दीर्घायु का राज
यामीन याहूं की उम्र 120 साल है। उसका बड़ा बेटा 100 साल का है। छोटे बेटे की उम्र 90 साल है। वह अब भी अपना सारा काम स्वयं ही करता है। साइकिल चलाकर चारा लाना हो या बाजार से सब्जी लाना। यह उसकी रोज की दिनचर्या है। श्यामसुंदर की उम्र 85 साल है उनके तीन लड़के हैं। बड़े लड़के का एक लड़का है। उसकी उम्र 28 वर्ष है। श्यामसुंदर स्वस्थ व सेहतमंद है, जबकि उनका बड़ा लड़का अक्सर बीमार रहता है। इसका कारण जाना तो पाया कि श्यामसुंदर जिस ढंग से जीते हैं उनका बेटा उसके विपरीत ढंग से जीता है। यही वजह है कि श्यामसुंदर दीर्घायु की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि उनके बेटे के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है।
श्यामसुंदर रोज सबेरे 4 बजे उठ जाते हैं। नियमित कर्म से निवृत्त होते हैं, फिर घूमने चले जाते हैं। फिर आकर पूजा कर्म करते हैं। तुलसी को पानी देना। पौधों को सींचना। दोपहर को सादा खाना खाते हैं। रात को दो फुलके लेते हैं। इन्होंने वृध्दावस्था में कदम रखने के बाद से कभी तली-भुनी चीजें नहीं खाई। कभी दावत में सम्मिलित नहीं होते हैं। जब कभी भोज में जाना हो तो खाने समय जो खाना होता है वही खाते हैं। यानी इनका जीवन संयमित और नियमित है। इसमें कभी कोताही नहीं बरती जाती है।
यामीन याहूं की दीर्घायु का भी यही सच है। वे कहते हैं, ‘मेरी दीर्घायु का राज मेरा नियमित जीवन है। मैंने कभी अनियमित आहार-विहार नहीं किया है। हर समय नियमित रूप से अपना काम करता हूं। मेरा अपनी पत्नी और बच्चों से प्रगाढ़ संबंध ही मेरी दीर्घायु का राज है।’
दीर्घजीवी के दीर्घ जीवन का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इनकी दीर्घायु का राज इनका नियमित और व्यवस्थित जीवन ही है। ये अपने नियमित कार्य नियमित समय और आदत के अनुसार करते जाते हैं। इसकी वजह से इनका शरीर अपना कार्य सुचारू रूप से करता रहता है। इनका कहना है कि दीर्घायु वही व्यक्ति प्राप्त कर सकता है, जो नियमित और संयमित जीवन जीने का आदी होता है। प्रकृति स्वयं अनियमित नहीं होती है। सूरज सदा समय से उदित व अस्त होता है। समय से ऋतुएं आती-जाती हैं। सभी काम समय से होता है। समय पाकर ही शरीर पल्वित और पुष्पित होता है। इसलिए समय से कार्य करने वाला व्यक्ति ही दीर्घायु प्राप्त करता है। दीर्घायु प्राप्त करना कोई कठिन काम नहीं है। बस थोड़ा सा नियमित होने की जरूरत है। हर कार्य समय और शरीर के मुताबिक किए जाएं तो दीर्घायु प्राप्त की जा सकती है।
रोज नियम से जल्दी उठा जाएं। उसके बाद नियमित कर्म से निवृत्त हो कर दो-चार किलोमीटर घूम आएं। तब दोबारा निवृत्त हो लें। मगर इस दौरान नाश्ते-पानी से परहेज करें। खाना दो समय ही खाएं। जब-तब खाने की आदत छोड़ दें। बार-बार चाय न पिएं। इससे पेट को आराम नहीं मिलता है। शरीर को आवश्यकता से अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट प्राप्त होता है, जिसकी शरीर को आवश्यकता नहीं होती है। नियमित रूप से शारीरिक कार्य करें। मशीनों का कम से कम उपयोग करें। इससे शरीर का भरपूर व्यायाम होगा। इससे शरीर रूपी मशीन ज्यादा चुस्त-दुरूस्त होगी। खेत या कार्यालय जाने के लिए साइकिल का उपयोग करें। इससे साइकिलिंग होगी। जिससे मांसपेशियां सुदृढ़ होंगी। यह शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। तला-भूना कम से कम खाएं। जब भी इसके खाने की इच्छा हो तब इसे खाने के साथ खाएं। यानी तले-भूने खाने को अपने भोजन में सम्मिलित करें। यार-दोस्तों के साथ जब-तब दावत न उड़ाएं, यह सेहत के लिए नुकसानदेह होती है।
खाने में हरी-पीली सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए। दोपहर को न सोएं। इस समय को काम-धंधे में लगाएं। बाजार की खरीददारी इसी समय करें। खरीददारी के लिए बाजार पैदल जाएं।
सप्ताह में एक-दो दिन नदी, तालाब या स्वीमिंगपुल में तैरने जाएं। यह एक अच्छा व्यायाम है। इससे शरीर के सभी अंगों का व्यायाम होता है। व्यक्ति कम से कम बीमार होता है। इससे उस पर इलाज का खर्च बचता है।
यानी अपने शरीर का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए और मशीनों के उपयोग को टाला जाए तो दीर्घायु प्राप्त की जा सकती है।


