झारखंड का 12 वर्षों में योजना आकार 85972 करोड़
रांची, अलग झारखंड राज्य गठन के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इन 12 वर्षों में राज्य का योजना आकार 85972 करोड़ रुपये रहा, लेकिन बड़ी राशि को खर्च नहीं किया जा सका। चालू वित्त वर्ष में भी 16300 करोड़ रुपये में से 31 अक्तूबर तक योजना आकार में सिर्फ 20 प्रतिशत की राशि की खर्च हो पायी है।
15 नवम्बर 2000 को अलग झारखंड राज्य गठन के बाद से सूबे में योजना उदव्यय की राशि इस प्रकार रही :-
वर्ष 2000-01 में 651 करोड़ रुपये, वर्ष 2001-02 में 2551 करोड़ रुपये, वर्ष 2002-02 में 2651 करोड़ रुपये, वर्ष 2003-05 में 2935 करोड़ रुपये, वर्ष 2004-05 में 4139 करोड़ रुपये, वर्ष 2005-06 में 4519 करोड़ रुपये, वर्ष 2006-07 में 4795 करोड़ रुपये, वर्ष 2007-08 में, 6676 करोड़ रुपये, वर्ष 2008-09 में 8015 करोड़ रुपये, वर्ष 2009-10 में 8200 करोड़ रुपये, वर्ष 2010-11 में 9240 करोड़ रुपये, वर्ष 2011-12 में 15300 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2012-13 में 16300 करोड़ रुपये रही।
इधर, चालू वित्त वर्ष में 16300 करोड़ रुपये के योजना उदव्यय में से 31 अक्तूबर तक मात्र 3357.19 करोड़ रुपये ही खर्च किये जा सके हैं। अर्थात् अब तक मात्र 20.60 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, जबकि पांच महीने में 80 प्रतिशत राशि खर्च करनी है। हालांकि बरसात समाप्त होने के बाद चार-पांच महीने में काम तेजी से होते हैं और खर्च होने वाली राशि के प्रतिशत में अचानक काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। बताया गया है कि जिन विभागों में सबसे कम राशि खर्च हुई है, उसमें परिवहन, नगर विकास, जससंसाधन, पंचायती राज, सूचना तकनीक, खनन, पेयजल स्वच्छता, कला-संस्कृति, भवन निर्माण, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पथ निर्माण विभाग शामिल है। स्वास्थ्य विभाग में मात्र 6.71 प्रतिशत राशि 31 अक्तूबर तक खर्च हो पायी है, जबकि पथ निर्माण में 25.79 प्रतिशत, नगर विकास विभाग में 2.68 प्रतिशत, परिवहन विभाग में 0.09 प्रतिशत और पंचायती राज विभाग में 2.64 प्रतिशत राशि खर्च हो पायी है जबकि ऊर्जा विभाग के कुल 1178 करोड़ रुपये के योजना उदव्यय में से मात्र 186 करोड़ रुपये की राशि खर्च हो पायी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 16300 करोड़ रुपये में से अब तक मात्र 13920.15 करोड़ रुपये की स्वीकृति का आदेश निकल चुका है, वहीं 6439.10 करोड़ रुपये का आवंटन आदेश भी निर्गत किया जा चुका र्है।ें


