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कोयला घोटाला और शिंदे का मजाक

कोयला खदान आवंटन घोटाला उजागर होने के बाद देश में हंगामा मचा हुआ है, लेकिन केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। उनके एक बयान से यही पता चलता है कि श्री शिंदे इसे हंसी मजाक में ही ले रहे हैं। श्री शिंदे ने कहा है कि इस तरह के विवाद तो होते ही रहते हैं। पहले बोफर्स आया, लोग इसे भूल गये। अब तो पेट्रोल पंप आवंटन घोटाले का मामला भी लोगों को याद नहीं। इसी तरह कोयला घोटाले को भी लोग भूल जाएंगे। गृहमंत्री के इस बयान से कई सवाल उठने लगे हैं। बड़ी बात यह है कि जिस मामले को लेकर संसद लम्बे समय तक ठप रही, विपक्ष संसद से सड़क तक इसे लेकर आन्दोलन पर उतर आया, गृहमंत्री पद पर बैठे श्री शिंदे को यह सब मजाक लगता है और उनकी नजर में यह कोई गंभीर बात नहीं है। सवाल यह है कि गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठा कोई व्यक्ति अगर कोयला खदान आवंटन घोटाले को मामूली बात मानता है तो समझा जाये कि उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह समस्याओं के प्रति गलत नजरिया रखता है। श्री शिंदे के इस बयान से लोगों का विश्वास भी थोड़ा डिगा है कि देश की सुरक्षा सहित अति महत्वपूर्ण कार्य जो गृह विभाग के जिम्मे है, वह कैसे निपटाएंगे। श्री शिंदे की गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती है और उनकी सोच, समझ और काबिलीयत को देखते हुए ही उन्हें इस पद पर बैठाया गया होगा, लेकिन श्री शिंदे के इस बयान ने उनकी योग्यता पर ही प्रश्न चिन्ह् लगा दिया है। शायद उनकी याददाश्त भी कमजोर है और उन्हें यह भी याद नहीं कि बोफर्स घोटाला उजागर होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को कितनी फजीहत झेलनी पड़ी थी और वह दोबारा सत्त्ता में नहीं आ सकेथे। इधर मनमोहन सिंह की सरकार कई आरोपों से घिरी है, ऐसे में उनकी सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्री द्वारा इस तरह का बयान देना सरकार की छवि को और खराब करने जैसा है। श्री शिंदे की सोच और समझ अगर ऐसी ही है तो कांग्रेस को इस पर फिर से विचार करना चाहिए और किसी अधिक उपयुक्त व्यक्ति को इस पद पर बैठाना चाहिए।

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