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लक्षित पीडीएस नहीं सबको खाद्य सुरक्षा की कानूनी गारंटी दे सरकार

नयी दिल्ली, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा अन्य प्रमुख वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को सार्वजनीन बनाने और प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा तथा आम जन की कल्याण योजनाओं एवं अधिकारों को गरीबी के बारे में योजना आयोग के दोषपूर्ण आकलनों से असंबध्द करने की मांग की है। माकपा महासचिव प्रकाश करात की अगुवाई में माकपा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) फारवर्ड ब्लाक तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के शीर्ष नेताओं ने प्रभावी खाद्य सुरक्षा कानून के लिये चारों दलों के महीने भर के देशव्यापी साझा आंदोलन तथा राजधानी में पांच दिन के धरने के समापन के बाद आज यहां प्रधानमंत्री से मुलाकात करके उन्हें यह मांग का ग्यापन सौंपा। श्री करात भाकपा के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी फारवर्ड ब्लाक के महासचिव देवब्रत विश्वास तथा आर.एस.पी के सचिव अवनित राय ने मुलाकात के दौरान कहा कि 1990 के दश में तथाकथित आर्थिक सुधारों के दौर के क्रम में शुर की गयी लक्षित पीडीएस प्रणाली ने गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) तथा ऊपर (एपीएल) का विभाजन करके सस्ते अनाज की हकदार एक विशाल आबादी को इससे वंचित कर दिया। उन्होंने निश्चित आमदनी से महरम कामगारों के विशाल असंगठित क्षेत्र और दुनिया में भूख से पीड़ित लोगों की सबसे बड़ी संख्या की भारत में मौजूदगी का जिक्र करते हुये कहा कि केवल एक व्यापक तथा समावेशी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था ही इस समस्या का समाधान है और इसके लिये लक्षित पीडीएस प्रणाली की विदाई तथा एपीएल-बीपीएल के भेद के बिना हर परिवार को दो रुपये प्रति किलो की दर से हर महीने 35 किलो अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करने की विधाई व्यवस्था ही एक मात्र रास्ता है।

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