चुनें वही डगर जिधर हैं अवसर
लेज में दाखिला लेने जा रहे हर स्टूडेंट के मन में यह प्रश्न होता है कि जिस कोर्स में वह दाखिला लेने जा रहा है, वह उसे जॉब की गारंटी देगा या नहीं? विशेषज्ञ भी मानते हैं कि स्टूडेंट्स के लिए अवसरों की कमी नहीं है। मंदी के बावजूद देश में विकास प्रक्रिया बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों का सृजन कर रही है। पर खुद को अवसरों के लायक बनाने करने के लिए जरूरी होगी सेक्टर स्पेसिफिक ट्रेनिंग।
रिटेल : मंदी ने रिटेल सेक्टर को प्रभावित अवश्य किया है, पर अभी भी इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए संभावनाओं की कमी नहीं है। कमोबेश सभी बड़े रिटेलर्स अपने विस्तार की योजना बना रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 तक इस क्षेत्र में 22 लाख लोगों की जरूरत होगी। रिटेल मैनेजमेंट में डिप्लोमा करने के बाद स्टूडेंट्स यहां कस्टमर सपोर्ट असिस्टेंट, स्टोर सुपरवाइजर, टीम लीडर, स्टोर मैनेजर, एरिया स्टोर मैनेजर के तौर पर काम कर सकते हैं। महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में अधिक अवसर हैं। बतौर स्टोर सुपरवाइजर और असिस्टेंट स्टोर मैनेजर आप 16 से 20 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। अच्छे संस्थान से रिटेल मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री करने वालों के लिए सैलरी पैकेज 3 से 4 लाख रुपये तक हो सकता है।
कोर्स : प्रवेश के इच्छुक रिटेल मैनेजमेंट, रिटेल ऑपरेशन, रिटेल सर्विस, विजुअल मर्चेंटाइजिंग, प्रोफेशनल रिटेलिंग स्किल्स, फ्रंटलाइन, सेल्स में डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
बीएफएसआई : सरकारी और निजी दोनों ही लिहाज से जिस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरी की संभावनाएं हैं, वह है बैंकिंग, फाइनैंशियल सर्विस और इंश्योरेंस यानी बीएफएसआई। आंकड़ों की मानें तो बीएफएसआई सेक्टर में आने वाले पांच सालों तक हर साल 10 लाख से अधिक नौकरियां उत्पन्न होगी। अकेले इंश्योरेंस सेक्टर में पांच लाख से अधिक जॉब उत्पन्न होंगी। बैंकिंग में प्रोबेशनरी ऑफिसर व क्लर्क, तो इंश्योरेंस सेक्टर में एजेंट्स की अधिक मांग रहेगी। सीए, सीएस, एमबीए, एकाउंटेंट आदि के लिए भी अवसर होंगे। वित्त मामलों की समझ, विश्लेषण क्षमता तथा अच्छा व्यवहार कौशल इस क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है। अधिकतर बैंक व इंश्योरेंस कंपनियां क्लैरिकल पदों पर स्नातकों को वरीयता दे रही हैं। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में काम कर रहे 65 प्रतिशत लोग परास्नातक हैं। ग्रेजुएशन के बाद स्पेशलाइजल्ड कोर्स करने पर एंट्री व मिडल लेवल नौकरियां पाने में आसानी रहती है। यहां रिक्रूटमेंट लिखित परीक्षा व इंटरव्यू परीक्षा के आधार पर होता है। इंश्योरेंस सेक्टर में एजेंट्स के अलावा जूनियर सेल्स मैनेजर, सेल्स मैनेजर, फाइनैंशियल सर्विस कंसल्टेंट व सीनियर सेल्स मैनेजरों की नियुक्ति की जाती है।
कोर्स : बैंकिंग एंड फाइनैंशियल सर्विसेज, पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस एंड रिस्क मैनेजमेंट, इंश्यारेंस मैनेजमेंट, सर्टिफिकेट कोर्स इन एकाउंटिंग एंड टेक्निशियन, फाइनेंशियल प्लानिं एंड वेल्थ मैनेजमेंट आदि में पीजी व सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
एनीमेशन एंड गेमिंग : एक समय में गैर-जरूरी माने जाने वाले इस कोर्स की लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार आने वाले कुछ सालों में इस क्षेत्र में तीन लाख जानकार लोगों की मांग होगी और यह इंडस्ट्री अगले दस सालों में 200 गुना तक बढ़ जाएगी। नैसकॉम के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 तक गेमिंग इंडस्ट्री के 424 मिलियन डॉलर होने की संभावना है। फिक्की व केपीएमजी की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय एनिमेशन बाजार के 2013 तक 3900 करोड़ रुपये तक हो जाएगा। भारत की मार्केटिंग क्षमता और क्रिएटिविटी कई बड़े ग्लोबल प्लेयरों को इस क्षेत्र में आकर्षित कर रही है। यहां कुछ माह के अनुभव के बाद आप लाखों में कमा सकते हैं। डिग्री के साथ रचनात्मक कौशल और बदलती रुचियों की समझ होनी जरूरी है।
