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अनुसंधानों के आईने में कैंसर

यद्यपि आज चिकित्सा विज्ञान ने दिन-दूनी रात चौगुनी तरक्की कर ली है, तथापि कैंसर आज भी एक चुनौती बना बैठा है। आज के चिकित्सा विज्ञानी इसका कोई प्रभावकारी इलाज नहीं ढूंढ़ पाए हैं। कैंसर पर आए दिन शोध होते रहते हैं। यहां हम कुछ ऐसे ही शोधों के बारे में बता रहे हैं :- वाशिंगटन के शोधकर्ताओं ने अध्ययनोपरांत बताया है कि जो लोग सप्ताह में कम से कम दो दिन टमाटर का सेवन करते हैं, उन्हें प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना 24 से 26 प्रतिशत तक घट सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार टमाटर में गैर आक्सीकारक तत्व पाए जाते हैं। इस कारण उक्त कैंसर का प्रकोप कम हो जाता है। मैक्सिको स्थित इंस्टीटयूट आफ सैलुड पब्लिका के अनुसंधान कर्ताओं ने लगभग 1865 महिलाओं पर अध्ययन करने के बाद इस तथ्य को उजागर किया है कि शरीर को आवश्यक ऊर्जा में से यदि कार्बोहाइड्रेट से 57 प्रतिशत या इससे अधिक ऊर्जा मिले तो संतुलित आहार लेने वाली महिलाओं की अपेक्षा स्तर कैंसर होने का खतरा 2.2 प्रतिशत बढ़ जाता है। इस कारण विज्ञानी बताते हैं कि चाकलेट, मिठाई, स्टार्च युक्त खाद्य पदार्थ आदि खाते रहने से रक्त में शक्कर की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है। इससे इंसुलिन सक्रिय हो जाता है फलस्वरूप कोशिकाओं में अनियंत्रित वृध्दि होने लगती है। यही अनियंत्रितता स्तन कैंसर का कारण बन जाती है। ताजा अनुसंधानों से पता चला है कि साबुन-शैम्पू के अंधाधुंध प्रयोग से जहां बालों का असमय पकना, झड़ना तो प्रारंभ हो ही जाती है, त्वचा कैंसर जैसी भयानक बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शैम्पू में नाइट्रोसैमाइंस नामक रासायनिक पदार्थ होने से उक्त कैंसर हो सकता है। ब्रिटेन के नार्विच स्थित इंस्टीट्यूट आफ फूड रिसर्च की पत्रिका आईएफआर न्यूज में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रीसिंका सब्जियों अर्थात सरसों, फूलगोभी, पत्ता गोभी आदि में एलाइल आइसोयायोसाइनेट नामक एक रसायन पाया जाता है जो कैंसर को रोकने में सक्षम है। ये रसायन कोलोन कैंसर कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन की प्रक्रिया जानसन के अनुसार उक्त रसायन कोलोरेक्टल कैंसर को भी रोकने में सक्षम है।

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