डीम्ड यूनिवर्सिटी : भारत में खोले गए डीम्ड
यूनिवर्सिटी की डिग्रियों की मान्यता के बारे में भी एक निश्चित जूरिसडिक्शन है। यदि कोई डीम्ड यूनिवर्सिटी निर्धारित क्षेत्र से बाहर लर्निंग सेंटर खोलती है, तो उसकी डिग्री भी अमान्य होगी।
डिस्टेंस और ऑन लाइन डिग्रियों की मान्यता : डिस्टेंस डिग्रियों की मान्यता तो है, लेकिन सभी डिग्रियां आपको नौकरी नहीं दिला सकतीं। उदाहरण के तौर पर डिस्टेंस बीएड को ही लें, यह पहले से पढ़ा रहे अध्यापकों के लिए तो ठीक है लेकिन विशिष्ट बीटीसी आदि के लिए यह डिग्री मान्य नहीं है। इसी तरह ऑन लाइन माध्यम से ली गई कोई भी डिग्री सरकार द्वारा मान्य नहीं है। इनके द्वारा केवल सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स ही किए जा सकते हैं। लेकिन भारत में अभी इनकी ज्यादा मान्यता नहीं है। इसी तरह साइबर विश्वविद्यालयों की शुरुआत भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक सरकार ने इन्हें मान्यता नहीं दिया है। इसलिए, छात्रों को इन संस्थानों के मोहपाश से खुद को दूर रखना ही बेहतर होगा।
डिग्रियों को लेकर फर्जीवाड़ा : पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने यूजीसी के एक नोटिस का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को ऐसे फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश दिए थे जो यूजीसी मान्यता नियमों के अधीन नहीं आते। कई सालों से इस सूची में दो नाम इलाहाबाद के भी हैं। जब डीएम ने उन तक पहुंचने की कोशिश की तो उन्हें न तो इन ‘विश्वविद्यालयों’ के दफ्तर मिले और न ही इनके संचालक। यूजीसी की सूची में काफी अरसे से ‘महिला ग्राम विद्यापीठ विश्वविद्यालय, प्रयाग’ और ‘गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग’ के नाम शामिल हैं लेकिन ये विश्वविद्यालय कहां हैं और कौन से पाठयक्रम चलाते हैं, इस बारे में किसी को जानकारी नहीं है। इन संस्थानों के अस्तित्व की जानकारी के बिना कार्रवाई संभव नहीं है।
हिंदी साहित्य सम्मेलन की डिग्रियों को लेकर भी विवाद रहा है। हालांकि यह फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल नहीं है लेकिन यूजीसी इसे मान्य विश्वविद्यालय भी नहीं मानता। सम्मेलन के प्रतिनिधि की मानें तो इन्हीं विवादों के चलते 1984 में चार वर्षीय आयुर्वेद रत्न और 2003 में तीन वर्षीय आयुर्वेद रत्न तथा वैद्य विषारद के पाठयक्रम बंद किए गए। सम्मेलन अब सिर्फ प्रथमा, मध्यमा और उत्तमा या साहित्य रत्न पाठयक्रम चलाता है। प्रथमा को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने तो मैट्रिक स्तरीय मान्यता दे रखी है लेकिन राज्यों में यह मान्य नहीं है। इंटरमीडिएट के समकक्ष मध्यमा को भी गढ़वाल, कुमाऊं और रायपुर विश्वविद्यालय समेत बमुश्किल आधा दर्जन विश्वविद्यालय मान्यता देते हैं। उत्तमा या साहित्यरत्न के आधार पर भी गिनती के विश्वविद्यालय एम.ए. प्रथम वर्ष हिंदी में दाखिला लेते हैं।
यहां से करें पुष्टि
= यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी)
= ऑल इंडिया कौंसिल ऑफ टेक्नीकल एजूकेशन (एआईसीटीई)
=मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई)
=इंडियन कौंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर)
= नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई)
= डेंटल कौंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई)
= फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई)
= इंडियन नर्सिंग कौंसिल (आईएनसी)
= बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई)
= सेंट्रल कौंसिल ऑफ होम्योपैथी (सीसीएच)
= सेंट्रल कौंसिल फॉर इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम)
= कौंसिल फॉर आर्किटेक्चर (सीओए)
= रीहैबिलिटेशन कौंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई)
= नेशनल कौंसिल फॉर रूरल इन्स्टीटयूट (एनसीआरआई)
= द वेटनरी कौंसिल ऑफ इंडिया (वीसीआई)
= स्टेट्स कौंसिल ऑफ हायर एजूकेशन (एससीएचई)
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Read this article, BIT Meshra is also a deemed university and it is offering degree through different centres in India and overseas so thier degree is not valid as per your article. On the other hand, BIT Meshra is popular and well accepted worlwide. Any idea ?
13 January 2010 at 12:48