बसपा द्वारा लोकसभा चुनाव की तैयारी
आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद बसपा प्रमुख मायावती पूरे जोश के साथ अपनी पार्टी में नई जान फूंकने में लग गई हैं। लोकसभा के चुनाव 2014 में होने हैं, लेकिन उन्होंने उसकी तैयारी में अभी से अपने आपको पूरी तरह झोंक दिया है।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मामले में समाजवादी पार्टी ने बसपा सहित अन्य सभी पार्टियों के ऊपर बढ़त हासिल कर ली है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अब तक अनेक सभाओं और बैठकों को संबोधित कर डाला है। सपा ने उम्मीदवारों के चयन का काम भी शुरू कर दिया है।
मायावती भी चुनाव की तैयारी में किसी से पीछे नहीं दिखना चाहती है। वे कांग्रेस और भाजपा की वर्तमान स्थिति का लाभ उठाकर अपनी पार्टी को सपा की एकमात्र मुख्य प्रतिस्पर्ध्दी पार्टी के रूप में स्थापित करने में जुट गई हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस भारी भ्रम की शिकार है। उसके प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, पर उनकी जगह पर दूसरे अध्यक्ष की नियुक्ति अभी नहीं हो पाई है। कांग्रेस को यह भी नहीं पता कि वह प्रदेश में किसी पार्टी से गठबंधन करके चुनाव लड़ेगी अथवा खुद अपने दम पर ही चुनाव लड़ेगी। दूसरी तरफ भाजपा के अन्दर अंदरुनी लड़ाई जारी है और उसके कारण उसकी तैयारी अभी तक शुरू भी नहीं हो पाई है।
चुनावी तैयारी की ओर बढ़ते हुए बसपा अध्यक्ष ने अपने विधायकों, सासंदों और जिला समन्वयकों की एक बैठक बुलाई। उन्होंने प्रदेश के नेतृत्व में बदलाव की भी घोषणा की, स्वामी प्रसाद मौर्या की जगह अचल राजभर को प्रदेश में पार्टी कमान दे दी गई है। स्वामी प्रसाद विधानसभा में बसपा विधायक दल के नेता हैं। बसपा विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। इसके नाते स्वामी प्रसाद विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कैबिनेट मंत्री की सुविधाओं को उपभोग कर रहे हैं।
विधायक दल का नेता बनने के बाद श्री मौर्य की जगह अचल रामभर को पार्टी अध्यक्ष बनाकर मायावती ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। वह पिछड़े वर्गों में अपनी पार्टी की स्थिति और मजबूत करने में लग गई हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य तो पिछड़े वर्ग से हैं ही अचल राजभर भी पिछड़े वर्ग से ही हैं। वे
एक अत्यन्त ही कमजोर तबके से आते हैं। जाहिर है मायावती की नजर पिछड़े वर्गों के कमजोर तबकों पर है। वैसे वह सभी जातियों एवं समुदायों का वोट पाने की रणनीति बना रही हैं।
अचल राजभर के बारे में एक दिलचस्प तथ्य है कि मायवती ने उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं दिया था। इसका कारण यह था कि अचल राजभर पर जमीन हड़पने और कैबिनेट मंत्री के अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगा था। इन आरोपों में प्रदेश के लोकायुक्त ने सरसरी निगाह में उन्हें दोषी पाया था। लोकायुक्त की कार्रवाई के कारण ही श्री राजभर को मायावती ने विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित कर दिया था, लेकिन पिछड़े वर्गों के मतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रदेश का अध्यक्ष ही बना दिया गया है। एक तथ्य यह भी है कि अब तक मायावती की चारों सरकारों में अचल राजभर मंत्री रह चुके हैं। मायावती ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अचल राजभर प्रदेश भर का दौरा करेंगे और जोनल सभाओं की भी तैयारी करेंगे।
पार्टी सांसदों, विधायकों व अन्य नेताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि वे लोकसभा के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दें और ज्यादा से ज्यादा सीटें लाने का लक्ष्य रखें, ताकि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी कोई निर्णायक भूमिका केन्द्र सरकार के गठन में निभा सके।
बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने यह भी बताया कि लोकसभा की 80 सीटों में से 90 फीसदी पर उम्मीदवारों की पहचान की जा चुकी है। शेष सीटों पर भी पहचान की जा रही है। मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी सभी जातियों और समुदायों को अपने साथ लाएगी ताकि लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल की जा सकें।
प्रदेश अध्यक्ष अचल राजभर ने मायावती व अन्य नेताओं से वायदा किया कि पार्टी के लिए वे अपना सबकुछ दांव पर लगा देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि पार्टी की जीत ज्यादा से ज्यादा सीटों पर संभव हो सके। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि प्रदेश में बसपा की ताकत को कम करने आंकना गलत होगा।


