निजी बैंकों को सरकारी व्यवसाय पर रोक
रांची : देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये अच्छी खबर है। वित्त मंत्रालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अगले तीन वर्षों तक केंद्र एवं राज्य सरकारों के एजेंसियों के द्वारा किये जाने वाले व्यवसाय निजी बैंकों को नहीं दिये जायेंगे। यहां व्यवसाय पीएसयू बैंकों को मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया को इस आशय का पत्र लिखा है।
आर.वी.आई को लिखे गये पत्र में कहा गया है अगले तीन वर्षों तक निजी बैंकों को सरकारी एजेंसियों के कार्य नहीं दिये जायेंंगे। इसका सीधा नुकसान आईसीआईसीआई
वित्त मंत्रालय के इस निर्णय से पी.एस. यू बैंकों को केंद्र एवं राज्य सरकारों से लगभग 20 से 25 हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय मिलेगा। वित्त मंत्रालय का यह निर्णय पीएसयू बैंकों के लिये व्यवसाय की दृष्टि से अच्छी खबर है। केंद्र एवं राज्य सरकारों की एजेंसियों को इस आशय की अधिसूचना शीघ्र प्राप्त हो जाएगी। हालांकि वित्त मंत्रालय के इस निर्णय से सबसे ज्यादा लाभ स्टेट बैंक को होगा क्योंकि यह बैंक मुख्य तौर पर सरकारी एजेंसियों के व्यवसाय को हैडिल करता है। वित्त मंत्रालय के इस निर्णय से सीधे एक बड़ी राशि सामाजिक सेक्टर में जा सकेगी। एजेंसियों के व्यवसाय में कर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों की वसूली तथा पेंशनर का भुगतान भी शामिल है।
वित्त मंत्रालय का मानना है कि निजी बैंकों को आरबीआई द्वारा दिये गये लक्ष्य को पूरा नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त इतनी बड़ी राशि का व्यवसाय प्राप्त करने के लिये सरकारी बैंकों द्वारा मंत्रालय पर दबाव डाला जा रहा था।
सरकार के इस निर्णय से निजी बैंकों में व्यापक रोष है। मालूम हो कि देश के श्रेष्ठ छह बैंकों में निजी बैंकों की संख्या पांच है जबकि केवल स्टेट बैंक आफ इंडिया इसमें शामिल है। सरकार के इस फैसले से पीएसयू बैंकों का व्यवसाय बढ़ेगा।


