जरूरत है तो तुरन्त खरीदें घर
रीयल एस्टेट में ‘कैस्यूमर सेंटीमेंट्स’ के कोई मायने नहीं हैं। यह भावनाओं से ज्यादा जरूरत पर टिका है। अगर किसी नवविवाहित जोड़े को मकान की जरूरत आज है, तो वह पहले बाजार के ‘कैस्यूमर सेंटीमेंट्स’ का विश्लेषण नहीं करेगा। इन्वेस्टमेंट के मामले में भी यही बात लागू होगी।
जरूरत का सही आकलन
जब बात हो जरूरत के मुताबिक घर खरीदने की, तो अहम बात यह भी है कि अपनी जरूरत का सही आकलन किया जाए। हर किसी का मन बड़े आलीशान घर में रहने का करता है, लेकिन यह इच्छा इतनी बड़ी न हो जाए कि आपके पास घर का फर्नीचर खरीदने के लिए भी पैसे बाकी न रहें। मार्केट का अनुमान लगाने के बाद यह तय करें कि घर को लेकर आपके परिवार की जरूरतें क्या हैं? यह आपके फैमिली के साइज और बच्चों की उम्र पर निर्भर करता है। कुछ भी हो, अपनी जरूरतों से बाहर जाकर घर नहीं खरीदना चाहिए।
किराये की जगह ईएमआई
जैसे-जैसे किसी जगह का विकास होता है और वहां जनसंख्या का घनत्व बढ़ता है, तो घर खरीदना जरूरत बन जाती है। उस जगह में किराये बड़ी तेजी से बढ़ते हैं और एक समय के बाद किराये की रकम होम लोन की किस्त के बराबर या उससे भी ज्यादा हो जाती है। दूसरे शब्दों में, किराये के रूप में अच्छी-निवेश कभी गायब नहीं होता।
जरूरत की जीत : अफोर्डेबल हाउसिंग
पिछले कई सालों से, खासतौर पर पिछले एक दशक के दौरान डिवेलपर्स ने अफोर्डेबल हाउसिंग की अनदेखी की है। उन्होंने इस सेलमेंट को कभी फायदेमंद नहीं माना। इस दौरान हाई एंड आपार्टमेंट्स यानी लग्जरी फ्लैट्स ही ज्यादातर बनाये और बेचे जाते रहे। डिवलेपर्स ने हालिया मंदी में ही अफोर्डेबल हाउसिंग की ताकत पहचानी। मेट्रोज के उपनगरीय इलाकों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और इन्फ्रॉस्ट्रक्चर के चलते उन जगहों पर अर्फोडेबल हाउसिंग का चलन ज्यादा बढ़ रहा है। इस सेगमेंट में खरीददारों के लिए आज कई विकल्प उपलब्ध हैं।
जरूरत के अनुसार समझौता
डिवेलपर पर महंगे इंटीरियर लगाने का दबाव नहीं डालना चाहिए। पूरे घर में महंगी फ्लोरिंग की बजाय कोटा स्टोन या अन्य फ्लोरिंग बिछवा सकते हैं। इसी तरह, विट्रीफाइड टाइल्स के बजाय अन्य प्लोरिंग, वॉशेबल आयल बॉन्ड डिस्टेंपर पेंट की बजाय ड्राई डिस्टेंपर, किचन में ग्रेनाइट स्लैव की बजाय कोटा स्लैब, स्टेनलेस स्टील सिंग की बजाए विट्स चाइना सिंक आदि के प्रयोग से कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 350 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट तक कम की जा सकती है। महंगी चीजों का मोह छोड़ दें, तो 1000 स्क्वेयर फीट के 2 वीएचके फ्लैट की कीमत में साढ़े तीन से चार लाख रुपए कम किए जा सकते हैं। कंस्ट्रक्शन के समय ही जगह के अधिकतम इस्तेमाल पर भी जोर देना चाहिए। नेल्सन की रिपोर्ट के अनुसार, अफोर्डेबल हाउस में बेसमेंट से बचा जाए, तो कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 100 रुपए प्रति स्क्वेयर फीट तक कम होगी, यानी 1000 स्क्वेयर फीट के फ्लैट की कीमत में एक लाख रुपए की कमी।
इंतजार नहीं, जरूरत पहले
अक्सर देखा जाता है कि लोग प्रॉपर्टी की कीमतें कम होने की उम्मीद में लम्बे समय तक घर नहीं खरीदते, वैसे रीयल एस्टेट सेक्टर में दाम आसानी से गिरते नहीं हैं, इसलिए आपका यह इन्तजार नुकसान का कारण भी बन सकता है। हो सकता है कि जब आपको वास्तव में घर खरीदने की जरूरत हो, तब दाम आपकी पहुंच से बाहर निकल चुके हों। इस स्थिति से बचने के लिए जितनी जल्दी हो सके, घर खरीदने के अपने फैसले पर अमल कर लें। वैसे भी, इस समय प्रॉपर्टी की कीमतें कम होने के साथ-साथ होम लोन की दरें भी काफी सस्ती हैं।
वहीं है सही
जिंदगी में समझौतों की अहमियत को पहचानें। यह स्वाभाविक है कि हर व्यक्ति अपनी उम्मीदों पर सौ फिसदी खरा उतरने वाला घर ही लेना चाहेगा, लेकिन यह उम्मीद पूरी होने की संभावना कम ही है। अगर कोई मकान आपकी जरूरतों को 90 फीसदी तक पूरा करता है, तो आप इसे बेस्ट डील मान सकते हैं।

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