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बेडरूम का यूं करें मेकओवर

छ साल पहले तक बेडरूप को घर का एक नितांत निजी स्थज्ञान समझा जाता था जिसका उपयोग रात्रि में सोने के लिए होता था। समय के बदलाव के साथ बेडरूम एक निजी स्थान ही नहीं बल्कि बाहर से आनेवाले को देखने और बैठने के स्थान के रूप में जाना जाने लगा है। जहां पर परिवार और घर के दूसरे सदस्यों के अलावा निजी दोस्त या सहेलियां आकर बैठती हैं। आप आराम करते हैं। इन तमाम वजहों से आकल जो लोग अपने बेडरूम का मेकओवर करवाते हैं उसे वे इसी नजरिए से सजाते संवारते हैं।
मिसेज कपूर ने हाल ही में अपने तीनों बेडरूम को नये सिरे से मेकओवर करवाया। ड्राइंग रूप से सटा बेडरूम चूंकि बाहर से आने वालों के लिए खास आकर्षक का केन्द्र था उसमें उन्होंने बैठने की अलग से बढ़िया व्यवस्था की। मिसेज कपूर की तरह आजकल बेडरूम को नये सिरे से मेकओवर करने के लिए उसमें महंगी एक्सेसरीज का इस्तेमाल होता है। घर के बाकी हिस्सों से अलग बेडरूम क्यों होता है? आजकल बेडरूम एक निजी स्थान नहीं रह गया, यह एक ऐसे कमने के रूप में सजाया संवारा जाने लगा है जिसमें बाहर से आनेवाले को वक्त गुजारने में अटपटा न लगे। इसलिए बेडरूम ऐसा हो जिसमें रात के समय न केवल अच्छी नींद ली जा सके बल्कि अपने क्लोज सर्कल के लोगों को भी बिठाया जा सके। सादगी और सुरूचिपूर्ण ढंग से सजे बेडरूम आकर्षित करते हैं बड़ी बता तो यह है कि बेडरूम ऐसा होना चाहिए जिसको आसानी से मेनटेन किया जा सके। इसे साफ सुथरा रखा जा सके। घर में आराम फरमाने के लिए यहां का वातावरण उचित हो।
बेडरूम की साज सज्जा के लिए डबल बेड प बिछाये जाने वाली सीट्स का मेकओवर सबसे पहले किया जाना चाहिए। कमरे की डेकोर में बदलाव के लिए यह जरूरी है। इससे कमरा अलग दिखाता है। कमरे में रखे जानेवाले फर्नीचर को रोज-रोज बदला नहीं जा सकता। हां, इसके कलर को पूरी तरह से बदलकर भी इसका मेकओवर किया जा सकता है। इन तमाम वजहों से बेडरूम की बेडशीट का सुंदर एवं आकर्षक होना जरूरी है। कमरे का फर्नीचर विशेष तौर पर बेड बेहर सादा और ज्यादा ऊंचा नहीं होना चाहिए। बेड के नक्काशीदार डिजाइन से बचें, क्योंकि इनमें धूल मिट्टी फंसी रहती है। बेडरूम में बेड के साथ साइड टेबल होना जरूरी है। बेडरूम की फर्निशिंग हल्के रंग की हो। एक रंग के साथ दूसरे रंग का कंट्रास्ट उपयुक्त होता है। कमरे में सफेद रंग की चादर के ऊपर रंगीन कुशन बेड की सुंरदरता को चार चांद लगा देते हैं। यदि बजट ज्यादा है तो फैब्रिक के लिए वेलवेट और लेदर का चुनाव किया जा सकता है। इस तरह के फैब्रिक्स से बेडरूम को बिना सजाये भी एलिगेंट बनाया जा सकता है। बेडरूम के लिए लकड़ी का फर्नीचर सबसे उपयुक्त माना जाता है। जिसके साथ कई तरह के प्रयोग किये जा सकते हैं। यदि नया बेड न खरीदना चाह रहे हों तो बेडरूम को सिम्पल लुक देने के लिए बिल्टेड, प्रिंटेड कॉटन की बेडशीट अच्छी लगती है। कमरे का फर्नीचर यदि सादा हो तो आसपास की एक्सेसरीज को घटाया या बढ़ाया जा सकता है और इसमें अपनी रचनात्मकता के लिए भी पर्याप्त अवसर रहते हैं। बेड के साइड पर रखी दोनों टेबल्स में फूल रखे जा सकते हैं। बेडरूम में अगर बड़ी खिड़की हो तो कमरे में प्राकृतिक धूप और रोशनी आती है और इससे कमरा बड़ा लगता है।
अपने बेडरूम को रॉयल लुक देने के लिए कमरे के पर्दों, बेड कवर में मिरर वर्क का प्रयोग किया जा सकता है। इससे बेडरूम में ग्लैमर झलकता है। इसके अलावा परंपरागत पुराने डिजाइन के बड़े पलंग जिनके आगे और पीछे लकड़ी का नक्काशीदार काम हो, उन्हें भी बढ़िया बेडशीट्स के द्वारा नये सिरे से सजाया जा सकता है। भारी डिजाइन नक्काशीदार लकड़ी का बेड जिसमें आगे-पीछे लकड़ी का बढ़िया काम हो इस तर के बेड का भी चुनाव किया जा सकता है। बेडरूम में छोटी या बड़ी एक साथ कई पेंटिंग् लगाने से कमरा अलग दिखता है। पीले और चॉकलेट ऐसे रंग हैं जिन्हें ऑल टाइम कलर कहा जाता है जो लोगों द्वारा हमेशा पसंद किये जा सकते हैं। ड्रेस डिजाइनर कमरे में लाल रंग की भारी चादर, कढ़ाई वाली चादर को भी सही मानते हैं। इससे कमरे में नयापन झलकता है। बेड को ज्यादा एलिगेंस बनाने के लिए बेडशीट्स भारी कढ़ाई वाली या क्विल्टेड होनी चाहिए। बेड के लिए कुशल के इस्तेमाल से कमरा डे्रस लुक देता है। बड़े आकार की कुशंस बेडशीट्स से मेल खाती होनी चाहिए। छोटे कुशंस आगे रखने चाहिए और इनमें रंगों में सही तालमेल होनी चाहिए। भारी कढ़ाई वाले मिरर वर्क वाले कुशन को पीछे लगाकर बैठने में कठिनाई होती है इसलिए इन्हें न चुनें। इस तरह के कुशन सिर्फ सजावट के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं सोने के दौरान इन्हें हटा दें।
बेड के डिजाइन और बेडशीट के अलावा मैट्रेस के बिना बेड अधूरा होता है। हममें से ज्यादातर लोग रूई के भारी भरकम गद्दों पर सोकर ही बड़े हुए हैं। आजकल मोटे क्वायर फोम ओर स्प्रिंग बेड का चलन है। आजकल भारतीय बाजार में वॉटर बेड भी मिलने लगे हैं। यह विनायल के बने होते हैं। वॉटर बेड में नीचे पानी भरा होता है। यह आर्थेपेडिक की समस्या से जूझने वाले लोगों के लिए आरामदायक होते हैं। इसमें पानी को सहूलियत के हिसाब से घटाया या बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा यह हमारे पॉश्चर को सही रखने में सहायक होते हैं। इसके भी फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इससे यदि स्वास्थ्य संबंधी फायदे है तो जो लोग इसके पानी के स्तर को एडजस्ट नहीं कर पाते उनके लिए यह एक समस्या बन जाते हैं। इसके अलावा वॉटर बेड को डेकोर की स्कीम में फिट करना मुश्किल भी होता है।

 

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