हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान ः राज्यपाल
दुमका, ः अनुसूचित जनजातीय समुदाय में प्रचलित परम्परागत स्वशासन व्यवस्था पर राजभवन द्वारा आयोजित द्वितीय राज्यस्तरीय सम्मेलन का रविवार को दुमका इंडोर स्टेडियम में सूबे के राज्यपाल डा. सैयद अहमद ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत उद्धाटन किया।इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल डॉ. सैयद अहमद ने कहा कि किसी भी सूबे का समग्र विकास तभी संभव है, जब वहां के समाज के सभी समुदाय व तबके का अपेक्षित विकास हो। प्राकृतिक सौन्दर्य से सुशोभित झारखण्ड राज्य को पांचवी अनुसूचि में शामिल किया गया है, ताकि इस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके एवं जनजातियों की सांस्कृतिक व परम्परिक धरोहर को अक्षुण्ण रखा जा सके। उन्हाेंने कहा कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। अपनी संस्कृति एवं भाषा को भूलने व छोड देने के बाद ही हमारा नैतिक पतन शुरू हो जाता है। सूबे के विकास के लिए आदिवासी विकास की योजनाओं को सरजमी पर उतारना जरूरी है। उन्हाेंने शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि जिस समाज ने तालिम हासिल की है और संघर्ष किया है, वही आगे बढ़ा है। आदिवासी समाज के लिए शिक्षा जरुरी है, पहले खुद शिक्षित हों और बच्चों को भी शिक्षित करे। आदिवासी कल्याण मंत्री चंपई सोरेन ने इस अवसर पर कहा कि परम्परागत स्वशासन व सामाजिक व्यवस्था को बचाने के लिए ही हमारे पूर्वजाें ने संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया। आदिवासियाें की आर्थिक मजबूती एवं बेरोजगारी को दूर कर ही स्वशासन व्यवस्था को बचाया जा सकता है। इससे पूर्व अपने स्वागत संबोधन में राज्यपाल के प्रधान सचिव आदित्य स्वरुप ने कहा कि राज्य में अनुसूचित जनजातियों का एक समृध्द इतिहास रहा है। यहां के मूल वांशिंदे होने के नाते इनकी पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी हुई है। पांचवी अनुसूचि के संरक्षक होने के नाते राज्यपाल ने जनजातिय लोगाें की आकांक्षाएं कैसे पूरी हो, इस पर विचार विर्मश करने व संवाद स्थापित करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है। जनजातीय स्वशासन व्यवस्था एवं उनकी संस्कृति पर संवाद को लेकर आयोजित इस सम्मेलन में परंपरागत व्यवस्था से जुड़े मांझी, परगनैत, नायकी, मानकी, मुंडा, पड़हा, राजा, पहाड़िया समाज के चुने हुए 500 प्रतिनिधियाें ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में पांचवी अनुसूचि के अन्तर्गत राज्यपाल के संवैधानिक प्रावधान व अधिकार, परंपरागत स्वशासन व्यवस्था और पंचायती व्यवस्था, जनजातिय समाज की संस्कृति, भाषा, साहित्य एवं भूमि की सुरक्षा, खनिज संपदा, लघुवन पदार्थ और अधिकार, परम्परागत चिकित्सा पध्दति होडोपैथ आदि विषयों पर चर्चा की गयी। इस अवसर पर झारखण्ड में परम्परागत स्वशासन व्यवस्था स्मारिका का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन में राज्य समन्वय समिति के सदस्य विजय कुमार सिह, अभयकांत प्रसाद, झारखण्ड जनजातीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य सह विधायक रामदास सोरेन, लोबिन हेम्ब्रम, मिस्त्री सोरेन, साइमन मराण्डी, स्टीफन मराण्डी, प्रकाश उरांव, सिकामु विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एम वशीर अहमद खान, प्रतिकुलपति डॉ.रामयतन प्रसाद, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य मंजू हेम्ब्रम, सिकामु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. विक्टर तिग्गा समेत बड़ी संख्या में गणमान्य एवं बुध्दिजीवी उपस्थित थे।


