एग्जामिनेशन सिस्टम में नहीं होगा, नम्बर का महत्व
सीबीएसई ने एंग्जामिनेशन सिस्टम को भी नया रूप देना शुरू किया है। 9वीं और 10वीं क्लास में ग्रेडिंग लागू कर दी है। यानी इस साल 10वीं का बोर्ड इम्तिहान देने वाले स्टुडेंट्स को ग्रेड दिये जायेंगे। 9 प्वाईंट पर आधारित ग्रेडिंग फार्म्युला लागू किया गया है। 10वीं के बोर्ड एग्जाम को भी आप्शनल किया गया है। 2010 में तो सभी स्टूडेंट्स बोर्ड एग्जाम दे रहे हैं लेकिन 2011 में 10वीं क्लास में बोर्ड एग्जाम नहीं होगा। हालांकि यहां कुछ शर्ते तय की गयी है। सभी स्टूडेंट्स को बोर्ड एग्जाम से छूट नहीं मिलेगा। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ने वाले वे स्टूडेंट्स जो सीबीएसई सिस्टम से बाहर नहीं आना चाहते, उनके लिये 10वीं का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा लेकिन इस स्कूलों के वे स्टूडेंट्स जो सीबीएसई सिस्टम से बाहर आना चाहते हैं और दूसरे बोर्ड में एडमिशन लेने के अलावा प्री-यूनिवर्सिटी, वोकेशनल कोर्स जाइन करना चाहते हैं, उन स्टूडेंट्स को बोर्ड एक्सटर्नल एग्जामिनेशन देना होगा।
लाइफ स्किल एजुकेशन
सीबीएसई के सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को बोर्ड एग्जाम देना होगा। स्टूडेंट्स की सहूलियत के लिए सीबीएसई आन डिमांड एग्जामिनेशन भी शुरू करने पर विचार कर रहा है। सेकेंडरी क्लासेज के लिये सीसीई स्कीम में लाइफ स्किल एजुकेशन को बहुत महत्व दिया है। थिंकिंग, सोशल व इमोशनल स्किल लाइफ स्किल एजुकेशन के मुख्य भाग होंगे और इनके आधार पर स्टूडेंट्स का असेसमेंट होगा। लाइफ स्किल असेसमेंट के लिये पांच प्वाईंट ग्रेडिंग सिस्टम तैयार किया गया है। ए प्लस, बी प्लस, बी और सी ग्रेड स्टूडेंट को मिलेंगे। सीसीई कार्ड में स्टूडेंट्स को कई लेवल पर ग्रेड दियेजायेंगे। पूरे साल क्लास स्टूडेंट्स की परफार्मेंस और टर्म एंड एग्जाम के आधार पर 9 प्वाइंट ग्रेडिंग सिस्टम होगा वहीं लाइफ स्किल असेसमेंट के लिये 5 प्वाइंट ग्रेडिंग होगी। इसके अलावा एटिट्यूड एंड फिजिकल एजुकेशन के बेस पर भी स्टूडेंट्स का असेसमेंट होगा और इसके लिये स्टूडेंट्स को ए प्लस, ए और बी ग्रेड दिये जायेंगे।
सीसीई कार्ड का फॉर्मेट
बोर्ड ने सीसीइ कार्ड फार्मेट जारी कर दिया है। कार्ड में स्टूडेंट की हाजरी भी दिखाई जायेगी। टोटल वर्किंग डेज और हाजिरी साथ-साथ होगी। सेकेंडरी क्लास के स्टुडेंट्स को पूरे साल की परफार्मेंस के आधार पर जो सीसीई कार्ड दिया जायेगा, उस पर स्टूडेंट और प्रिंसिपल के साइन तो होंगे ही साथ ही बोर्ड की भी मुहर होगी। इस कार्ड में भी स्टूडेंट्स की जन्मतिथि की जानकारी होगी। बोर्ड ने कंपार्टमेंट और फेल घोषित करने की परंपरा भी खत्म कर दी है लेकिन स्टूडेंट को 10वीं या 11वीं क्लास में एडमिशन के लिये कम से कम डी ग्रेड तो लाना ही होगा। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि इस सीसीई कार्ड की भी उतनी ही वैल्यू होगी, जितनी बोर्ड के सर्टिफिकेट की होती है क्योंकि यह कार्ड भी बोर्ड से सर्टिफाईड होगा। 9वीं क्लास में इस साल मल्टिपल चाइस क्वेश्चन आयेंगे। हर सब्जेक्ट में करीब 15 पर्सेंट ये क्वेश्चन होंगे। अगले साल 10वीं में भी मल्टिपल च्वाइस क्वेशन शुरू किये जा सकते हैं।
