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चाहिए एकाउंटिंग में डिग्री

फॉरेंसिक एकाउंटेंट के रूप में करियर बनाने के लिए आपके पास सबसे पहले एकाउंटिंग की डिग्री होनी चाहिए। भारत में अधिकतर फॉरेंसिक एकाउंटेंट्स ‘सर्टिफाइड फॉरेंसिक एकाउंटिंग प्रफेशन्स’ हैं। इस फील्ड में प्रफेशनल टे्रनिंग देने वाला यह भारत का एकमात्र कोर्स है। इसके अतिरिक्त कानून लागू करने और आपराधिक न्याय जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त योग्यता की भी आवश्यकता होती है। किसी प्रकार का कानून प्रशिक्षण भी सहायक होता है।
बढ़ती चिंता, बढ़ते अवसर
भारत में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से अंततः बैंक प्रभावित होते हैं। इसके चलते बैंकिंग क्षेत्र में जालसाजी नियंत्रण इकाई की जरूरत महसूस की गई, जिससे बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सके। ऐसी इकाइयों में नियुक्त एंप्लॉइज विशेष रूप से धोखाधड़ी और अन्य संभावित खतरों के प्रति बैंकिंग प्रणाली की निगरानी करते हैं। हालांकि फॉरेंसिक एकाउंटेंटिंग फर्म ‘इंडिया फॉरेंसिक’ के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि ऐसी अधिकतर इकाइयों में 80 फीसदी कर्मचारियों को किसी वैज्ञानिक प्रशिक्षण या प्रणाली प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। ऐसे में वे यह काम सिर्फ इसलिए करते हैं, क्योंकि यह उनकी जॉब है। उन्होंने धोखाधड़ी का मुकाबला करने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी नहीं है। यह भी कहा जा सकता है कि 80 फीसदी मामलों में धोखाधड़ी की जांच का सही नतीजा निकलना एक संयोग ही साबित होता है। इस स्थिति को बदलने और बैंकिंग फ्रॉड्स के मामलाें से निपटने के लिए खासतौर पर ‘सर्टिफाइड बैंक फॉरेंसिक एकाउंटिंग’ कोर्स चलाया जाता है। इसके अंतर्गत चेक धोखाधड़ी, काले धन को वैध करने और पारंपरिक धोखाधड़ी जैसे मामलों के बारे में बताया जाता है। यह कोर्स भारत में बैंकिंग धोखाधड़ी पर हुए शोध का परिणाम है। नतीजतन, यह यह भारतीय बैंकों में धोखाधड़ी रोकने में काफी प्रभावी साबित हुआ है।
कम हैं लोग, ज्यादा है सैलरी
‘इंडिया फॉरेंसिक’ ने 1,047 फॉरेंसिक एकाउंटेंट्स और एंटी-फ्रॉड प्रफेशनल्स के अपने सर्वेक्षण में पाया कि इस क्षेत्र में प्रारंभिक स्तर की सैलरी चार लाख से छह लाख रुपये सालाना तक होती है। अनुभवों प्रफेशनल्स को 10 लाख रुपये प्रतिवर्ष या इससे भी ज्यादा का पैकेज मिल सकता है। भारत में इस क्षेत्र के कुल प्रफेशनल्स में से करीब 40 प्रतिशत मुंबई और दिल्ली मं कार्यरत है।

 

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