां निकलती हैं जिसमें से एक आमाशय में जाती है व दूसरी रक्त का निर्माण करती हैं।
किसी कारण से आमाशय में जाने वाली वाहिनी (नली) बन्द हो जाती है तो पाचन क्रिया के लिए आमाशय में जाने वाला पित्त रक्त में मिलने लगता है तथा रक्त का बनना बन्द हो जाता है। धीरे-धीरे रोगी पीला पड़ जाता है। इस स्थिति को जॉन्डिस या पीलिया कहा जाता है।
लक्षण : इस रोग में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं-
* रोगी के नेत्र, नाखून और मूत्र का रंग पीला हो जाता है। टट्टी सफेद रंग की होने लगती है।
* रोग बढ़ जाने पर पसीना भी पीला आने लगता है।
* भूख नहीं लगती। कुछ भी खाने पर उल्टी हो जाती है।
* रोगी कमजोर हो जाता है। उसे चलने फिरने व करवट बदलने में परेशानी होती है।
आयुर्वेदिक उपचार : मकोय के पत्तों का रस उबालाकर दिन में दो बार 2-2 चम्मच रोगी को पिलाएं।
* एक लिटर स्वच्छ पानी में 10-12 आलू बुखारे तथा 10-12 दाने इमली के डाल दें। सुबह मसल छान लें तथा उसमें चीनी मिला लें। इसे दिन में तीन बार रोगी को सेवन कराएं। लाभ प्राप्त होगा।
* आमतौर पर जॉन्डिस का रोगी दस्त का शिकार हो जाता है। अगर रोगी को दस्त हो रहे हैं तो सम भाग सफेद जीरा तथा सौंफ लेकर कच्चा पका भून लें। इसमें चीनी मिलाकर आधा-आधा चम्मच रोगी को दिन में तीन बार खिलायें।
* रोगी को कब्ज हो तो उसे मकोय के पत्तों का साग खिलाएं।
* कुमारी आसव तथा अमृतारिष्ट 2-2 चम्मच सम भाग पानी के साथ भोजन के बाद रोगी को पिलाएं।
* रोहितकारिष्ट तथा पुनर्नवारिष्ट 2-2 चम्मच सम भाग पानी मिलाकर दिन में दो बार खाने के बाद दें।
* पुनर्नवा मंदूर तथा चित्रकादि की 2-2 गोलियों सेवन कराएं।
सावधानियां : रोगी को चिकनाईयुक्त तथा मांसाहारी भोजन बिल्कुल न दें।
* प्रोटीनयुक्त भोजन पर्याप्त मात्रा में दें।
* पानी खूब पीना चाहिए। पानी में नींबू तथा चीनी मिलाकर पिलाना लाभदायक होता।
* तरल पदार्थ-जूस, लस्सी या दाल का पानी का सेवन कराएं।
* रोगी को उबला हुआ और बिना हल्दी का भोजन दें।
* ताजा तथा सुपाच्य भोजन करना चाहिए तथा पानी उबालकर पीना चाहिए।


