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नक्सलियों ने पटरी उड़ायी

आपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ माओवादियों के चार राज्यों में 72 घंटे के बंद के पहले दिन झारखंड सहित अन्य राज्यों में रेल सेवा अस्त-व्यस्त रही। वहीं नक्सल प्रभावित इलाकों में इसका जनजीवन पर भी असर देखा गया। झारखंड ही नहीं बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल में कहीं बंद असरदार तो कहीं मिलाजुला देखा गया।
राज्य के नक्सल प्रभावित चतरा, चंदवा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, कोडरमा गिरिडीह, चाईबासा के ग्रामीण इलाकों में इसका मिलाजुला असर देखा गया। चंदवा के सिकनी कोलियरी में लोडिंग प्रभावित रही। गुमला में भी व्यापक असर देखा गया। राज्य के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आज लम्बी दूरी की बसें नहीं चलीं। वहीं बाजार भी बंद रहे। टोरी साइडिंग में बाक्साइड और कोयले की ढुलाई बाधित रही। उधर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला में भी बंद का असर देखा गया।
कल रात बारह बजे से बंद प्रारंभ होने के बाद नक्सलियों ने पहला निशाना रेलवे लाइन पर साधा। नक्सलियों ने रात करीब सवा तीन बजे झाझा-जसीडीह के बीच रजला हाल्ट के पास रेलवे लाइन को विस्फोट कर उड़ा दिया। इस विस्फोट से सात फुट रेलवे लाइन क्षतिग्रस्त हो गयी। मालूम हो कि झाझा नक्सलियों का पनागाह बन गया है। यहां लगातार नक्सली हिंसा होती रहती है। कल रात की इस घटना के कारण हावड़ा-दानापुर एक्सप्रेस गिध्दौर स्टेशन पर रुकी रही। इसके अलावा विभूति एक्सप्रेस, डाउन पंजाब मेल भी बाधित हुई। जसीडीह स्टेशन पर विभूति एक्सप्रेस रुकी रही। डाउन पंजाब मेल मोकामा स्टेशन पर रुकी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार पटना-हावड़ा मेन लाइन पर भी कई ट्रेनें बाधित हुई। इस वजह से कई ट्रेनों के मार्ग में भी परिवर्तन करना पड़ा। मौर्य एक्सप्रेस सिमुलतुल्ला में रुकी रही। पता चला है कि जहां पर रेल लाइन उड़ाई गयी है वहां के हाल्ट के केबिन मैन को नक्सलियों ने बंधक बना लिया और उसकी पिटाई कर दी। इधर रांची से विभिन्न स्थानों के लिये खुलने वाली गाड़ियां आज नहीं चली। रांची-गुमला मार्ग पर एक भी यात्री बस नहीं चली। नक्सलियों के बंद के कारण लोगों को भरी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई जिनके घरों में शादियों हैं। मालूम हो कि सात से दस फरवरी तक काफी लगन हैं। रांची से पटना के लिये सैकड़ों लोगों ने ट्रेन के टिकट कटाए थे परन्तु रेलवे नक्सलियों के निशाने पर रहने के कारण लोगों ने टिकट वापस कर दिये।नक्सलियों के बंद के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच दहशत बनी रही। नक्सलियों ने आपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ बंद का आह्वान कर यह संकेत दिया है कि वे घुटने नहीं टेकेंगे। इधर झारखंड सहति चार राज्यों में आपरेशन ग्रीन हंट की तैयारियां प्रारंभ कर दी गयी है। झारखंड के डीजीपी नेयाज अहमद ने बताया कि आपरेशन ग्रीन हंट की तैयारियां पूरी कर ली गयी है। उन्होंने कहा कि 72 घंटे के बंद से निपटने के लिये पुलिस पूरी तरह सतर्क है। सुनसान रेलवे स्टेशनों पर पुलिस की गश्त दिन-रात जारी है। दूसरी तरफ बिहार के डीजीपी आनन्द शंकर ने कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों एवं रेलवे लाइनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। झारखंड सहित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की अध्यक्षता में कोलकाता में होगी जिसमें ग्रीन हंट आपरेशन की रणनीति पर चर्चा होगी तथा इसकी शुरुआत की घोषणा की जायेगी। तीन नक्सल प्रभावित राज्यों तथा झारखंड की स्थिति में थोड़ा अंतर है। कहा जाता है कि झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन नक्सलियों के प्रति नरम है तथा वह अभी भी बातचीत से समस्या का समाधान चाहते हैं। परन्तु केंद्र सरकार के दबाव के कारण राज्य सरकार को आपरेशन ग्रीन हंट के प्रति हामी भरनी पड़ी।

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