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आर्थिक संकट या व्यवस्था की कमी

झारखंड में वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं हो रहा। राज्य में वित्तीय अव्यवस्था का आलम यह है कि सरकारी खजाने से बड़ी राशि निकाल कर पीएल एकाउंट में जमा कर दी गयी है और राज्य आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। सरकारी खजाने से 1774 करोड़ रुपये निकाल कर पीएल एकाउन्ट में डाली गई राशि बिना खर्च के पड़ी हुई है और दूसरी ओर योजनाओं के संचालन के लिए कोष में राशि नहीं होने का रोना रोया जा रहा है। पीएल एकाउन्ट में जमा राशि को जून 2012 तक खर्च करना था। लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद पैसे खर्च नहीं किये गये। इस राशि से गरीबों के कल्याण के कई काम होने थे। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण राशि बिना उपयोग किये बैंक में पड़ी है। बैंकों में जमा राशि को गरीबों के लिए इंदिरा आवास, सरकारी अस्पतालों के लिए दवा की खरीद और छात्र-छात्राओं के लिए साइकिलें खरीदने के अलावा ऊर्जा और नगर विकास के कल्याणकारी कार्यक्रमों में खर्च किया जाना था। सरकारी खजाने से राशि की निकासी कर पीएल एकाउण्ट में जमा करना नियम विरुध्द है। इस स्थिति से बचने के लिए सरकार सीओबीटी की अवधारणा राज्य में लायी थी लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो रहा है। राज्य में वित्तीय अव्यवस्था का ही नमूना माना जा सकता है कि एक ओर 1774 करोड़ रुपये बिना खर्च पड़े हुए हैं और दूसरी ओर राज्य की आर्थिक स्थिति खराब है। मुख्यमंत्री ने स्थति की समीक्षा की बात कही है लेकिन सवाल है कि इस स्थिति के लिए जिम्मवार कौन है। अधिकारी अपनी मनमर्जी चलाते हैं। राशि का हिसाब मांगने पर इसे लम्बे समय तक लटकाये रखा जाता है। कहना नही होगा कि यदि यह राशि खर्च होती तो इससे कई योजनाएं पूरी हो सकती थी और यदि यह राशि खजाने से निकाली नहीं जाती तो राज्य को आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता। पीएल खाते में जमा राशि और योजनाओं की मद में एडवांस लिये जाने पर सतत् निगरानी की जरूरत है। साथ ही साथ वित्तीय अव्यवस्था के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने की भी जरूरत है ताकि राज्य में वित्तीय व्यवस्था को दुरुस्त किय जा सके।

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