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बॉलीवुड में साउथ की वापसी

बॉलीवुड के खान बादशाह यानी के शाहरुख खान अपने कैरियर में पहली बार साउथ की किसी फिल्म के रीमेक में काम कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तमिल फिल्मों के निर्देशक लॉरेंस की सुपरहिट रही फिल्म कांचा के रीमेक में काम करने के लिए शाहरुख ने अपनी सहमति दे दी है। मीडिया में मसालेदार खबरों में इसे सलमान खान से उनकी दुश्मनी के साथ जोड़ दिया गया है।

सलमान के कैरियर की हालिया फिल्मों में साउथ की रीमेक फिल्मों का बड़ा योगदान रहा है, पहले वांटेड, फिर रेडी और पिछले साल प्रदर्शित बॉडीगार्ड ने सलमान के कैरियर को एक नई बुलन्दी दी। ये सभी फिल्में साउथ फिल्मों की रीमेक थी। अजय देवगन ने सिंघम में काम किया, यह भी एक रीमेक थी, आमिर खान की गजनी की सफलता को कौन भूल सकता है, जो साउथ की रीमेक थी।

याद है वो जमाना
ऐसा लगता है कि बॉलीवुड में साउथ के रीमेक का पुराना दौर फिर से लौट आया है। हर बड़ा स्टार साउथ की फिल्मों के रीमेक की तरफ लपक रहा है। याद आता है, 80 का वह दशक, जब जीतेन्द्र के साथ उस दौर में साउथ के निर्माताओं औऔर निर्देशकों ने मुम्बई का रुख करके मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री का चेहरा ही बदल दियाथा। जीतेन्द्र तो उन फिल्मों के रीमेक का प्रतीक बन चुके थे। जीतेन्द्र के अलावा मिथुन चक्रवर्ती और बाद में अनिल कपूर, जैकी श्राफ, संजय दत्त और गोविन्दा ने भी कई ऐसी रीमेक में काम किया, 80 का दशक खत्म होते-होते तक यह दौर भी खत्म हो चला था, जो दो दशक बाद अब फिर से लौटने के रास्ते पर है।

बॉलीवुड फिल्मों में भी रीमेक
आखिर क्या वजह है कि इस दौर के सभी नामी सितारे साउथ के रीमेक का रुख कर रहे हैं। इसकी पहली वजह मानी जा रही है कि अंग्रेजी पिल्मों की कहानियों की नकल का दौर कमजोर हो गया है। इसकी वजह हॉलीवुड के कई बड़े स्टूडियो का मुम्बई में दफ्तर खोरना रहा, जिसके माध्यम से वे इस तरह की चोरियों पर नजर रखते हैं, कई बार इस तरह की फिल्मों को बन्द करने की नौबत आई। फिल्म आलोचक तरुण आदर्श का मानना है कि साउथ का रीमेक हिन्दी फिल्मों के लिए नया नहीं है, ऐसा भी नहीं है कि साउथ की फिल्मों का ही हिन्दी रीमेक होता है, जब कोई हिन्दी फिल्म हिट होती हैं, तो उसके साउथ में भी रीमेक होते हैं। वे मुन्नाभाई, थ्री इडियट्स समेत कई हिट फिल्मों के रीमेक बने और काफी हद तक सुपरहिट रहे.

