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जल्दबाजी से बचें

*प्रोपर्टी एग्जिबिशन्स में जाने से पहले ही यह मन बना लें कि आप मेला घूमने नहीं जा रहे, बल्कि अहम् फैसला लेना है।
*जल्दबाजी में एग्जिबिशन न घूमें। हर स्टॉल पर समय दें।
*हर डिवेलपर से मौजूदा प्रोजेक्ट, पे-मेंट प्लान, डिस्काउंट, पुराने प्रोजेक्ट्स की जानकारी लें।
*डिवेलपर कंपनी के किसी प्रतिनिधि का नंबर ले लें, जिससे प्रोजेक्ट पसंद आने पर आप उससे सम्पर्क कर सकें।
*हो सके, तो प्रोपर्टी जैसी बिजनेस ओरिएंटेड एग्जिबिशन में बच्चों को न ले जाएं। चाहे-अनचाहे आपका ध्यान उन्हीं पर रहेगा और कोई जरूरी क्वेरी यूं ही रह जाएगी।
*इस समय ज्यादातर डिवेलपर्स मकान के साथ किसी आफर की भी पेशकश कर रहे हैं। इन आफर्स पर बारीक निगाह डालें।
*बातचीत के दौरान आप कंपनी की साख को भी परख सकते हैं। स्टाल पर मौजूद कंपनी के एग्जिक्यूटिव्स के बात करने का तरीका, आपसे किए जा रहे वादे, प्रोजेक्ट्स और रीयल एस्टेट की तकनीकी जानकारियों आदि की समझ से आपको बिल्डर के प्रोफेशनल होने का सहज अंदाजा हो जाएगा।
*अपनी सैलरी स्लिप और कुछ जरूरी कागजात की फोटो-स्टेट ले जाएंगे, तो वहां मौजूद होम लोन कंपनियों के स्टाल से आप अपनी लोन लिमिट का पता कर सकेंगे।
*एग्जिबिशन में ही फ्लैट बुक कराएं, तो पूरी तरह संतुष्ट होकर। यह मेले से कपड़े खरीदने जैसा साधारण नहीं है। किसी भी जल्दबाजी से बचें।
रहें सावधान
फिक्सड रेट वास्तव में उतने फिक्स नहीं होते, जितने नजर आते हैं। ज्यादातर बैंक पूरी अवधि के लिए फिक्स्ड लोन न देकर तीन से पांच साल के लिए फिक्स रेट पर लोन देते हैं। इस दौरान ब्याज दरें मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव से मुक्त रहती हैं, यानी इस अवधि के लिए ब्याज दर पूर्व निर्धारित कर दी जाती है। इसके बाद ये दरें मार्केट में इंटरेस्ट रेट के अनुसार रिवाइज की जाती है। लोन लेते समय लोन डाक्युमेंट को अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिए। लोन एग्रीमेंट करते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि बैंक फिक्स्ड रेट को रिवाइज किए जाने जैसी शर्तें तो नहीं रख रहा है?

 

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