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बरसात के मौसम में बरतें सावधानी

वर्षा का मौसम जहां सुहाना व लाभकारी होता है, वहां कुछ जगह यह बाढ़ के रूप में कष्टकारी हो जाता है। महानगरों में जहां जल भराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है, वहीं निचले इलाके पानी में डूब जाते हैं। कच्चे मकान पानी में ध्वस्त हो जाते हैं। इनके गिरने से अनेक व्यक्ति, मवेशी मर जाते हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, गुजरात तथा महाराष्ट्र में आमतौर पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहती हैं। इन चार राज्यों को बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया गया है, क्योंकि अरब सागर की पश्चिमी हवाएं पश्चिमी घाट पर तथा खाड़ी बंगाल की हवाएं पूर्वी घाट पर जमकर वर्षा करती हैं। फिर अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ की समस्या कहीं भी उत्पन्न हो सकती है। यदि हम पहले से ही इसकी तैयारी कर लें तो अपेक्षाकृत हमें कम नुकसान उठाना पड़ेगा। बाढ़ और भारी वर्षा से बचने के संदेश सरकार द्वारा समय-समय पर समाचार-पत्रों में प्रकाशित किए जाते हैं, जिन्हें हम पढ़कर महज कागज का टुकड़ा समझकर फाड़ देते हैं। हमारी लापरवाही बाढ़ से कही ज्यादा खतरनाक सिध्द हो सकती है, इसलिए इसके प्रति सावधानी से हमारा बचाव संभव हो सकता है।
वर्षा का समय आने पर मौसम की ताजा जानकारी और बाढ़ से संबंधित सूचना को टेलीविजन या रेडियो के माध्यम से देखें और सुनें। अगर ऐसी संभावना हो तो दूसरों को भी सचेत किया जाए। समाचारों में प्रसारित होने वाली मौसम की जानकारी उपग्रह के माध्यम से ली जाती है, जो प्राय: सही होती है। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए एक आपातकालीन बैग पहले से ही तैयार कर लेना चाहिए, जिसमें रेडियो/ट्रांजिस्टर, टार्च, अतिरिक्त बैटरी, फास्ट-एड बॉक्स, जरूरी दवाइयां, खाद्य वस्तुएं हों। इस बैग में पीने के पानी की बोतल, माचिस, मोमबत्ती, बिस्कुट, जरूरी वस्तु जैसी सामग्री शामिल की जा सकती है। बाढ़ की स्थिति में लालटेन, लैम्प, रस्सी, ट्यूब, छाता और बांस की लाठी आपको बाहर निकालने में सहायक हो सकती है। यदि भारी वर्षा की चेतावनी पहले ही मिल जाए तो नकदी राशि, जेवर, बहुमूल्य वस्तुएं तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज संभालकर रखें जाए। अगर ऐसा न हुआ तो नुकसान की संभावना ज्यादा हो सकती है। जरूरी कागज तो बार-बार बन भी नहीं पाते। बाढ़ के खतरे को भांपते हुए अपने परिवार को समय रहते सुरक्षित स्थान राहत शिविर, ऊंचा स्थान या सरकार द्वारा निर्धारित की गई जगह हो सकती है। अपने मवेशियों को भी सुरक्षित स्थान पर ले जाना न भूलें। घर छोड़ने से पूर्व घर की ताला अवश्य लगाएं तथा बिजली के स्विच बंद कर दें। वर्षा के मौसम में करंट आने की संभावना ज्यादा रहती है अत: करंट से बचने के लिए बिजली के खंभों और झुके हुए तारों से दूर रहें। बिजली के गीले उपकरणों का इस्तेमाल न करें। यदि स्वयं पानी में भीगे हैं तो बिजली उपकरण को न छुएं। ऐसे मौसम में नंगे पांव रहना और भी हानिकारक सिध्द हो सकता है।
आसमानी बिजली से बचने के लिए तेज वर्षा में घर से न निकलें। रुके हुए पानी में घुसने से परहेज करें व बच्चों को पानी में या पानी के निकट न खेलने दें। बाढ़ के दिनों में जहरीले जीवों जैसे सांप, बिच्छू का भय ज्यादा रहता है, इनसे सावधान रहना चाहिए। नगर में रहने वाले लोगों को सीवर लाइन, गटर, नालों से दूर रहना चाहिए। वाहन चलाते समय बरसात में वाहन की गति धीमी रखी जाए व लाइट का प्रयोग किया जाए तथा टूटे हुए और जर्जर पुलों से फासला रखें।
इन सब बातों के अलावा वर्षा में सेहत का ध्यान रखना भी अति आवश्यक है। क्योंकि इस मौसम में गंदा पानी जमा होने के कारण मच्छर, मक्खियां पैदा हो जाते हैं, जिनसे मलेरिया, टाईफाइड, हैजा, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियां लग जाती हैं। इनसे सावधानी के लिए पानी उबालकर तथा छानकर पिया जाए। ताजे व पके हुए भोजन का सेवन हो। अपने खाने को हमेशा ढंककर प्रयोग करें। इसके लिए जालीदार वस्तु को प्रयोग में लाया जा सकता है। भारी वर्षा के बाद घर की नालियां और गटर की सफाई रखें। अपने आस-पास के वातावरण को शुध्द रखने के लिए ब्लीचिंग पाउडर या चूने का इस्तेमाल किया जा सकता है। डीडीटी पाउडर उपलब्ध हो तो गंदे पानी या नालियों के बाहर छिड़ककर मलेरिया को रोका जा सकता है।
वर्षा से संबंधित चेतावनी और बाढ़ से बचने के उपाय समय-समय पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन भारत सरकार द्वारा जनहित में जारी किए जाते हैं, उन्हें पढ़ना चाहिए और उन पर अमल करना चाहिए। किसी रोग की आशंका से ग्रस्त होने पर तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए। वर्षा का मौसम एक आनंददायक मौसम होता है। वर्षा को तभी तो शायद ‘ऋतुओं की रानी’ का ताज प्राप्त है। अगर हम जरा भी सावधानी बरतें तो बाढ़ की भयंकर आपदा से निपट सकते हैं। हमारी सूझ-बूझ काली घटाओं के मौसम के मजे को दुगुना कर देगी।

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