आधी आबादी का आधा सफर पूरा
देश की सत्ता पर पुरुष वर्चस्व के दुर्गों को हिलाने वाले ऐतिहासिक कदम के रूप में संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा ने आज महिला आरक्षण विधेयक को पारित कर दिया। इस तरह चिरप्रतीक्षित इस बिल के पारित हो जाने से आधी आबादी का आधा सफर पूरा हो गया। अब लोकसभा में इसकी अधूरी यात्रा पूरी होगी। बिल के समर्थन में 186 वोट और विपक्ष में मात्र एक वोट पड़ा। लेकिन चौदह साल की जद्दोजहद के बाद यह स्वर्णिम पल आने से पहले सदन में अभूतपूर्व हंगामा हुआ जिसमें तोड़फोड़, धक्का-मुक्की, सात सदस्यों के निलम्बन और मार्शलों के सहारे उन्हें जबरन बाहर निकाले जाने की शर्मसार करने वाली नौबत भी देश को झेलनी पड़ी।
राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने भारी हंगामे के साथ अपना विरोध जाहिर किया जबकि बहुजन समाज पार्टी ने विधेयक पर हुई चर्चा में अपनी राय व्यक्त करने के बाद मत विभाजन का बहिष्कार करते हुए वाक आउट किया। इस ऐतिहासिक 108वें संविधान संशोधन पर हुए अनिवार्य मत विभाजन में विधेयक के पक्ष में 186 और विरोध में मात्र एक मत पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कल ऐतिहासिक तोहफे से वंचित रहने के 24 घंटे बाद सरकार ने विधेयक की नैया पार लगा दी लेकिन इसके लिए उसे राजद और सपा के सात सदस्यों को निलंबित करने का सख्त कदम उठाना पड़ा। लेकिन सत्ता पक्ष के प्रबंधकों ने शायद यह नहीं सोचा था कि निलंबित सदस्य आसन में ही मोर्चा संभाल कर बैठ जाएंगे और कार्यवाही स्थगित किये जाने के बावजूद उठने का नाम नहीं लेंगे। इस कारण सदन की बैठक निलंबित होती रही लेकिन 3 बजे जब कार्यवाही फिर शुरू हुई तो सदन विधेयक को पारित करने का संकल्प लिए हुए दिख रहा था। नारेबाजी कर रहे सात निलंबित सदस्यों को बाहर करने के लिए आखिरकार सभापति हामिद अंसारी ने मार्शलों को सदन के भीतर बुला लिया। इसके बाद सदन मे जहां-तहां मार्शल छितरा गये लेकिन उत्पाद मचाने पर आमादा इन सदस्यों ने पटल पर रखी फाइलें खींच लीं और आसन पर चढ़ने का प्रयास किया।
सपा के कमाल अख्तर ने पानी पीने के बहाने मंगाये गये गिलास को सीट पर पटक कर फोड़ डाला जिससे स्थिति बेहद बेकाबू हो गयी। निलंबित सदस्यों को सदन से बाहर किये जाने के बाद ही विधेयक पर चर्चा शुरू हो सकी। एक बार बहस पटरी पर आयी तो विधेयक के पक्ष में हर तरफ से आवाज उठी और विरोध का जो एकमात्र स्वर बहुजन समाज पार्टी की ओर से उठा, वह भी महिलाओं को कम आरक्षण दिए जाने और दलित महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान नहीं करने के मुद्दे पर था।
विधेयक के पारित होने के बाद सदन में मौजूद करीब 20 महिला सदस्यों के चेहरों पर उल्लास देखने लायक था। और तो और वीआईपी दीर्घाओं, दर्शक दीर्घा और प्रेस दीर्घा में बैठकर इस ऐतिहासिक क्षण की चश्मदीद गवाह बनी महिलाओं ने भी हर्षातिरेक से इस मौके का स्वागत किया।
इससे पूर्व चर्चा की शुरुआत विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने की और विभिन्न पार्टियों के सांसदों के अलावा प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी अपना पक्ष रखते हुए पिछले दो दिनों में राज्यसभा में हुई असामान्य घटनाओं पर खेद प्रकट किया और कहा कि इस विधेयक को मिला व्यापक समर्थन दर्शाता है कि लोकतंत्र मजबूत आधार पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि काफी प्रगति के बावजूद बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में असमानताका सामना करती हैं। यह विधेयक महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जाति विरोधी नहीं है सरकार को उनके सशक्तिकरण का पूरा ध्यान है। इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने विधेयक को समर्थन देने का ऐलान किया लेकिन निलंबित सदस्यों के हंगामे पर अफसोस जताया। श्री जेटली ने कहा कि भारत के हालिया इतिहास के सर्वाधिक प्रगतिशील विधेयकों में से एक को प्रभावी बनाने का जरिया बनकर हम सभी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। महिलाओं को लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में आरक्षण देने के पीछे का तर्क प्रशंसनीय है। जेटली ने कहा कि बीते 63 वर्ष में देश ने 15 लोकसभा चुनाव देखे हैं लेकिन विभिन्न लोकसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सात से 11 फीसदी के बीच रहा है। 15वीं लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महज 10.7 फीसदी ही है। विधेयक को पास कराने के प्रयास में जुटी कांग्रेस को तब बड़ी कामयाबी मिली जब जदयू सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करेगी लेकिन कांग्रेस को इस दौरान एक झटका भी लगा जब तृणमूल कांग्रेस ने मतदान में भाग लेने से इंकार कर दिया। पार्टी ने कहा कि वह विधेयक को प्रस्तुत करने के तरीके से प्रसन्न नहीं है। बसपा ने भी विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए मतदान में भाग नहीं लिया।
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