नक्सलियों का खबरदार मत खरीदो जमीन
पटना, खबरदार! जमीन खरीदी तो ऊपर से छह इंच छोटा कर देंगे। नक्सलियों की इस नयी धमकी ने बिहार-झारखंड की सीमा पर अवस्थित कोई दो दर्जन से अधिक गांवों के नागरिकों की नींद हराम है। क्षेत्र है झारखंड का पलामू और चतरा से सटा बिहार का डुमरिया और इमामगंज थाना का। दो राज्यों की सीमा पर अवस्थित दोनों थाना क्षेत्र के इलाके शुरू से ही घनघोर रूप से नक्सल प्रभावित रहे हैं। आर्म्ड फोर्स की दबिश के कारण बिहार से नक्सलियों का पलायन झारखंड की ओर हुआ तो लोगों ने कुछ राहत की सांस ली। लेकिन इधर उनके पुनः सिर उठाने से गांवों में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। अपनी जमीन को जोते किसान और जब फसल लहलहये तो काट ले जायें नक्सली। यह कैसा इंसाफ। सो अब गांव के सम्पन्न किसान अपनी जमीन को औने-पौने दाम पर बेचने को विवश है। हाल ही में नक्सली समर्थक किसान वींग ने हस्तलिखित पर्चा बांटा है जिसमें हिदायत दी गयी है कि इमामगंज क्षेत्र में कोई जमीन न खरीदें। पर्चा के मुताबिक जमीन गरीब किसानों की है इसलिए इसे बेचने का अधिकार किसी को नहीं है।
दरअसल जोतने वाले ग्रामीण पूरी तरह से नक्सलियों की गिरफ्त में हैं उनके साथ रहना उनकी मजबूरी भी है। ज्ञातव्य है कि इधर सीआरपीएफ के कोबरा जवानों को माओवादियों के कई ठिकानों को नेस्तनाबूद कर कई हार्डकोरों को दबोचने में कामयाबी मिली थी। सुरक्षा बलों की बढ़ी गतिविधियों से लोहा लेने को तत्पर माओवादियों का हरकतों को मद्देनजर गांव के किसान अपनी जमीन बेचने में ही भला समझ रहे हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने गया, हजारीबाग और डालटनगंज में अपना ठिकाना बना लिया है, लेकिन परती जमीन गांव के मजदूरों के हवाले हैं जो खेती कर रहे हैं। नक्सलियों का यही फरमान है कि जमीन नहीं बिकेगी। मसलन बड़े किसानों को ठेंगा। इससे उन किसानों के माछे पर पसीने की बूंदें छलछता आयी हैं जिन्हें बेटियों के हाथ पीले करने हैं और पैसे की सख्त जरूरत है। ज्ञातव्य है कि बीते एक सप्ताह के भीतर गया और औरंगाबाद क्षेत्र में नक्सलियों के साथ कई बड़ी मुठभेड़ हुई है जिसमें नक्सलियों को मुंह की खानी पड़ी है। मिली खबरों के अनुसार इस बार माओवादियों ने उन गांवों की सूची जारी की है जहां की जमीन बेचने पर प्रतिबंध लगाया है।
इनमें इमामगंज थाना के सलैया, नवीगढ़, बिराज और पूरनाडीह है तो डुमरिया थाना का बारा, बरवाडीह, जगतपुर, रामदोहर, माथा, नंदई और रामपुर गांव का नाम है। यह वही गांव है जिसके आसपास कोठी और प्रतापपुर के सैकड़ों सम्पन्न मुसलमानों को नक्सलियों ने अपना शिकार बनाया है। इनकी बेबाएं आज भी गया के शहरी इलाकों में किसी प्रकार जिन्दगी गुजार रही हैं। दरअसल इस सप्ताह बरहा चकरबंधा जंगल में सीआरपीएफ के जवानों के साथ हुई जबरदस्त मुठभेड़ से नक्सली तिलतिलाये हुए है।


