सहायक एटार्नी जनरल अपने पद से निलम्बित
सूफी संगीतकार एवं अनेक सामाजिक और व्यपारिक वर्ग के लोग यहां आ कर इस बात को मेहसूस करते हैं कि 1947 में जो कुछ हुआ वह ठीक नहीं हुआ । उन्हे यह भी विश्वास है कि यह विभाजन कृत्रिम है और एक दिन समाप्त हो कर ही रहेगा । देशों के विभाजन टिकाऊ नहीं होते यह अनेक देशों के अनुभव से सिध्द हो चुका है इसलिय वे फिर से एकता के सूत्र में भी बंध गए । पाकिस्तान से ऐसे भी व्यक्ति भारत की यात्रा पर आते हैं जो यहां आ कर अपनी सामाजिक और मानवीय वृत्ति से लोगों का मन मोह लेते हैं । लेकिन वे व्यक्ति जब पाकिस्तान लौटते हैं तो सरकार और कटटरवादी उन के साथ कैसा व्यवहार करते हैं यह ढ़का छिपा नहीं है ।
अल्पसंख्यकों में विश्वास बहाली का प्रयास
पिछले दिनों पाकिस्तान की एक ऐसी ही महान हस्ती का भारत आगमन हुआ । वे थे पाकिस्तान के सहायक एटार्नी जनरल खुरशीद खान । उन का मानना है कि सेवा ऐसा माध्यम है जो दोनों देशों को निकट ला सकता है । उन के मतानुसार हमारे सूफ़ी संतों के कारण ही भारतीय उपखंड में प्रेम और विश्वास का वातावरण बना था । यदि उस मार्ग को फिर से अपनाया जाए तो पुराने दिन लौट सकते हैं । खुरशीद खान का कहना है कि कार सेवा की भावना को जाग्रत किया जाए तो लोग निकट आ सकते हैं । वे कहने में कम और करने में अधिक विश्वास रखते हैं । उन का अपना आन्दोलन एकला चलों रे की भावना से ओतप्रोत है । पाकिस्तान में अल्पसंख्सयकों के धर्मस्थल तोडे जाते हैं । उन पर अवैध क़ब्ज़ा कर लिया जाता है । पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षो से सिखों , हिंदुओं , अहमदियों और शीयाओं का जीना हराम हो गया है । खुरशीद खान अकेले समय मिलते ही अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों पर पहुंच जाते हैं । वहां जा कर वे साफ़ सफ़ाई करते हैं , उन की झूठी प्लेटों को धोते हैं और वहां आने वाले लोगों के जूतों की पालिश करते हैं । अपनी इस सेवा को वे प्रयाश्चित का माध्यम मानते हैं । उन का विश्वास है कि इस से अल्पसंख्यकों में विश्वास पैदा होगा । उन के धर्मस्थलों के प्रति जब सम्मान दर्शाया जाएग तो निश्चित ही दूरियां कम होगी । इस से अल्पसंखयक और बहु संख्यक निकट आएंगे । यह विश्वास उन्हे आपस में जोडेगा । जिस से समाज में प्रबल रूप से एकता पैदा होगी । इसलिये खुरशीद खान समय मिलने पर इन धर्मस्थलों में जाते हैं और अपनी आस्था बतलाने आए अपने अल्पसंख्यक बंधुओं के धर्मस्थलों में पहुंच कर उन की सेवा में लीन हो जाते हैं । पंजाब के गुरूद्वारों और सिंध के हिंदू मंदिरों में पहुंच कर वे उन के साथ भाइचारा बढ़ा कर सेवा के माध्यम से उन को अपनी शुभकामनाओं का संदेश पहुंचाने का प्रयास करते हैं । उन का कृतृत्व केवल शुब्दों में नहीं बलिक उन की सेवा कर के उन का मन मोह लेते है ।
