विद्या बालन : बॉलीवुड की ‘लेडी खान’
विद्या बालन ने जब अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत की तो उनके सामने एक कठिन फैसला था- उस रास्ते को अपनाए जिस पर पहले भी लोग चल चुके हैं या अपना एक अलग रास्ता बनाए? अपने बनाए रास्ते पर चलने में अकेले रह जाने का डर रहता है, लेकिन सफल होने की सम्भावनाएं भी बनी रहती हैं। विद्या बालन ने रिस्क लेने का फैसला किया और जिस आयु में अभिनेत्रियां विवाहिता की भूमिका निभाने से भी डरती हैं, उन्हों पा में एक 13 वर्षीय लड़के की मां की भूमिका निभाई। उनके सामने जब यह रोल आया था तो दो विकल्प थे- इंकार कर देना या फिर चुनौती को महान समझकर स्वीकार करना। उन्हें अंदाजा नहीं था कि चुनौती को महान समझकर स्वीकार करना। उन्हें अंदाजा नहीं था कि भूमिका किस तरह से उभरकर आयेगी, लोग पसंद करेंगे या नहीं।
चुनौतीपूर्ण अवसर
दरअसल जब आप चले हुए रास्ते पर चलते हैं तो आपके पास संदर्भ उपलब्ध रहते हैं। लेकिन विद्या बालन ने चुनौतीपूर्ण अवसर से भरपूर लाभ उठाना तय किया। यही कोशिश उनकी इश्कियां में भी रही, जिसमें उनका चरित्र आक्रामक, सेक्सुअली बेबाक, धूर्त व चालाक और काफी हद तक नकारात्मक था। उन्होंने पटकथा को कई बार पढ़ा। कई बार इंकार करने का मन बनाया। कई बार सोचा कि किसी से मालूम किया जाए कि उनका फैसाल सही रहेगा या नहीं। उनके परिवार ने केवल इतना कहा- ‘अगर तुम्हें सही महसूस होता है तो आगे बढ़कर हां कह दो।’ इसने उनके आत्मविश्वास को निश्चित रूप से बढ़ा दिया था। लेकिन कभी-कभी आप दूसरों से सुनना चाहते हैैंं कि जो आप कर रहे हैं वह सही है। बहरहाल उन्होंने पा व इश्कियां दोनों फिल्में की और विभिन्न अवार्ड समारोह में उन्हें इनके लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला।
परिणिता में अपने अभिनय से प्रभावित करने के लिए विद्या बालन को लगे रहो मुन्ना भाई, हल्ला बोल व गुरू जैसी फिल्में मिलीं। उनके काम की हर तरफ तारीफ होने लगी। लेकिन हे बेबी के बाद हर कोई उनकी आलोचना करने लगा। विद्या बालन को समझ नहीं आया कि उनसे कही गलती हुई। लेकिन एक बात निश्चित रूप से समझ में आ गयी कि हर समय हर व्यक्ति को प्रसन्न नहीं किया जा सकता। हां, अपने आपको संतुष्ट किया जा सकता है। अगर आप अपने आपको संतुष्ट कर लेंगे तो दूसरे भी आपसे संतुष्ट हो जाएंगे। बहरहाल अगर विद्या बालन की आलोचना न हुई होती तो उनके कभी यह समझ में नहीं आता कि क्या किया जाए और क्या न किया जाए।
दरअसल विद्या बालन ने भारतीय नारी की जिस छवि में अपने आपको विकसित किया है, उसने निश्चित रूप से उनको लाभ पहुंचाया है। वह कहती है, ‘मैं भारतीय नारी हूं और मुझे इस बात पर गर्व है। मेरा चेहरा व मेरे शरीर की बनावट भारतीय है। आज का सिनेमा सत्य के बहुत निकट है, हम आज की सच्चाई दिखा रहे हैं। वह दिन गए जब सिनेमा आपको केवल सपने दिखाता था, जब वह केवल कल्पनाओं के बारे में था और जब आप सच्चाई से भागने के लिए फिल्में देखा करते थे। आज लोग इसलिए फिल्म देखते हैं ताकि महसूस कर सकें कि अगर पर्दे पर एक्टर ऐसा कर सकता है तो हम भी ऐसा कर सकते हैं। लोग फिल्मी चरित्रों में अपने आपको देखने लगे हैं। वह भावनात्मक रूप से चरित्रों से जुड़ रहे हैं। हमारे जीवन के अनेक अनेक रंग हैं और हम उन सबको फिल्मों में देखना चाहते हैं। नूतन, मधुबाला, मीनाकुमारी, रेखा, हेमा मालिनी और श्रीदेवी व माधुरी दीक्षित के जमाने में चीजें बहुत साधारण थीं।’
