रांची में कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना होगी
रांची, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के द्वारा रांची में भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना की जाएगी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के प्रस्ताव को मूंजूरी दे दी। इस योजना के दौरान संस्थान की स्थापना पर 287.50 करोड़ की लागत आयेगी।
भारत सरकार के पत्र सूचना ब्यूरो के अनुसार प्रस्तावित संस्थान को डिम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाएगा।
इस संस्थान में बायो इन्फोरमेटिक्स, जेनटिक इंजीनियरिंग नैनो टेक्नोलॉजी, डायगोनोस्टिक एवं प्रोफिटेन्टिस, बेसिक एवं सोशल साइंस तथा कम्युनिकेशन की पढ़ाई होगी।
संस्थान में जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के लिए जरूरी उच्च प्रशिक्षित मानक शक्ति विकसित करने के लिए एकेडमिक कार्यक्रम की डिजाइन की जाएगी तथा एस कोर्स को पूरा करने वाले छात्र-छात्राओं को डाक्टर एवं स्ातकोत्तर डाक्टर की डिग्री दी जाएगी।
संस्थान में होने वाले अनुसंधान के परिणाम का स्थानान्तरण कृषि विश्व विद्यालयों एवं अन्य संस्थानों कको किया जाएगा ताकि इसके माध्यम से अच्छी फसल एवं उत्पादकता बढ़ सके। मालमू हो कि देश में खाद्यान्न एवं चारे की मांग बढ़ रही है। विकास दर में वृध्दि से खाद्यान्न की घरेलू मांग बढ़ेगी।
जनसंख्या में वृध्दि होने के कारण खाद्यान्न की मांग 53 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है तथा शेष प्रति व्यक्ति खपत के कारण बढ़ेगी।
वर्ष 2020 तक खाद्यान्न का उत्पादन 245 मिलियन टन तथा मांग 284 मिलियन टन होने की संभावना है। इसी तरह सब्जियों का उत्पादन 138 मिलियन टन तथा मांग 160 मिलियन टन होने की संभावना है। फल का उत्पादन 74 मिलियन टन तथा मांग 97 मिलियन टन होने की संभावना है। अत: इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्पादन बढ़ानी होगी। उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए दूसरी हरित क्रान्ति की जरूरत होगी। अत: इस तरह का संस्थान इसमें योगदान दे सकता है।


