आवश्यकता से काफी कम हैं कंपनी सेक्रेटरी
करियर के चुनाव का मामला चांस पर नहीं च्वाइस पर निर्भर होना चाहिए। करियर वही चुनना चाहिए जो आपकी रुचि, रुझान और वेलयूज से मेल खाता हो। इस तरह चुना गया करियर आपको सुख, शांति और भरपूर संतुष्टि भी देगा, यह तय है।
कंपनी सचिव समाज में एक सम्मानीय ओहदा है। कंपनी सचिव सही मायने में कंपनी की रीढ के समान होता है। संशोधित कंपनी अधिनियम की धारा 383 (अ) के अनुसार प्रत्येक उस कंपनी में कंपनी सचिव की नियुक्ति आवश्यक है जिसकी प्रार्थित पूंजी 2 करोड़ रुपये से अधिक है और वर्तमान में आलम यह है कि 2 लाख से ज्यादा कंपनियों की तुलना में इस समय देशभर में मात्र 22 हजार कंपनी सचिव मौजूद हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए आप इस क्षेत्र में व्याप्त अपार संभावनाओं का अंदाजा लगा सकते हैं। इसके अलावा प्रत्येक कंपनी जो स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबध्द होना चाहती है, ऐसी कंपनी में सीएस की नियुक्ति एक कानूनी बाध्यता है। सीएस सचिवीय, कानूनी, वित्त लेखांकन, प्रबंधकीय एवं प्रशासनात्मक क्षेत्र में दक्ष माने जाते हैं। इनके लिए निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों में समान अवसर मौजूद हैं।
कंपनी सचिव नौकरी के अलावा अपनी स्वयं की निजी प्रैक्टिस भी कर सकता है। निजी प्रैक्टिस में कंपनी अधिनियम (संशोधित) 1988 की धारा 161 के अनुसार कंपनियों के वार्षिक रिटर्न दस्तखत करना, धारा 33 (2) एवं धारा 149 के अनुसार विभिन्न प्रपत्रों की शुध्दता की घोषणा करना, कम्प्लायंस प्रमाण पत्र जारी करना शामिल हैं। सीएस पाठयक्रम में प्रवेश के दो रास्ते हैं- प्रथम 12वीं के बाद एवं द्वितीय स्ातक के पश्चात। सीएस का कोर्स भारत सरकार एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा अधिकृत संस्था आईसीएसआई द्वारा संचालित किया जाता है। पास होने के लिए विद्यार्थी को प्रत्येक परीक्षा में मात्र 50 प्रतिशत अंक लाना होते हैं। सीमित सीटों का झंझट इस कोर्स में नहीं है। 10+2 के बाद इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी स्ातक की पढ़ाई भी समांतर रूप से कर सकते हैं।

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