कम से कम डी ग्रेड हो
ग्रेडिंग स्कीम में डी या इससे ऊपर के ग्रेड लाने वाले स्टूडेंट्स ही हायर क्लासेज में प्रमोट किये जायेंगे, ऐसे स्टूडेंट्स को क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट दिया जायेगा। सब्जेक्ट वाइज ग्रेडिंग होगी और जो स्टूडेंट्स ई1 या ई2 ग्रड़ लायेंगे, उन्हें अपनी परफार्मेंस सुधारने के लिये पांच मौके मिलेंगे। जिस सब्जेक्ट में ई1 या ई2 ग्रेड आयेगी, उस सब्जेक्ट में स्टूडेंट को क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट हासिल करन होगा और पांच मौकों के बाद उसे फिर कोई मौका नहीं मिलेगा। मसलन मार्च 2010 में होने वाले बोर्ड एग्जाम में अगर किसी स्टूडेंट्स का किसी सब्जेक्ट में ई1 या ई2 ग्रेड आता है तो उसे जुलाई 2010, मार्च 2011, जुलाई 2011, मार्च 2012 और जुलाई 2012 के बोर्ड एग्जाम में फिर से मौका मिलेगा ताकि वह ई ग्रेड वाले उस सब्जेक्ट को क्लियर कर सके। स्टुडेंट्स को स्टेटमेंट आफ सब्जेक्ट वाइज परफार्मेंस मिलेगी और उसमें सब्जेक्ट वाइज ग्रेडिंग होगी। सब्जेक्ट के मार्क्स नहीं दिखाए जायेंगे।
अब किताबी कीड़ों का नहीं रहेगा महत्व
केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूल एजुकेशन की फील्ड में जो नये बदलाव ला रहा है, उनसे क्लासरूम टीचिंग की तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर यह होगा कि स्टूडेंट्स अब केवल किताबी कीड़ा बनकर नहीं रहेंगे बल्कि उन्हें कल्चरल, स्पोट्र्स और अपनी मनपसंद एक्टिविटी में भी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा और इसके आधार पर भी उसका असेसमेंट होगा।
ओवरआल डिवेलपमेंट जरूरी
बोर्ड का मानना है कि एजुकेशन को सिर्फ साल में एक बार होने वाले एग्जाम से तौलकर नहीं देखा जा सकता बल्कि एजुकेशन का मकसद स्टूडेंट का ओवरआल डिवेलपमेंट होना चाहिए। सेकेंडरी क्लासेज के लिए जहां पिछले साल ही बोर्ड ने कंटीनुअस एंड कॉम्प्रिहेंसिव इवैल्यूएशन (सीसीई) स्कीम लागू कर दी थी वहीं अब इस स्कीम को मिडल क्लास यानी 6-8 तक भी लागू किया जाएगा। सीबीएसई के चेयरमैन विनीत जोशी का कहना है कि स्कूल एजुकेशन में किए जा रहे बदलावों का स्टूडेंट्स पर काफी पॉजिटिव असर देखने को मिलेगा और वे हर दिन कुछ नया करने के लिए प्रेरित होंगे।
इंटरनल असेसमेंट और एग्जाम
एक सेशन में दो टर्म होंगे। हर टर्म में एक समैटिव असेसमेंट (एसए) और दो फोरमेटिव असेसमेंट (एफए) होंगे। एसए में टर्म एग्जामिनेशन होंगे। एफए यानी इंटरनल असेसमेंट में क्लासवर्क, होमवर्क, ओरल क्वेश्चन, क्विज, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट के बेस पर स्टूडेंट को मार्क्स व ग्रेड देंगे। इंटरनल असेसमेंट की वैल्यू 20 से बढ़ाकर 40 पर्सेंट कर दी गयी है, जबकि 60 पर्सेंट पेपर के होंगे। पहली टर्म में एमए और एसए की वैल्यू 20-20 रहेगी, जबकि सेकेंड टर्म में एसए की वेटेज 40 और एफए की 20 होगी। इस साल केवल 9वीं क्लास में ही एफए और एसए सिस्टम लागू होगा, जबकि अगले सेशन से 10वीं में भी यह प्रयोग लागू हो जाएगा। इस स्कीम में स्कूल टीचर्स ही आंसर शीट चेक करेंगे, लेकिन मार्किंग स्कीम बोर्ड तय करेगा। सीसीई स्कीम तैयार करने वाली टीम में शामिल स्पिंगडेल्स स्कूल, पूसा रोड की प्रिंसिपल अमिता एम. वॉटल का कहना है कि अब स्टूडेंट्स को केवल एक एग्जामिनेशन के आधार पर असेस नहीं किया जा सकेगा बल्कि पूरे साल क्लास में उसकी परफार्मेंस को देखा जाएगा।
