सरकारी आदेश को सिनेमा मालिक दिखा रहे हैं ठेंगा
झारखंड सरकार के फैसले को राज्य के सिनेमाहॉल मालिकों ने उलट दिया है। सरकार ने राज्य के एकल पर्दे (सिंगल स्क्रीन) सिनेमाघरों के लिए टिकटों की अधिकतम दरें उनकी श्रेणी के अनुरूप तय कर रखी है। लेकिन अधिकतर और खासकर राजधानी रांची के सभी सिनेमाहॉल मालिकों ने सरकारी आदेश की अवहेलना करते हुए अपनी मर्जी से 80 से 100 फीसदी रेट बढ़ा दिये हैं। दर्शकों से पैसा नयी बढ़ी हुई दरों से वसूल रहे हैं, पर उन्हें सिनेमा टिकट सरकारी दरों की दे रहे हैं। इतना ही नहीं मनोरंजन कर में भी सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। ध्यान रहे कि एकीकृत बिहार में 1994 में टिकट दरों में संशोधन किया गया था, उस वक्त अधिकतम 12 रुपये और न्यूनतम चार रुपये की दरें थी। झारखंड गठन के बाद राज्य सरकार ने टिकट में भारी इजाफा कर अधिकतम 38 रुपये और न्यूनतम 7.50 रुपये तय किये।
तत्कालीन केबिनेट सचिव नरेन्द्र भगत ने झारखंड मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने सिनेमा टिकटों की नयी दरें तय की हैं। राज्य के सिनेमाघरों को तीन श्रेणियों एयरकंडीशंड, एयरकूलर एवं सामान्य में विभाजित किया गया है। एयरकंडीशंड सिनेमाहालों में अधिकतम 38 रुपये और न्यूनतम 12.50 रुपये, एयरकूल्ड में 27.50 रुपये और 10.50 रुपये तथा सामान्य सिनेमाघरों में अधिकतम 27 रुपये तथा न्यूनतम 7.50 रुपये टिकट दरें तय की गयी हैं। एसी हॉलों में टिकट दरें स्पेशल क्लास 38 रुपये, डीसी 27.50 रुपये, बालकानी 23 रुपये, रियर स्टाल 17 रुपये और फ्रंट स्टाल 12.50 रुपये हैं। एयरकूल्ड में स्पेशल क्लास 27.50 रूपये, डीसी 23 रुपये, बालकानी 19 रुपये, रियर स्टाल 15 रुपये और फ्रंट स्टाल 10.50 रुपये हैं। सामान्य हॉलों में स्पेशल 23 रुपये, डीसी 19 रुपये बालकानी 15 रुपये, रियल स्टाल 10.50 रुपये तथा फ्रंट स्टाल 7.50 रुपये निर्धारित है। मंत्रिमंडल ने मनोरंजन कर की मद में एयरकंडिशंड हाल के स्पेशल क्लास के लिये टिकट दर 20 रुपये डीसी 14.50 रुपये, बालकानी 12 रुपये, रियर स्टाल 9 रुपये तथा फ्रंट स्टाल 6.50 रुपये तय की जो, उपर्युक्त वृध्दि में समाहित है। साथ ही विभिन्न श्रेणियों के लिये सीटों की संख्या भी निर्धारित की गयी। एयरकंडिशंड हाल में कुल सीटों का कम से कम 10 फीसदी स्पेशल क्लास, 30 फीसडी रियर स्टाल तथा 10 फीसदी फ्रंट स्टाल में होना चाहिये। सरकारी फैसले के खिलाफ जाते हुए सिनेमा मालिकों ने अपना फैसला लागू कर दिया। शुरूआत सुजाता सिनेमाहाल ने की। इसने अधिकतम 38 रुपये के स्थान पर 70 रुपये, डीसी के लिये 27.50 रुपये के स्थान पर 50 रुपये, बालकानी के लिये 23 रुपये के बदले 35 रुपये, रियर स्टाल के लिये 17 रुपये के बदले 25 रुपये की दर से वसूलने लगा। विशेष बात यह है कि टिकटें सरकारी दर की दी जा रही है। एक राजआज्ञा का और उल्लंघन किया और गरीबों के लिए उपलब्ध फ्रंट स्टाल की श्रेणी को ही समाप्त कर दिया। सरकारी खजाने में मनोरंजन कर भुगतान में भी धांधली हो रही है। इसी तरह प्लाजा सिनेमाहाल भी निर्धारित 15 रुपये, 20 रुपये, 10 रुपये वसूले जा रहे हैं। अन्य सिनेमाघरों की भी यही स्थिति है।
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