वसंत में ग्रीष्म का एहसास खतरनाक संकेत
सदाबहार वसंत का मिजाज डरावना हो गया है। वसंत में ग्रीष्म ऋतु का ऐहसास खतरनाक संकेत दे रहा है। क्योंकि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष इसी अवधि में चार डिग्री सेलिसयस तापमान बढ़ गया है। साथ में तापमान बढ़ने की जो गति है वह आने वाले दिनों के लिये अच्छा संकेत नहीं दे रही। आज रांची का अधिकतम तापमान 32.0 तथा न्यूनतम 17.8 डिग्री सेलिसयस रिकार्ड किया गया। यह तापमान मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह में होना चाहिये था। अचानक बढ़े तापमान से लोग भयभीत हैं, वे कहते हैं कि अभी से इतनी गर्मी बढ़ गयी है तो आगे क्या होगा? जैसा कि मालूम है कि वैश्विक तापमान में लगातार वृध्दि हो रही है और इसके लक्षण 2009 में ही देखने को मिले हैं। अभी जो अचानक गर्मी बढ़ी है उसका सीधा सम्बंध वैश्विक और स्थानीय स्तर से है। पादप, प्रदूषण और जल वायुमंडल के तापमान को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख कारक हैं। हाल के दिनों में जंगल की कटाई तेजी से हुई है और प्रदूषण के कारण वायुमंडल में धूलकण कार्बनडाइ आक्साइड और मिथेन जैसे गैसों की अधिकता बढ़ी है। वही राज्य में भूमिगत जल तेजी से नीचे गया है। इतना ही नहीं कंक्रीट मकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो दिन में गर्म होकर रात में ताप विकिरण के माध्यम से वायुमंडल के तापमान को बढ़ा देते हैं। बीते वर्ष को याद कीजिये, आपको पता चलेगा कि उस वर्ष राज्य की औसत वर्षा 1398 मिलीमीटर की तुलना में 1250 मिलीमीटर हुई यानी यह सामान्य से थोड़ा ही कम था। किन्तु वर्षा का सही वितरण नहीं होने के कारण खेती प्रभावित हो गयी। क्योंकि जून-जुलाई में वर्षा न होकर उसका पूरा कोटा सितम्बर में बरसा। ऐसे में खेती तो प्रभावित हुई ही लोगों को गर्मी भी झेलनी पड़ी। विशेषज्ञ कहते हैं इस बार तापमान समय से थोड़ा पहले और तेजी से बढ़ा है किन्तु संभव है कि यह वर्षा जल से थोड़ा नियंत्रित हो जायेगा। झारखंड में जब भी 35 डिग्री से ऊपर तापमान बढ़ता है स्थानीय बादलों का निर्माण शुरू हो जाता है। बशर्ते कि भूजल पर्याप्त मात्रा में हो। किन्तु पिछले साल के वर्षा के वितरण को देखते हुए यह संभावना कम बनती है। ऐसे में अगर अप्रैल, मई में तेज हवा के साथ एक-दो दौर की ओलावृष्टि के साथ वर्षा हो गयी तो बहुत समझिये। कारण भूजल की कमी से न तो स्थानीय बादल बनेंगे और न वे बरसकर राहत देंगे। ऐसे में संभव है कि लोगों को गर्मी की एक लम्बी अवधि झेलनी पड़े। यानी हो सकता है प्री मानसून के फुहारों से आप वंचित रह सकते हैं।

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