आईआईएम का एचआर इन्क्लेव प्रारंभ
रांची : आईआईएम (रांची) के तत्वावधान में होटल चाणक्य बीएनआर में आयोजित दो दिवसीय एचआर कन्वेक्लेव आज प्रारंभ हुआ। कन्क्लेव के उद्धाटन समारोह में छात्रों तथा विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए संस्थान के निदेशक डा.एम.जे. जेवियर ने इन्क्लेव के विषय पर प्रकाश डाला।
डा.जेवियर ने कहा कि उद्योगों के लिये आज एचआर का महत्व काफी बढ़ गयी है।
डा.जेवियर ने कहा कि किसी भी उद्योग के लिये आधार भूत संरचना विकसित करना आसान है लेकिन मानव संसाधन को मैनेज करना एक कठिन काम है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन एक कठिन क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि मानव में तुलना की भावना से कार्य क्षमता घटती है। उन्होंने कहा कि विरोधाभास की स्थिति से निपटने का कौशल होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मानव का दिमाग काफी जटिल है। हमें अपनी समझ बढ़ानी होगी। न्यूरो स्टडी का इस्तेमाल कर उपयुक्त कार्य के लिये उपयुक्त व्यक्ति को लगाने की जरूरत है।
संस्थान की एच.आर.प्रभाग श्रीमती विजया मिश्र ने कहा कि आस्थर अर्थ व्यवस्था में एच.आर. का महत्व काफी बढ़ गया है। औद्योगिक शांति बनाये रखने के लिये कर्मियों एवं नियोजकों के बीच बेहतर संबंध होने समय की मांग है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पहला ग्राहक होता है। ग्राहक वर्ग को संतुष्ट किये बिना हम उद्योग की बेहतरी नहीं कर सकते। इस अवसर पर प्रथम सत्र के पैनल विचार-विमर्श की अगुवाई करते हुए महेंद्र एंड महेंद्रा के सलाहकार ए.सिक्वेरा ने कहा कि पिछले दस वर्षों में तकनीक का काफी विकास हुआ है। अगले दो तीन वर्षों में देश में 5 विलियन मोबाइल फोन हो जायेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है एवं भूमिका है। लेकिन इसके साथ-साथ मानव संसाधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गयी है। उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रबंधन एवं नीचे के कर्मियों के वेतन में असमानता से कई समस्याएं पैदा ही रही है।
हमें ग्रासकट के लोगों को भागीदार बनाना होगा। उनके प्रति संवेदनशील होना होगा। उन्होंने कहा कि असमानता का परिणाम है कि आज नक्सली गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों में युवा बल की भावना को समझना होगा।
रेमंड के एन.आर. प्रमुख के.ए. नारायण ने अपने अनुभवों को सुनाते हुए कहा कि कर्मियों के बीच कम्युनिकेशन की कमी को दूर करना होगा। उच्च प्रबंधन को कर्मियों के दुख सुख में भाग लेना होगा। उन्होंने कहा कि एचआर का कम कर्मियों के नब्ज पकड़ने का है। उन्होंने कहा कि ग्राहक कर्मचारी एवं शेयर होल्डर तीनों महत्वपूर्ण है और सभी का ध्यान रखना जरूरी है। केवल लाभ पर ध्यान देने से उद्योगों का विकास नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि मिस हैंडलिंग एवं संवेदनशीलता की कमी के कारण समस्या उत्पन्न होती है। सुपर वाइजरों के साथ संवेदानशीलता से काम करने की बड़ी चुनौती है। हमें अपना माइंड सेट बदलना होगा।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए एच.आर. विशेषज्ञ संदीप चौधरी ने कहा कि आज उद्योगों में सकारात्मक नेतृत्व की कमी है। वेतन की असमानता से समस्या उत्पन्न हो रही है। ठेके एवं स्थायी कर्मियों की मंजूरी में असमानता भी समस्या पैदा करती है। उन्होंने माना कि मजदूरी के मामले में न्याय होना चाहिये।


