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Home » Miscellaneous » 20 September 2012 »

आखिर हिन्दी कब बनेगी राष्ट्रभाषा?

नयी दिल्ली, 22 सितंबर से 24 सितंबर तक दक्षिणी अफ्रीका के जोहानसबर्ग में नौंवा विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज से 37 साल पहले हुए पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत की इस राजभाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन आज तक इस बारें में कोई खास प्रगति नहीं हुई। इतना ही नहीं हिन्दी को भारत में भी राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ वह आज भी राजभाषा है। ये उन 22 भारतीय भाषाओं में शामिल है जो भारतीय संविधान में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए स्वीकृत की गयी हैं। इसके बाद हालांकि तीन अन्य सम्मेलनों में भी ऐसे प्रस्ताव पारित हुए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल सका। हालत यह है कि लगातार हिन्दी सम्मेलन हुए लेकिन संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिल सका। 22 सितंबर से 24 सितंबर तक दक्षिणी अफ्रीका के जोहानसबर्ग में नौवां विश्व हिन्दी सम्मेलन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में गौर करने वाली बात यह होगी कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनने की कोशिश कितनी कारगर साबित होती है।

विश्व हिन्दी सम्मेलन की शुरुआत तीन दशक पहले हुई थी। पहला सम्मेलन नागपुर में जनवरी 1975 में हुआ था। इसका आयोजन वर्धा की राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने किया था। अब तक आठ विश्व हिंदी सम्मेलन विभिन्न देशों में हो चुका है। भारत में यह सम्मेलन 1975 और 1983 में, मॉरीशस में 1976 और 1993 में, त्रिनिदाद एवं टोबैगो में 1996 में, ब्रिटेन में 1999 में और अमेरिका में 2007 में हुआ था। बीच में दो सम्मेलन नयी दिल्ली में भी आयोजित हुए। इनमें से कम से कम चार सम्मेलनों में संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप स्थान दिलाया जाने संबंधी प्रस्ताव पारित हुए। यह सम्मेलन वहां सैंडटन कन्वेशन सेन्टर में आयोजित होगा जिसे तीन दिन के लिए ‘गांधी ग्राम’ का नाम दिया जायेगा।

इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत और दक्षिण अफ्रीका संयुक्त रूप से करेंगे। सम्मेलन में विश्व भर से लगभग 700 प्रतिनिधि भाग लेंगे जिनमें गैर हिन्दी भाषी हिन्दी विद्वान शामिल हैं। विदेश विभाग के संयुक्त सचिव अनूप मुदगल ने बताया कि इन प्रतिनिधियों में से तकरीबन 400 प्रतिनिधि खुद के खर्च पर इस सम्मेलन में भाग लेंगे जो उनके हिन्दी प्रेम को दर्शाता है। हिन्दी के अभी तक संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा नहीं बना पाने का कारण पूछे जाने पर मुदगल ने कहा कि इस सिलसिले में भारत के प्रयासों में कहीं कोई कमी नहीं है। हिंदी भारत जैसे बड़े देश सहित दुनिया के 30 से अधिक देशों में लगभग 80 करोड़ से ज्यादा लोगों द्वारा बोली-समझी जाने वाली भाषा है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार भाषा की अस्मिता और हिंदी का वैश्विक संदर्भ सम्मेलन की मुख्य विषय-वस्तु है। सम्मेलन में नौ शास्त्रीय विवेचन सत्र व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा तथा प्रर्दशनियां लगाई जाएंगी। इसी क्रम में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, नई दिल्ली की ओर से महात्मा गांधी की लिखी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी। बताया गया है कि सम्मेलन स्थल का नाम गांधीग्राम रखा जाएगा और विभिन्न सत्र नेलसन मंडेला सभागार सहित अन्य सभागारों में संचालित किए जाएंगे। इन सत्रों के नाम शांति, सत्य, अहिंसा,नीति और न्याय रखे गये हैं।

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