किंतु इस सम्बंध में चौंका देने वाली घटना उस समय घटी जब वे पिछले दिनों भारत आए । उस समय वे अमृतसर पहुंचे और वहां जा कर स्वर्ण मंदिर में अपनी कार सेवा से सैंकडों लोगों का दिल जीत लिया । इस की चर्चा मीडिया में तो होना ही था । उस समय भारत के लोगों को ऐसा लगा कि इस व्यक्ति की भावनाएं पाकिस्तान में रहने वाले मुस्लिम समाज के लिये प्रेरणादायी है । पाकिस्तान में रहने वाले अल्प संख्यकों को यह सुखद आश्चर्य होता है कि बहु संख्यक समाज का व्यक्ति जो सरकार के उच्च पद पर बिराजमान है वह हमारी आहत भावनाओं से परिचित है ? व्यक्तिगत रूप से वह पाकिस्तान की सरकार और आतंकवादियों को समझाने में तो निष्फल है लेकिन उन की सेवा कर के वे उन के घावों पर मरहम तो लगा ही सकता है । मेल मिलाप का यह अनोखा तरीका जो भी देखता है वह प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है । इसलिये एटार्नी जनरल खुरशीद खान जहां भी जाते हैं मंदिरों, गुरूद्वारे और बुध्द विहारों में पहुंच कर वहां पूजा पाठ के लिये आने वाले लोगों की सेवा में लीन हो जाते हैं । वे उन के जूते साफ़ करते हैं ,फ़र्श पर झाडू लगाते हैं और उनके झूठे बर्तन मांज कर के यह संदेशा देते हैं कि पाकिस्तान में अब भी मानवता जीवित है । पिछले दिनों खुरशीद खान जब दिल्ली पहुंचे तो वहां के गुरूद्वारे में भी बूट पालिश करने और झूठे बर्तन साफ़ करने के लिये पहुंच गए । खुरशीद खान पाकिस्तान सरकार में तो एटार्नी जनरल की हैसियत धराते ही हैं लेकिन निजी रूप से वे मेल मिलाप के कटटर पक्षधर हैं । खुरशीद खान उत्तर पश्चिम सूबे में स्थित पेशावर के रहने वाले हैं । खान ने अपने नेपाल और भूटान दौरे के समय वहां के मंदिरों में भी वही किया जो पाकिस्तान के मंदिरों में करते हैं ।
पाकिस्तान सरकार व सुप्रीम कोर्ट खफा
भारत में की गई सेवा से पाकिस्तान सरकार अपने आप को लज्जित मेहसूस कर रही थी । इसलिये एटार्नी जनरल इरफ़ान क़दीर ने उन्हे उन के पद से हटा देने की घोषणा कर दी । कदीर का कहना था कि एटार्नी जनरल का पद कोई स्थायी नहीं है । इस का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है लेकिन, सरकार जब चाहें उसे हटा सकती है और उस के स्थान पर नए व्यक्ति की नियुक्ति कर सकती है । यह उस का सामान्य नियम है । जिस समय पाक एटार्नी जनरल कदीर ने यह घोषणा की उस समय खुरशीद खान नेपाल के दौरे पर थे । खुरशीद खान ने पाकिस्तान लौट कर यह बयान जारी किया कि श्री क़दीर ने मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा है कि मैं अवामी नेशनल पार्टी का सक्रीय कार्यकर्ता हूं । मैंने दीवाने खास नामक रेस्टोरंट का अवैध निर्माण किया है । खुृरशीद खान का कहना था कि यह मुझ पर बेबुनयाद आरोप है । वास्तविकता तो यह है कि मेरा सेवा कार्य उन को नहीं भाया । पाक सरकार इस को अपना अपमान मानती है । इसलिये इस प्रकार के झूठे आरोप लगा कर मुझे अपने पद से मुक्त कर दिया गया है । खुरशीद खान ने कहा कि मैंने अपनी समस्त सरकारी सुविधाओं को तत्काल लौटा दिया है
खुरशीद खान उस समय चर्चित बने जब पेशावर के जोगनशाह गुरूद्वारे पर आतंकवादियों ने हमला कर के कुछ सिखों की हत्या कर दी और वहां से कुछ लोगों का अपहरण कर लिया । इस घटना के बाद सिखों के घावों पर मरहम लगाने के लिये उन्होने कार सेवा प्रारम्भ की तो सरकार को यह नहीं भाया । अंतत: सरकार ने उन्हे सहायक एटार्नी जनरल के पद से हटाने की घोषणा कर दी । उक्त घटना मार्च 012 की है ।