एक्शन है खूबी
तरूण आदर्श मानते हैं कि साउथ की फिल्मों में हीरो के हीरोइन्स को ‘लार्जर दैन लाइफ’ बना कर पेश किया जाता है, हीरो के कैरेक्टर में एक्शन प्रमुख होते हैं। वे कहते हैं कि सलमान की सभी हिट फिल्मों में हालांकि रोमांस भी था, लेकन इन फिल्मों को दूसरे मसालों के अलावा एक्शन की वजह से हिन्दी में पसंद किया गया। अजय देवगन की सिंगम के लिए भी यही उदाहरण देते हैं। सलमान और अजय इन रीमेक में एक गैप के बाद एक्शन रोल में नजर आए, उनको पसंद करने राले प्रशंसकों ने महसूस किया कि उनके हीरो असली रूप में लौट आए हैं। अपनी पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ से एक्शन हीरो के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले अजय देवगन कहते हैं, ‘मुझसे अक्सर पूछा जाता था कि मैं एक्शन फिल्मों में काम क्यों नहीं कर रहा हूं, मुझे लम्बे समय से ऐसी स्क्रिप्ट की तलाश थी, जिसमें एक्शन कहानी का हिस्सा हो, ‘अजय के एक और महत्वपूर्ण बात की तरफ इशारा किया। उनका कहना था कि कुछ सालों पहले हिन्दी दर्शकों को कॉमेडी फिल्में ज्यादा पसंद आ रही थी। वे अपनी ‘गोलमाल सीरिज की फिल्मों को आल दी बेस्ट का उदाहरण देते हैं जिनमें कॉमेडी की स्क्रिप्ट में काम कर दिखाया। वे कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि अब कुछ समय तक एक्शन फिल्में ज्यादा काम करेगी, वे इसे भी एक दौर मानते हैं।’

अक्षय को एक्शन का सहारा
अजय देवगन की तरह अक्षय कुमार ने भी एक्शन हीरो के तौर पर पहचान बनाई थी, दिलचस्प बात यह है कि अक्षय ने प्रियदर्शन की साउथ की रीमेक फिल्मों में अपनी कॉमेडी से सफलता का रास्ता ढूंढ लिया, जो हेरा-फेरी से शुरू हुआ, लेकिन अक्षय कै कैरियर इन दिनों संकट से घिरा नजर आ रहा है, तो इसकी एक वजह मानी जा रही है कि वे एक्शन फिल्मों में दूर है, जो उनकी पहली पहचान रही है। अब अक्षय कुमार भी एक्शन की तरफ लौट रहे हैं और खबर है कि उन्होंने दो साउथ की रीमेक के अधिकार खरीदे हैं, वे मानते हैं कि एक्शन पसन्द करने वाले दर्शकों को उनकी वापसी का इन्तजार है और वे जल्द ही इस इन्तजार को पूरा करेंगे। साउथ के रीमेक को लेकर अक्षय की दलील है कि कहानी अच्छी लगे, तो कोई और बात मायने नहीं रखती।

बॉलीवुड की भेड़चाल
बॉलीवुड विश्लेषक विनोद मीरानी इस भेड़चाल मानते हैं, जो हमेशा बॉलीवुड का हिस्सा रही है। उनका कहना है कि अंग्रेजी फिल्मों की स्टोरी चुराना कम हो गया है। हॉलीवुड की फिलमों के रीमेक के अधिकरा खरीदने के लिए बड़ी राशि चुकानी पड़ती है। इसलिए ये हीरो साउथ का रुख कर रहे हैं। यहां किसी साउथ की फिल्म के डायरेक्टर को हिन्दी रीमेक के लिए लाकर ये काम आसान बना लेते हैं।

तेलगू फिल्मों से मुम्बई का रूख करने वाले रामगोपाल वर्मा का कहना है ‘मेरे पास मेरी फिल्मों का खजाना है, तो मैं किसी और तरफ रुख क्यों करूंगा। एक पिल्म का रीमेक करना बिजनेस के हिसाब से आसान और भरोसेमंद होता। सलमान खान ने रेड्डी की कामयाबी के बाद कहा था, ‘मैं तमिल भाषा नहीं जानता, लेकिन बॉडीगार्ड (तमिल) देख कर मुझे भाषा की समस्या नहीं हुई।’ सलमान के इन शब्दों से कहा जा सकता है कि कला के क्षेत्र में भाषा कोई मायने नहीं रखती। भाषा किसी की सीमा में कैद होकर नहीं रह सकती।

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