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Home » Health » 21 September 2012 »

हृदय रोग का रामबाण उपचार

हृदय रोग आज तेजी से फैलता जा रहा है। खान-पान की स्वच्छन्दता, भौतिकता-वादी होड़ में तरह-तरह के मांसाहारी एवं गरिष्ठ खाद्य पदार्थों के प्रति आकर्षण, शारीरिक श्रम की शून्यता, मानसिक तनाव आदि हृदय रोग की वृध्दि के कारण हैं। हृदय की शिराएं जब अवरुध्द हो जाती है तो हृदयाघात की संभावना बन जाती है। अधिक चिकनाईयुक्त, वसायुक्त भोजन खून में थक्के जमाता है तथा उसी का कुपरिणाम शिराएं अवरुध्द होने के रूप में सामने आता है। आधुनिक विज्ञान ने हृदय रोग के निदान के लिये बाईपास सर्जरी, पेसमेकर-जैसी अनेक अत्यन्त खर्चीली सुविधाएं ईजाद की हैं, किन्तु इनका उपयोग साधारण रोगी नहीं कर सकता। यह भी तथ्य सामने आये हैं कि आपरेशन कराने वाले को जीवनभर अनेक अन्य बीमारियों का सामना भी करना पड़ता है।

लौकी हृदय रोग में रामबाण औषधि सिध्द हुई है। अनेक हृदय-रोगियों ने इसका उपयोग कर रोग से छुटकारा पाया है। हृदय रोगियों के लिए इस अनुभूत प्रयोग की विधि इस प्रकार है :

रामबाण नुस्खा- एक-लौकी को छिलके सहित धोकर कद्दूकस में कस लें। कसी हुई लौकी को सिलबट्टे पर पीस लें। ग्राइंडर में डालकर भी उसका रस निकाला जा सकता है। लौकी को पीसते समय पोदीना के 5-6 पत्ते तथा तुलसी के 8 पत्ते उसमें डाल दें फिर पिसी हुई लौकी को कपड़छन करके उसका रस निकाल लें। उस रस की मात्रा 125-150 ग्राम होनी चाहिये। इसमें इतना ही स्वच्छ जल मिलायें। अब यह 250 से 300 ग्राम रस हो जायेगा। इस रस में चार काली मिर्च का चूर्ण तथा एक ग्राम सेंधानमक मिला लें। अब इस रस को भोजन करने के आधा या पौने घंटे के पश्चात् सुबह, दोपहर एवं रात्रि में तीन बार लें। प्रारंभ में 3-4 दिन तक रस की मात्रा कम भी ली जा सकती है। रस हर बार ताजा लेना चाहिये। प्रारंभ में यदि पेट में कुछ गड़बड़ाहट महसूस हो तो चिन्तित न हों। लौकी का रस पेट में पल रहे विकारों को भी दूर कर देता है। तीन बार औषधि लेने में कठिनाई हो तो आधा किलो लौकी इसी प्रकार सुबह शाम ली जा सकती है। लौकी पहले पांच दिन तक लेनी होगी, फिर 25 दिन का अंतराल देकर, पांच दिन तक लगातार लें। इसे कम से कम तीन महीने तक लेना होगा। उपचार के दौरान कोई भी खट्टी वस्तु न लें।

हृदय रोगियों को मांस, मदिरा, धूम्रपान आदि का पूरी तरह त्याग करना आवश्यक है। चार पांच किलोमीटर टहलना भी जरूरी है।

रामबाण नुस्खा- दो-यदि हृदय गड़बड़ करने लगे तो एक अन्य उपचार यह है-एक चम्मच पान का रस, एक चम्मच लहसुन का रस, एक चम्मच शहद-इन चारों रसों को एक साथ मिला लें और पी जायें। इसमें पानी मिलाने की आवश्यकता  नहीं है। इसे दिन में एक बार सुबह और शाम को लें। तनाव तथा चिन्ता से मुक्त होकर इसका प्रयोग करें। हृदय में कोई और कठिनाई हो तो जो दवा ले रहे हैं उसे लेते रहें। यह नुस्खा 21 दिन का है। आगे चलकर इस दवा को यदि प्रतिदिन सबेरे एक समय लेते रहेंगे तो हृदय रोग कभी नहीं होगा।

रामबाण नुस्खा- तीन- मैं यहां हृदय रोग की एक और रामबाण औषधि बताता हूं। गुजरात के प्रसिध्द नेती श्रीचिमन भाई पटेल की पत्नी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती उर्मिला बेन एक बार हृदय रोग से ग्रस्त हो गयी। उन्हें बाईपास सर्जरी कराने का सुझाव दिया गया। उन्होंने नीचे बताया गया उपाय किया तथा बाईपास सर्जरी से बच गयी।

एक तोला काली साबुत उड़द रात को गरम पानी में भिंगो दें। सबेरे पानी से उड़द के दाने निकाल लें तथा उड़द को छिलके समेत सिलबट्टे पर पीस लें। उड़द की इस पिट्ठी को एक तोला शुध्द गुग्गल के चूर्ण में मिला लें। इस योग को सिल बट्टे में डालकर एक तोला अरंडी का तेल और गोदुग्ध से बना एक तोला मक्खन डालकर उसे मिला लें। काफी देर तक इसे सिलबट्टे पर रगड़ते रहें। स्नान करके शरीर को पोंछकर इस लेप को छाती से पेट के पास तक मल लें। चार घंटे के लिये लेट जायें। उठ-बैठ भी सकते हैं। जब लेप सूख जाये तो स्नान कर लें। यह प्रयोग प्रतिदिन सुबह पांच दिन तक करना चाहिये। एक महीने के अंतराल के बाद फिर 5 दिन तक करें। हृदय रोग से पूरी तरह मुक्ति मिल जायेगी।

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