मिड्ल क्लास में ग्रेडिंग
जोशी ने बताया कि आठवीं क्लास तक के स्टूडेंट्स के लिए भी सीसीई स्कीम का मॉडल तैयार किया गया है। और इसे जल्द ही सभी स्कूलों को भेज दिया जाएगा। इस मॉडल से मिडल क्लासेज की पढ़ाई भी बदलेगी और इन क्लासेज में भी ग्रेडिंग सिस्टम लागू होगा। अभी कुछ स्कूलों में 8वीं क्लास तक ग्रेडिंग की जाती है और कुछ में नहीं। नई स्कीम में अब एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी में आने वाले स्पोट्र्स, डांस, स्काउटिंग एंड गाइडिंग, योग, गार्डनिंग जैसी फील्ड में भी स्टूडेंट्स अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे और उनको इसमें भी ग्रेड मिलेंगे। दोनों तरह के ग्रेड स्टूडेंट की प्रोग्रेस रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे। स्कूल स्टूडेंट्स का असेसमेंट करेंगे और उनको ग्रेड देंगे।
पिछले साल से शुरु हुआ सिलसिला
सीबीएसई ने सेशन 2009-10 में 9वीं और 10वीं क्लास के लिए ग्रेडिंग सिस्टम पिछले साल ही लागू कर दिया था। जिसके बाद 9वीं क्लास के स्टूडेंट्स के असेसमेंट के तरीके में पूरी तरह से बदलाव आ गया है। 9वीं क्लास के लिए जो सीसीई स्कीम लागू की गयी थी, उसके मुताबिक सेशन को दो टर्म में बांटा गया है। अप्रैल-सितम्बर व अक्तूबर-मार्च। इस स्कीम में पूरे साल क्लास में स्टूडेंट की परफार्मेंस और टर्म एंड एग्जाम के आधार पर प्वाइंट ग्रेडिंग सिस्टम तैयार किया गया है।
बोर्ड एजेंसी भी बनाएगा
सीसीई स्कीम सभी स्कूलों में बेहतर तरीके से लागू हो सके इसके लिए सीबीएसई एक एजेंसी के गठन की बात भी कर रहा है। यह एजेंसी देखेगी कि स्कूलों में सीसीई स्कीम बोर्ड के निर्देशों के अनुसार ही लागू हो रही है। एजेंसी में बोर्ड के अधिकारियों के अलावा बाहर के एक्सपर्ट भी शामिल होंगे। इसके अलावा बोर्ड ने स्कूलों एजुकेशन की क्वालिटी पर भी पैनी नजर रखने की योजना भी बनायी है। इसके लिए बोर्ड ने 14 पैरामीटर बनाए हैं। स्कूलों में एजुकेशन के स्टैंडर्ड के जांच की जिम्मेदारी भी स्वतंत्र एजेंसियों को सौंपी जाएगी। ये एजेंसियां भी स्कूलों में जाएंगी।
यह है 9वीं और 10वीं का ग्रेडिंग सिस्टम
मार्क्स रेंज ग्रेड ग्रेड प्वाइंट
91-100 ए1 10.0
81-90 ए2 9.0
71-80 बी1 8.0
61-70 बी2 7.0
51-60 सी1 6.0
41-50 सी2 5.0
33-40 डी 4.0
21-32 ई1 -
20 या इससे कम ई2 -
सिस्टम में आ रहा है यह बिग चेंज
* सीबीएसई ने तैयार की क्लासरूम टीचिंग की नई तस्वीर
* स्टूडेंट्स के असेसमेंट के लिए साल में एक बार एग्जाम काफी नहीं
* कल्चरल, स्पोट्र्स और मनपसंद एक्टिविटी के आधार पर भी असेसमेंट
* इससे स्टूडेंट्स का होगा ओवरआल डिवेलपमेंट, बोझ कम होगाा


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