चीनी कम, चीनी कम
हम सबको मीठी चीजें खाना अच्छा लगता है। एक बार मीठी चीज मुंह में डालने के बाद और ज्यादा उसे खाने की इच्छा होने लगती है और हम उसे और ज्यादा खाने का मोह त्याग नहीं पाते। कुछ लोग इतने हेल्थ कांशस होते हैं कि वह मीठा खाने से पूरा परहेज रखते हैं। लेकिन कुछ लोगों की मीठा खाने की इच्छा इतनी तीव्र होती है कि वह अगर एक बार दिन में मीठा न खाएं तो उन्हें पूरे दिन उसकी कमी महसूस होती रहती है। मीठा खाने की इच्छा ऐसी इच्छा होती है जो कभी-कभी तीव्र हो जाती है तो कभी इसकी इच्छा कम हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि आप डायबिटिक नहीं हैं या मोटे नहीं हैं तो आप चॉकलेट खाने में न घबराएं। लेकिन जिस तरह से अति हर चीज की बुरी होती है मीठी चीजों के बारे में भी ऐसी ही है। इसके भी बहुत नुकसान होत हैं इसलिए मीठा खाने को अपनी दिनचर्या न बनाए। सप्ताह में एक, दो या तीन बार ही मीठा खाएं।
पेशे से लेखिका श्वेता गिलानी बताती है, ‘मैं क्योंकि स्लिम-ट्रिम हूं इसलिए मुझे अपना वजन बढ़ने का कोई खतरा महसूस नहीं होता। मैं बेहिचक होकर मीठी चीजें खाती हूं और मैं यस चीजें इसलिए खाती हूं, क्योंकि मुझे अपनी बढ़ती कमर को लेकर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। मैं अपना चॉकलेट केक जो मुझे बेहद पसन्द है अक्सर खाना पसन्द हूं।’
फोर्टीस अस्पताल के डाक्टर अनूप मिश्र के अनुसार ‘मीठा खाना हमारे स्वाद का एक हिस्सा होता है। इसमें कोई पौश्टिकता नहीं होती, लेकिन इसकी हमारे शरीर को जरूरत होती है। मीठा खाने से हमें पौष्टिकता मिलती है या नहीं इसकी बात नहीं है। लेकिन यह हमारे भोजन की भरपाई जरूर करती है। प्रोटीन और दूसरे कार्बोहाइड्रेट की तरफ जिनके शरीर से मेटाबॉलिज्म का शरीर में ऊर्जा के लिए निर्माण होता है। यह एक धीमी प्रक्रिया है, चीनी भी वही काम करती है, लेकिन उसके करने की प्रक्रिया धीनी होती है। ज्यादा चीनी लेने से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल या उच्च रक्तचाप हो सकता है। इसलिए अपनी चीनी खाने की मात्रा पर नियंत्रण रखें।’ यूनिवर्सिटी आफ मिशिगन द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार भोजन में चीनी की मात्रा को सीमित करने से हमारी ऊर्जा में वृध्दि होती है। हालांकि मस्तिष्क को सुचारू रूप से काम करने के लिए चीनी जैसे कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है। बच्चों को ठोस कार्बोहाइड्रेट्स के लिए अनाज की ब्रेड और दालें दी जाती है। सादी चीनी जो मीठे जूस, सोडा और ाूट जूस में इस्तेमाल होती है। वह रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ा देती है। जिससे इन्सुलिन का संतुलन गड़बड़ा जाता है। (इन्सुलिन एक ऐसा हारमोन है जो रक्त से शुगर कोशिकाओं द्वारा पूरे शरीर में पहुंचाता है।) ज्यादा मीठी चीजें खाने में पौष्टिकता तो नहीं मिलती, लेकिन बाकी भोज्य पदार्थों की पौष्टिकता पर भी यह विपरीत असर डालती है। ज्यादा मीठा शरीर में जाकर संग्रहित हो जाता है और मोटापे का कारण बनता है। इसलिए यदि एक बार छोड़कर बार-बार मीठा खाने का जी चाहे तो मीठा खाने से बचे। क्योंकि इसके