बिजली के मामले में बिहार से आगे है झारखंड
रांची, देश में प्रगति का आधार माने जाने वाले बिहार भले ही तेरह प्रतिशत विकास की रफ्तार प्राप्त कर लिया है परन्तु बिजली के क्षेत्र में वह झारखंड से काफी पीछे चल रहा है। बिहार जहां बिजली के क्षेत्र में संकट का सामना कर रहा है वहीं झारखंड सरप्लस बिजली का उत्पादन कर रहा है। झारखंड के लिये ट्रांसमिशन लाइन की पुख्ता व्यवस्था नहीं होना उसके लिये सबसे बड़ी समस्या है।
ट्रांसमिशन प्रणाली के अभाव में झारखंड के पास उपयुक्त पावर ग्रिड एवं ट्रांसमिशन नेटवर्क के अभाव में उसे सरप्लस पावर राष्ट्रीय ग्रिड को देना पड़ रहा है जिससे उसे प्रति माह 20 करोड़ रुपये मिल रहे हैं लेकिन यदि पावर ग्रिड एवं ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत हो जाने के वह सरप्लस बिजली बेचकर सौ करोड़ रुपये प्रति माह कमा सकता है। हालांकि झारखंड विद्युत बोर्ड ने पिछले चार-माह में सरप्लस बिजली नेशनल ग्रिड को देकर 100 करोड़ रुपये कमा चुका है।
झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष एस.पी. वर्मा के अनुसार बोर्ड औसतन 150 मेगावाट बिजली सरेंडर करता है। झारखंड विद्युत बोर्ड शीघ्र ही ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने में सफल हो जाएगा। इसके बाद झारखंड की बिजली झारखंड में उपयोग होने लगेगी। विद्युत बोर्ड के चेयरमैन मानते हैं कि बिजली के मामले में झारखंड का भविष्य उज्ज्वल है। एस्सार पावर की इकाई तथा अभिजीत की इकाई के चालू हो जाने से झारखंड बिजली के मामले में धनी हो जाएगा।
आने वाले समय में कुछ और पावर प्लांट आने वाले हैं। झारखंड में पावर प्लांटों के संचालन के लिये कोयले की भी कोई कमी नहीं होगी क्योंकि सीसीएल एवं बीसीसीएल कोयले का बड़ा आपूर्तिकर्ता है। झारखंड को प्राकृतिक दृष्टि से पावर जेनरेशन का लाभ है। राज्य में एक मेगावाट से लेकर 200 मेगावाट के हायडल प्रोजेक्ट लगाए जाने की काफी संभावना है। वस्तुत: सिकिदरी पन बिजली परियोजना झारखंड में बिजली की लाइफ लाइन है। इस परियोजना से औसतन 135 मेगावाट का बिजली का उत्पादन होता है।


