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रीयल एस्टेट सेक्टर का नया सक्सेस मंत्र

बल रीयल एस्टेट कम्पनी डीटीजेड इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार देश में फिलवक्त 200 से ज्यादा टाउनशिप, प्लानिंग और डेवलपमेंट के विभिन्न चरणों में है। अनुमान के मुताबिक वर्ष 2001 के मुकाबले वर्ष 2030 तक भारत की शहरी आबादी में तीन करोड़ की बढ़ोत्तरी होगी। 35 शहर ऐसे हैं जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। इतनी बड़ी आबादी के रहने के लिए कम से कम 70 शहरों की जरूरत होगी। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में ढाई लाख हाउसिंग इकाइयों की जरूरत है। यह तो रीयल एस्टेट मार्केट की एक तस्वीर है।
जब अपना घर का सपना साकार होता है तो खुशी कुलांचे भरने लगती है। मेहनत की कमाई और होम लोन की किस्तें जो लगती है। इन खुशी के पलों में तब उदासी छाने लगती है जब घर से आफिस जाने में दो-तीन घंटे लगने लगते हैं, घर में किसी की तबीयत खराब हो और हॉस्पिटल पहुंचने में देर हो जाए, बच्चों की स्कूल 10 बजे हो और घर से 7 बजे निकलना पड़े। यह तो बुनियादी बातें है। ऐसे में संसाधनविहीन इलाके में खूबसूरत घर बनाने का क्या फायदा। बस इसी सोच और जरूरत को रीयल एस्टेट सेक्टर ने समझा और टाउनशिप परियोजनाएं बनानी शुरू की है। ऐसी परियोजनाएं सफलता का परचम भी लहरा रही है। पहले लक्जीरियस अपार्टमेंट, फिर अफोर्डेबल हाउसिंग के बाद रीयल एस्टेट मार्केट का सक्सेस मंत्र है, सुविधा सम्पन्न टाउनशिप का। प्राइम लोकेशन्स पर पूरी प्लानिंग के साथ टाउनशिप बनायी जा रही है। रीयल एस्टेट सेक्टर के इस ट्रेंड को न सिर्फ मेट्रो बल्कि मध्यम शहरों में भी कामयाबी मिल रही है। क्वालिटी लीविंग और लाइफस्टाइल में टाउनशिप नया कंसेप्ट है। ऐसे माहौल में रहने का फायदा यह हो रहा है कि कुछ दूरी पर ही आफिस हो, हॉस्पिटल और स्कूल हो, मनोरंजन से लेकर शापिंग मॉल हो, जिम्नेजियम और हेल्थ क्लब हो, हरे-भरे मैदान हो, यानी दिल और दिमाग दोनों को सुकून देने वाला वातावरण हो।
शहरी क्षेत्र में मकानों की कमी होने से स्लम एरिया बढ़ता जा रहा है। बढ़ती आबादी से शहरों की ढांचागत स्थित बदहाल हो रही है। यातायात, परिवहन, बिजली, पानी की समस्याएं बढ़ रही है। ऐसे में इंटीग्रेटेड टाउनशिप नई रोशनी बनकर सामने आ रही है। हालांकि ऐसी टाउनशिप की सफलता भी कई बातों पर निर्भर करती है। आसपास इकोनामिक गतिविधियां बेहद जरूरी है। आईटी पार्क, आईटीईएम और सेज के आसपास की टाउनशिप ज्यादा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कनेक्टिविटी भी काफी महत्वपूर्ण प्वाइंट है। सबसे महत्वपूर्ण बात टाउनशिप की कीमतों की है। किफायती फ्लैट्स को प्रोफेशनल्स, मिडल इनकम ग्रुप ज्यादा महत्व देते हैं क्योंकि यही एक्चुअल टार्गेट बायर्स होते हैं। ज्यादा महंगे और लक्जरी अपार्टमेंट के लिए ग्राहकों का इंतजार करना पड़ेगा। क्वालिटी भी महत्वपूर्ण है। साथ ही यह टाइमटेकिंग एवं हैवी मनी इन्वेस्टमेंट परियोजनाएं हैं। जिम निर्माण कम्पनी के पास निर्माण मशीनरीज, निवेशकों का सहयोग होगा, वही टाउनशिप प्रोजेक्ट्स को लांच कर कम्पलीट कर सकती है। रही बात रांची की, तो यहां कहने को तो 1500 से अधिक बिल्डर्स हैं, इनमें दर्जनों बड़े नाम हैं लेकिन टाउनशिप डेवलप करने की क्षमता किसी एक में भी नजर नहीं आती। सुखद खबर यह है कि देश की कई नामचीन निर्माण कम्पनियां झारखंड की तरफ रुख कर रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाली कम्पनियां यहां भी टाउनशिप प्रोजेक्ट्स लांच करे और पूरा करे।

 

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