‘घर’ लौटेंगे सांसद ललन सिंह
पटना, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ चीनी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के बाद यह चर्चा तेज हो गयी है कि सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किसी भी दिन समाप्त हो सकती है। नीतीश कुमार के पुराने सखा ललन सिंह मुंगेर से जदयू के सांसद हैं लेकिन राजनीतिक मन मुटाव के कारण फिलहाल पार्टी से निलंबित हैं।
दरअसल हुआ यूं कि राजधानी के बाकरगंज इलाके के ठाकुरबाड़ी रोड में एक रेस्टुरेंट का शुभारंभ होना था। ललन सिंह वहां पहले से मौजूद थे। इसी बीच मुख्यमंत्री भी वहां पहुंच गये। शिष्टाचारवश ललन सिंह ने उनका अभिवादन किया इसके बाद मुख्यमंत्री अपने लिए निर्धारित केबिन की ओर बढ़ गये। इसके बाद उन्होंने ललन सिंह को साथ खाने को आमंत्रित किया। इसके बाद चीनी व्यंजनों के साथ संघर्ष के दोनों पुराने साथी बातचीत में मशगूल हो गये। डेढ़ साल के बाद इतनी देर तक हुई बातचीत ने राजनीतिक गलियारे में एक नये चर्चा को जन्म दे दिया। एक ही टेबुल पर दोनों ने चीनी व्यंजनों का स्वाद चखा। राजनीति की बातें हुई या नहीं यह तो नहीं मालूम लेकिन मुख्यमंत्री को गाड़ी तक छोड़ने रेस्टुरेंट के बाहर तक आना कुछ न कुछ संदेशा अवश्य दे गया।
पार्टी में उपेन्द्र कुशवाहा को लेने से ललन पार्टी से नाराज हो गये थे। कटुता इतनी बढ़ गयी कि बीते विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवारों का खुल कर समर्थन किया। हां, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के व्यक्तिगत जीवन पर कभी आक्षेप नहीं किया। यही बात नीतीश कुमार ने भी अपनायी। अपने पुराने मित्र के व्यक्तिगत जीवन की आलोचना से परहेज किया। ज्ञातव्य है कि फेज वन में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार के आसीन होने के बाद ललन सिंह के इशारे पर राजनीति के पत्ते तक हिलने लगे थे। नौकरशाहों के तबादले हों या नीति निर्धारक फैसले, सबमें ललन सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी। श्रीकृष्णपुरी का इनका आवास नीतीश कुमार का आशियाना था चाहे वह देश के कृषि मंत्री रहे या रेल मंत्री। पहला पड़ाव उनका ललन सिंह के यहां ही रहता था। गाढ़ी दोस्ती ऐसी कि एक पल भी दोनों अलग नहीं रहते थे। लेकिन उपेन्द्र कुशवाहा के एक बयान ने दोनों के बीच दूरी ही नहीं गहरी खाई पाट दी। ललन सिंह विफरे तो पार्टी न उन पर अनुशासन की तलवार चला दी। बाद में उपेन्द्र कुशवाहा भी पार्टी से निलंबित कर दिये गये। उपेन्द्र तो इस वक्त नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल पूरे बिहार का दौरा कर रहे हैं जबकि ललन ने चुप्पी साध ली है।
राजनीतिक गलियारे मं चल रही चर्चाओं पर गौर करें तो उपेन्द्र कुशवाहा किसी नये राजनीतिक ठौर अथवा समीकरण की तलाश में हैं। जदयू में इनके निलंबन को निरस्त करने का रास्ता लगभग बंद हो चुका है। उनका सरकार विरोधी अभियान पूर्ववत जारी है। इधर मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात के बाद ललन सिंह के निलंबन की कार्रवाई खत्म होने की चर्चा तेज हो गयी है। ललन के करीबी लोगों को उम्मीद है कि इसकी औपचारिकता किसी भी वक्त पूरी की जा सकती है। ललन सिंह ने सरकार के कामकाज की आलोचना जरूर की लेकिन नीतीश कुमार या दल के नेतृत्व पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की।


