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कालेज को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाया जाए

जिले के मिर्जागंज स्थित लंगटाबाबा कालेज के शिक्षकों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर कालेज को बचाने की मांग की है एवं राज्य प्रशासन से आग्रह किया है कि कालेज को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाया जाय। सोमवार को कालेज के प्राचार्य अर्जुन प्रसाद राम एवं अन्य शिक्षकों ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि वर्ष 2002 में कालेज में मात्र पांच कमरे थे और सिर्फ 60 छात्र थे, लेकिन मौजूदा प्राचार्य और अन्य शिक्षकों ने कड़ी मेहनत कर न सिर्फ शैक्षणिक माहौल बनाया बल्कि कालेज का उत्तरोत्तर विकास किया। इन छह-सात वर्षों में विनोबा भावे विश्वविद्यालय से कालेज को मान्यता मिली, आर्थिक अनुदान भी मिल रहा है। यूजीसी में कालेज का पंजियन है। पिछले कई सत्रों से कालेज में विज्ञान, कला और वाणिज्य की विधिवत पढ़ाई की जा रही है जिसके फलस्वरूप इंटर और स्नातक में 1500 सौ छात्र अध्यन कर रहे हैं। कालेज में संसाधन भी जुटाये गये हैं। वर्तमान में 31 कमरे हैं। प्रयोगशाला और पुस्तकालय भी है। आरक्षण के तहत स्वीकृत पदों पर शिक्षक व शिक्षेकत्तर कर्मचारी कायारत हैं। लेकिन क्षेत्र के कतिपय लोग एक साजिश के तहत मौजूदा प्राचार्य को हटाकर वैसे व्याख्याता को प्राचार्य बनाना चाहते हैं जो सक्रिय राजनीति में हैं तथा महज महीने में दो चार दिन ही कालेज में कुछ देर के लिए हाजिरी बनाने आते हैं।
कालेज के शिक्षकों ने कहा कि जो लोग यह प्रयास कर रहे हैं, वे कालेज के शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं। शिक्षकों ने कहा कि अनावश्यक रूप से कालेज में राजनीतिक हस्तक्षेप किया गया तो सभी शिक्षक तथा कर्मचारी न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे। इधर झामुमो के जिला अध्यक्ष सुदीप्य कुमार सोनू और लोजपा नेता राजकुमार राज ने कहा कि लंगटाबाबा कालेज में शैक्षणिक माहौल में खलल डालने वालों का विरोध किया जायेगा।

 

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