टीचर के अच्छी फीडबैक से बढ़ता है हौसला
‘आकांक्षा, काफी खूबसूरत है। इसमें तुमने तथ्यों और वास्तविक स्थिति को बड़े ही सुंदर तरीके से उभारा है। तुम्हारी कल्पनाशक्ति और विचार सही ढंग से व्यक्त हुए हैं। वैसे, तुम कुछ और बेहतरीन शब्दों का इस्तेमाल कर सकती थी।’ इस तरह का फीडबैक किसी भी स्टूडेंट के लिए उत्साहवर्धक हो सकता है। सच तो यह है कि युवाओं के लिए उत्साह भरे दो शब्द काफी मायने रखते हैं। वह भी टीचर की तरफ से। अगर स्टूडेंट्स में वाकई सुधार की जरूरत हो, तो भी इसे ऐसे अंदाज में कहा जाना चाहिए, जो उन्हें प्रेरणा दे। यह फीडबैक प्रोसेस और प्रॉडक्ट दोनों के बारे में होना चाहिए। जरूरी है कि विद्यार्थियों की कोशिश और अनूठी शैली को सराहा जाए। यह भी जरूरी है कि पढ़ाई संबधी अपेक्षाओं के बारे में उन्हें विस्तार से बताएं, ताकि वे पढ़ाई का मूल्यांकन खुद कर सकें। स्टूडेंट्स द्वारा टास्क पूरा के बाद उस पर फीडबैक जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए। यह भी ध्यान रखना होगा कि स्टूडेंट्स को समझाने के लिए आसान भाषा का इस्तेमाल किया जाए, जैसे- तुम बेहतर कर सकते हो या अच्छा लिखा है। ऐसी बात न कहें, जिससे स्टूडेंट्स उलझन में पड़ जाएं। विशेषकर ‘खराब’ ‘अधूरा’, ‘बेकार काम’ आदि शब्दों के इस्तेमाल में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ये ऐसे शब्द हैं, जो स्टूडेंट्स पर काफी बुरा प्रभाव डालते हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि स्टूडेंट्स टीचर के साथ बात करने में झिझकते हैं। कभी-कभी तो यह कम्यूनिकेशन बिल्कुल नहीं होता। इस बाधा को फीडबैक के माध्यम से दूर किया जा सकता है। सही फीडबैक के लिए जरूरी है कि टीचर स्टूडेंट्स की बात भी गंभीरता से सुने।
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