ranchiexpress.com   Web       
Home » Property Express » 6 February 2010 »

घर का बीमा कराना न भूलें

12345
(No Ratings Yet)

घटनाओं पर किसी का बस नहीं चलता। चाहे भूकंप हो, बाढ़-आग का नुकसान आदमी को अन्दर तक हिला देता है। भावनाओं के नुकसान की भरपाई तो कोई नहीं करता, लेकिन ऐसे में होम इंश्योरेंस कुछ हद तक राहत जरूर देता है। इंश्योरेंस की सभी शाखाओं में होम इंश्योरेंस सबसे कम प्रचलन में है। बीमा क्षेत्र में निजी कम्पनियों की दस्तक के बाद इस क्षेत्र का परिदृश्य बहुत बदला है। नतीजतन, आज लाइफ इंश्योरेंस की तरह ही होम इंश्योरेंस भी कई बीमा कंपनियां करती हैं यानी आपके पास चॉइस का आप्शन मौजूद है। होम इंश्योरेंस तीन तरह से किया जाता है। एक : बिल्डिंग का, दो : घर के सामान का और तीसरा दोनों का। इसके लिए बीमा कंपनियों के अलग-अलग प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें किसी भी प्राकृतिक आपका या मानवीय दुर्घटनाओं के चलते इंश्योर्ड सामान को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है।
होम इंश्योरेंस के अंतर्गत आप आग, विस्फोट, भूकम्प, बिजली गिरना, तूफान, बाढ़, गैस लीकेज, वाटर टैंक या पाइप का लीकेज होना या फटना, चोरी या डकैती, किसी वाहन से नुकसान आदि स्थितियों में बीमे की रकम पा सकते हैं। जहां तक बात है सामान की, तो आप अपने घर की इलेक्ट्रानिक व इलेक्ट्रिक सामान, फर्नीचर एंड फिक्चर्स, कपड़े, जूलरी और महंगे स्टोन्स आदि का बीमा करा सकते हैं।
आपको ध्यान रखना होगा कि होम इंश्योरेंस घर की मार्केट वैल्यू कवर नहीं करता। घर की मार्केट वैल्यू में जमीन और उस पर हुए कंस्ट्रक्शन, दोनों की कीमत शामिल होती है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी जमीन की कीमत पर ध्यान नहीं देती। बीमा केवल बिल्डिंग का होता है। आपके घर के एरिया और कंस्ट्रक्शन रेट प्रति स्क्वायर फीट को मल्टीप्लाई करके बीमे की कुल रकम (सम एश्योर्ड) तय की जाती है। इसामान की कीमत का आकलन भी उनकी वर्तमान मार्केट वैल्यू के आधार पर होता है। नुकसान के लिए क्लेम किया जाता है, तो नये सेट की कीमत में से डेप्रीसिएशन घटाकर जो राशि बचेगी, उसका पेमेंट होगा।
इंश्योरेंस लेते समय
1. कोई भी होम इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय इस बात को अच्छी तरह जांच लें कि प्लान के तहत आपके घर की कौन-कौन सी चीज कवर हो रही हैं।
2. इंश्योरेंस लेते समय ही आपको क्लेम के तरीका भी समझ लेना चाहिए। हो सकता है कि दो कंपनियों की पॉलिसी आपको एक बराबर रकम देने का वादा करें, लेकिन क्लेम लेते समय उतनी रकम न मिले। इससे बचने के लिए यह निश्चित कर लें कि जितना पैसा बताया जा रहा है, वह सारा पैसा क्लेम के रूप में मिलेगा या कुछ कम।
3. यह देख लें कि इंश्योरेंस कम्पनी उन सभी सामान की कीमत दे, जिनका आपको नुकसान हुआ है, न कि सिर्फ उनकी, जिन्हें आप दोबारा खरीदने वाले हैं।
4. जब भी आप कोई क्लेम करते हैं, तो कंपनी पहले दो बातों को जांच करती है कि वास्तव में वे चीजें आपके पास थी भी या नहीं और क्या आपके द्वारा बतायी गयी कीमत सही है? ऐसी स्थिति में आपका पक्ष मजबूत रहे, इसके लिए आप पालिसी कराते समय ही कवर्ड सामान की वीडियो बना सकते हैं। लेकिन इस सीडी को घर में ही मत रखिएगा, क्योंकि बाकी सामान के साथ आप इसे भी खो सकते हैं।
5. अगर आप किसी संवेदनशील इलाके में रह रहे हैं, यानी किसी अर्थक्वेक या फ्लड प्रोन एरिया में, तो अपनी पालिसी में उसे कवर करना न भूलें।

Read 303 times | No Reactions | Print This News Print This News | Send to Friend Send to Friend

 

Have your say!

Add your comment below, or trackback from your own site. You can also subscribe to these comments via RSS.

Be nice. Keep it clean. Stay on topic. No spam.

Comments are moderated. Please refrain from making any comments which contain hatred / racial / abusive language. We reserve the right to not publish / moderate your comment without specifying any reasons whatsoever.