बुरे प्रभाव कुछ समय बाद दिखायी देने लगते हैं। कॉफी का एक कप हमें तुरन्त तरोताजा कर देता है। क्योंकि उसमें कैफीन और शुगर होता है। जो लोग शारीरिक तौर पर ज्यादा चुस्त होत हैं और वे ज्यादा चीनी का सेवन करते हैं। उन्हें बाद में समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि उनके शरीर में शुगर संग्रहित हो जाती है। इसलिए मीठे और स्वादिष्ट जूस की तरफ हाथ बढ़ाने से पहले सोच लें कि क्या इके बुरे प्रभावों को कम करने के लिए आपने पर्याप्त वर्कआउट करने के लिए सोचा है या नहीं। बच्चों के लिए प्रतिदिन थोड़ा मीठा खाना जरूरी होती है। बड़ों के लिए भी मीठा उनके एनर्जी लेवल को बढ़ाता है। आपको अपने भोजन में प्रतिदिन 5-6 चम्मच चीनी ही लेनी चाहिए। जिसमें मीठे पेय पदार्थ, ठंडी, गरम चीजें और जो भी आप खाएं। 30 वर्षीय गौरव जो एक पब्लिक रिलेशन कम्पनी में काम करते हैं, के अनुसार ‘मैं मीठे से दूरी बनाकर रहता हूं। मुझे भले ही पेस्ट्री और चॉकलेट खाना पसन्द है, लेकिन मैं प्रतिदिन चाय में भी चीनी नहीं लेता। मैं मीठे के लिए केला और सेब खाना पसन्द करता हूं। जिसका कोई नुकसान नहीं होता। क्योंकि इनमें प्राकृतिक शुगर होती है।’ यदि कुछ भी मीठा खाने की इच्छा हो तो तुरन्त भागकर पेस्ट्री की दुकान पर जाने की बजाए मीठे, ताजे फल खाएं। स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतें और स्वास्थ्यकर भोजन हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन्हें खाने से वजन नहीं बढ़ता। मौसमी ताजे फल केला, सेब, चीकू, आम या सूखे मेले जैसे खजूर, सुमानी और किशमिश खाएं, क्योंकि इनसे हमें ताकत मिलती है। आहारविद् सफेद चीनी खाने की बजाए शहद या गुड़ खाने की सलाह देते हैं। याद रखें कि ब्राउन शुगर भी सेहत के लिए नुकसान देती है। यदि आपको फल खाना पसन्द न हो तो फलों का जूस या शेक पियें, याद रखें इनमें चीनी न डालें। शकरकंद की जड़ों से बनी और गन्ने के जूस से बनी चीनी भी सफेद चीनी के बराबर होती है। शुगर के आजकल बाजार में आए विकल्प सेहत के लिए फायदेमंद होत हैं। यदि आपको अपने वजन में लगातार बढ़ोत्तरी का पता चल रहा हो तो अपने भोजन में चीनी की मात्रा को चेक करें। हमारे सामने यहस प्रश्न पैदा होता है कि हमें कितनी मात्रा में चीनी खानी चाहिए या कितनी चीनी हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है? वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, ‘स्वस्थ लोग अपने प्रतिदिन ली जाने वाली कुल कैलोरीज में 10 प्रतिशत चीनी ले सकते हैं। मीठी चीजें खाने और स्वस्थ रहने का मूलमंत्र है कि अपनी खाने की एक संतुलित योजना बनाए और सप्ताह में जो या तीन बार मीठी चीज खाएं।’
श्र घर में हर समय शहद रखें और इसे अपनी चाय या कॉफी में चीनी के स्थान पर डालें। श्र जब भी कोई मीठी चीज बनाएं तो उसमें चीनी की बजाए गुड़ डालें। श्र चीनी से बनी मिठाइयां खाने की बजाए मीठे-ताजे फल खाएं। श्र प्रतिदिन 5-6 चम्मच से ज्यादा चीनी न खाएं। श्र शुगर के विकल्प भी मीठा खाने की इच्छा शांत करते हैं। यह सेहत के लिए नुकसानदेय नहीं होते।


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