लाइफ में टॉपर बनने की रेस लंबी होती है…
बोर्ड एग्जाम तीन मार्च से शुरू हो रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि इस समय स्टूडेंट्स को स्टडी पर फोकस रखना चाहिए, स्ट्रीम व करियर पर टेंशन की अभी जरूरत नहीं है। इससे उनका ध्यान भटकता है। स्टूडेंट्स को समझना चाहिए कि बोर्ड एग्जाम आखिरी मंजिल नहीं है, टॉपर न बनने वाले स्टूडेंट्स भी अपना करियर बेहतर बना सकते हैं। काउंसलरों के मुताबिक, इस समय स्टूडेंट्स के लिए पैरेंट्स का सपोर्ट सबसे जरूरी होता है। ऐसे में पैरंट्स को अपनी उम्मीदों का भार बच्चों पर नहीं लादना चाहिए। पैरंट्स ही बच्चे का सबसे बड़ा सहारा हैं।
डीयू में साइकॉलजी डिपार्टमेंट की हेड प्रोफेसर अशुम गुप्ता का कहना है कि पैरेंट्स को समझना चाहिए कि अगर उनका बच्चा टॉपर नहीं बनता है, तो भी उसके पास ऑप्शन की कमी नहीं है। आजकल कॉम्पिटिशन एग्जाम होते हैं और जो क्लास में टॉप न आने वाले स्टूडेंट्स भी इन परीक्षाओं को क्लियर करते हैं। वह कहती हैं कि बच्चों से ज्यादा घबराहट तो पैंरंट्स में देखने को मिलती है और वे अपनी टेंशन बच्चे पर डाल देते हैं। बच्चों के लिए यह नुकसानदायक होता है।
पैरेंट्स बच्चों को सपोर्ट करें तो रिजल्ट बेहतर ही आएंगे। इसके उलटा अगर पैरंट्स हर समय बच्चे पर प्रेशर बनाते रहे तो इसके रिजल्ट नेगेटिव आएंगे। पैरंट्स को अपने बच्चों के साथ मिलकर टाइम मैंनेजमेंट पर जोर देना चाहिए, ताकि समय का बेहतर तरीके से प्रयोग किया जा सके। केवल पढ़ाई ही नहीं, बच्चे के मनोरंजन का भी ध्यान रखना जरूरी है।
प्रो. गुप्ता कहती हैं कि 12वीं के स्टूडेंट्स पर पैरंट्स व स्कूल दोनों ओर से दबाव पड़ता है। स्कूलवाले अपने रिजल्ट के लिए चिंतित होत हैं, तो पैरंट्स बच्चे के फ्यूचर को लेकर। ऐसे में बच्चा कन्फ्यूज्ड हो जाता है और स्टडी पर पूरा ध्यान नहीं लगा पाता। पैरंट्स को समझना चाहिए कि बच्चे अभी अपने एग्जाम की तैयारी करें और आगे की टेंशन न लें। एग्जाम की टेंशन में बच्चा खुद को काफी अकेला पाता है और इस अकेलेपन को दूर करने की पूरी जिम्मेदारी पैरंट्स की होती है। महावीर सीनियर मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल एस.एल. जैन का कहना है कि जीवन को केवल नंबरों से तौलकर देखना ठीक नहीं। नेगेटिव थिंकिंग की जीवन में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि स्कूलों को भी बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और अगर कोई बच्चा नर्वस हो तो उसकी तुरंत काउंसलिंग होनी चाहिए।
पैरंट्स व बच्चों को समझना चाहिए कि बोर्ड एग्जाम तो बहुत साधारण सी चीज है। एक्सपट्र्स का कहना है कि बच्चा गुमसुम है या उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ रहा है या खाना नहीं खा रहा है तो उन बच्चों को पैरंट्स के इमोशलन सपोर्ट की बहुत जरूरत है। जरूरत पड़ने पर बच्चे को काउंसलर के पास भी लेकर जाएं। पैरंट्स को उसे कुछ देर खेलने या टीवी देखने की इजाजत भी देनी चाहिए। यही नहीं, उन्हें बच्चों के साथ बैठकर टीवी देखना चाहिए और उनकी पढ़ाई में मदद करनी चाहिए।
सैंपल पेपर्स से करें प्रैक्टिस
सीबीएसई ने सैंपल पेपर्स जारी कर दिए हैं और बोर्ड परीक्षार्थियों को बोर्ड के सैंपल पेपर्स की जरूर प्रैक्टिस करनी चाहिए। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक एम.सी. शर्मा का कहना है कि सैंपल पेपर में दिए किसी एक पेपर को रोजाना करें और उसी तरह के करें जैसे बोर्ड एग्जाम में करेंगे। इससे बच्चों को टाइम मैनेजमेंट करना आसान होगा सीबीएसई के सैंपल पेपरों के पैटर्न पर ही बोर्ड एग्जाम होगा और स्टूडेंट्स को जितना हो सके, इनको तैयार करनी चाहिए। सैंपल पेपर से मार्किंग स्कीम भी पता चल सकेगी।


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