कार्बन के कण हैं कैंसर कारक
वातावरण में मौजूद सभी प्रकार के धुंओं में कार्बन के कणों की मात्रा कम या ज्यादा होती है, घर में चूल्हे का धुंआ हो, वाहनों का धुंआ हो, सिगरेट का धुंआ हो अथवा कारखानों से निकलता धुंआ हो इसमें कार्बन के कणों की मात्रा होती है। यह किसी में कम तो किसी में ज्यादा होती है। कार्बन के कणों की कम मात्रा को हमारा शरीर बर्दाश्त कर लेता है किन्तु कार्बन के कणों की अधिकता की स्थिति में श्वसन तंत्र एवं फेफड़ों को दिक्कत होने लगती है। सर्वप्रथम इनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। सांस लेने में परेशानी होती है। लगातार कार्बन के कणों वाले स्थान पर रहने से श्वसन तंत्र एवं फेफड़ों में इन कार्बन के कणों का जमाव शुरू हो जाता है। शरीर के जिस भाग में यह ज्यादा मात्रा में जमा होते हैं। वहां पर कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। सभी कैंसर विशेषज्ञ इस कार्बन के कणों को ही ऐसे मामलों में कैंसर कारक तत्व मानते हैं।


