नक्सलियों की वार्ता की पेशकश एक चाल
केंद्र सरकार हिंसा छोड़ने की शर्त पर भले ही माओवादियों से बातचीत को लेकर उदार रवैया रखती हो, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का दावा है कि यह नक्सलियों की एक चाल है और इस अवधि में वे अपने संगठन को मजबूत बनाने की कोशिशें जारी रखेंगे। नक्सल प्रभावित राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नक्सलियों की संघर्ष विराम की पेशकश में ईमानदारी नहीं है। खुफिया ब्यूरो के एक सूत्र ने बताया कि माओवादियों के शीर्ष नेताओं पर पीपुल्स वार ग्रुप (पीडब्ल्यूजी) का नियंत्रण है जो दरअसल लिट्टे द्वारा प्रशिक्षित हैं। ये लोग संघर्ष विराम की पेशकश कर इस अवधि का उपयोग अपने संगठन को मजबूत करने,खुद को बेहतर ढंग से हथियारबंद करने, अपना कैडर आधार बढ़ाने और अपने लिए संसाधनों का जुगाड़ करने के लिए करेंगे। झारखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक वी डी राम ने कहा, संघर्ष विराम वार्ता स्वागत योग्य कदम कभी नहीं होगा।
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