लेकिन आज की अभिनेत्रियां अपने जीवन या कैरियर पर अधिक नियंत्रण रखे हुए हैं। आज की अभिनेत्री एक शिक्षित महिला है। अभिनेत्रियों की बात छोड़िए आज तो एक छोटा बच्चा भी कम्प्यूटर पर एक शब्द टाइप करता है और पूरी दुनिया उसके सामने खुल जाती है। जाहिर है यह सब एक अभिनेत्री के जीवन व कैरियर में भी प्रतिबिंबित होगा।
अकेले दम पर
विद्या बालन ने अपने अकेले दम पर जो इश्कियां, द डर्टी पिक्चर व कहानी को सफलता दिखाई है, उसके आधार पर लोग उन्हें खानों की श्रेणी में रखने लगे हैं। वह इस समीक्षा को अपनी तारीफ मानती हैं, दरअसल सफलता पाने से अधिक कठिन कार्य सफलता के शिखर पर बने रहना है। विद्या बालन को भी इस बात का एहसास है, लेकिन वह कहती हैं, ‘मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचती। मैंने जब फिल्म पा की थी तो लोगों ने कहा कि तुमने अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका की है, अब तुम्हें अपने कम के प्रति अधिक सावधान रहना पड़ेगा। लेकिन इसके बाद मैंने इश्कियां और नो वन किल्ड जेसिका की। फिर द डर्टी पिक्चर व कहानी आयी। आजकल महिलाओं के लिए भी अलग अलग किस्म की भूमिकाएं लिखी जा रही है। मुझे अपना काम पसंद है, मैं अपना काम दिल लगाकर करती हूं। अगर ईश्वर मुझे इस मुकाम तक लेकर आया है, तो वह मुझे आगे भी लेकर जायेगा।’
व्यक्ति में अगर प्रतिभा हो तो उसके लिए रास्ते खुद व खुलने लगते हैं। स्मिता पाटिल व शबाना आजमी के लिए विशेषरूप से भूमिकाएं लिखी जाती थीं। आजकल विद्या बालन के लिए लिखी जा रही हैं। यह निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है। फिर भी विद्या बालन कहती हैं, ‘मैं शबाना आजमी से प्रभावित हूं। लेकिन मैं एक अलग दौर में काम कर रही हूं और इसके अपने फायदे हैं। उन दिनों महिला-आधारित फिल्मों को कला फिल्मों को कला फिल्मों की श्रेणी दी जाती थी। लेकिन आज उनका कमर्शियल मूल्य है। यह जबरदस्त परिवर्तन है। लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगी कि मैं कभी भी अपनी तुलना शबाना व स्मिता से नहीं कर सकती। वह लीजेंड हैं। उनके आस-पास तक पहुंचने में मुझे अभी बहुत समय लगेगा।’
विद्या बालन अपनी फिल्मों में इस कद्र हावी होने लगी हैं कि पुरुष एक्टर उनके साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने में घबरा रहे हैं। लेकिन वह इस बात से सहमत नहीं है। वह हर किसी के साथ काम करना चाहती हैं और उम्मीद करती हैं कि हर कोई उनके साथ भी काम करेगा। अभी बहुत से एक्टर हैं जिनके साथ उन्होंने काम नहीं किया है, जैसे ऋतिक रोशन, शाहरूख खान, आमिर खान, सलमान खान, रणवीर कपूर आदि, जिनके साथ वह काम करने की इच्छा रखती हैं। वह कहती हैं, ‘हर किसी का अपना स्थान है। हम सभी अलग-अलग चरित्र निभाते हैं। जिसे पटकथा पसंद आयेगी वह मेरे साथ काम करेगा।’
हालांकि विवाह के बारे में विद्या बालन ने अभी तक नहीं सोचा है, लेकिन एक दिन वह विवाह अवश्य करना चाहेंगी। फिलहाल उनका नाम सिध्दार्थ रॉय कपूर (सीईओ, यूटीवी) से जोड़ा जा रहा है, लेकिन इस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं बल्कि कहती हैं, ‘मेरी अभी तक शादी नहीं हुई है और जब तक शादी नहीं हो जाती एक योग्य वर की तलाश जारी रहती है। मेरे लिए आदर्श व्यक्ति वह है जो मुझे वैसे ही स्वीकार करे जैसी मैं हूं और मैं भी उसको उसी तरह स्वीकार करूं। अगर आप व्यक्ति को बदलने का प्रयास करेंगे तो उसके साथ नहीं रह सकते।’