कोर्स : 2डी व 3डी ऐनीमेशन में डिप्लोमा व पीजी डिप्लोमा करने के अलावा गेम डिजाइनिंग, गेम डेवलपमेंट, गेम आर्ट, वेब डिजाइनिंग, ग्राफिक्स डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स, स्पेशल एफएक्स, करेक्टर डिजाइनिंग में डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
हेल्थ केअर : बड़े कॉरपोरेट घरानों के हेल्थ केअर सेक्टर में निवेश और भारत में कम कीमतों पर उपलब्ध उच्चस्तरीय मेडिकल सुविधाएं इस क्षेत्र में विकास को बढ़ावा दे रही हैं। टेक्नोपार्क एडवाइजर की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2008 में 35 अरब डॉलर की भारतीय हेल्थ केअर इंडस्ट्री 2012 तक बढ़कर 75 अरब डॉलर की हो जाएगी। फिलहाल भारत में 6 लाख डॉक्टर्स और 10 लाख नर्सों की कमी है। आंकड़ों के अनुसार विश्व में हर साल 20 लाख नर्सों की मांग की जाती है, भारत में यह संख्या 80 हजार है। फार्मा सेक्टर जहां पूरी तरह मंदी प्रूफ हैं, वहीं क्लीनिकल रिसर्च के क्षेत्र में भी प्रोफेशनल्स की संख्या दस हजार से 50 हजार हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में बायोसाइंस स्नातक और लाइफ साइंस स्नातकों के लिए अच्छी संभावनाएं उत्पन्न होगी। एमबीबीएस, एमडी, एमएस स्टूडेंट्स आदि मेडिकल प्रोफेशनल्स के अलावा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स, फार्मेसी कंसल्टेंट, केमिस्ट एंड मेडिकल साइंटिस्ट, फिटनेस एक्सपर्ट, न्यूट्रीशन व डाइटेटिक्स एक्सपर्ट की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। फिटनेस व फिजिकल ट्रेनिंग में विशेषज्ञता रखने वाले स्टूडेंट्स अपना जिम या फिटेनस सेंटर भी खोल ही सकते हैं अथवा पर्सनल ट्रेनर, थेरेपिस्ट, स्पोट्र्स मेडिसिन, स्पोट्र्स कोच, एथलेटिक ट्रेनर व न्यूट्रीनिस्ट के तौर पर नौकरी कर सकते हैं।
कोर्स : क्लीनिकल रिसर्च एंड क्लीनिकल डाटा मैनेजमेंट, बीएससी नर्सिंग व ऑनकोलॉजी नर्सिंग, फिटनेस, न्यूट्रिशन व डाइटेटिक्स और फिटनेस मैनेजमेंट के डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्सेज कर सकते हैं।
मीडिया, मनोरंजन और विज्ञापन : विशेषज्ञों के अनुसार 2011 तक इस क्षेत्र की क्षमता में दोगुनी वृध्दि होगी। 17.1 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे विज्ञापन उद्योग की ही बात करें तो हर साल इस क्षेत्र में लगभग 2500 नए लोगों की मांग होती है। फिक्की एंड केपीएमजी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2008 में भारतीय मीडिया और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री 584 अरब रुपये की थी। वर्ष 2013 तक इस इंडस्ट्री के बढ़कर 1052 अरब रुपये होने की संभावना है। इस क्षेत्र के जानकारों के लिए रिटेल कम्यूनिकेशन/कन्वर्जेंस (न्यू मीडिया) के क्षेत्र में भी अच्छी संभावनाएं हैं। टीवी, अखबार, पत्र-पत्रिका, रेडियो, विज्ञापन एजेंसी, फिल्म आदि में काम कर सकते हैं।
कोर्स : मॉस कम्यूनिकेशन, वीडियो एडिटिंग, साउंड रिकॉर्डिंग, रेडियो प्रोडक्शन, टीवी ग्राफिक्स व एनीमेशन, टीवी जर्नलिज्म एंड एनीमेशन, टीवी जर्नलिज्म, मास मीडिया रिसर्च ऐंड प्लानिंग, न्यूज रीडिंग, कैमरा एंड लाइटिंग टेक्नीक, मीडिया मैनेजमेंट, एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग कम्यूनिकेशंस, फाइन आट्र्स एंड कम्यूनिकेशन डिजाइन आदि में डिग्री, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
एजूकेशन : पूरी तरह सुरक्षित और आकर्षक संभावनाओं वाला क्षेत्र। प्राइवेट शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश, नया वेतन आयोग तथा सरकार द्वारा नए शैक्षिक संस्थान खोलने संबंधी योजनाएं स्टूडेंट्स का ध्यान बड़े पैमाने पर इस ओर आकर्षित कर रही हैं। ऑन लाइन एजूकेशन, कोचिंग, ई-लर्निंग, स्पेशल एजूकेशन, करियर कंसल्टेंसी ने इस क्षेत्र को और भी व्यापक बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार स्कूल व यूनिवर्सिटी दोनों स्तरों पर शिक्षकों की भारी मांग उत्पन्न होगी।
कोर्स : शैक्षिक योग्यता के अलावा ईटीटी, एनटीटी, विशिष्ट बीटीसी, बीएड करना आपकी उम्मीदवारी को बढ़ा देगा। एजूकेशन एडमिनिस्ट्रेशन में भी अवसरों की कमी नहीं है।

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