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महिला बिल पर सरकार नरम

सरकार ने आज महिला आरक्षण विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे सपा, राजद और जदयू जैसे दलों के प्रति कुछ नरमी का संकेत दिया है। उसने आश्वासन दिया कि लोकसभा में इस विधेयक को चर्चा के लिए रखे जाने के समय मतभेदों को कम करने के लिए विभिन्न संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। महिला आरक्षण विधेयक के वर्तमान स्वरूप के विरोध में आज लगातार चौथे दिन इन दलों द्वारा लोकसभा की कार्यवाही में विघ्न डाले जाने पर अध्यक्ष मीरा कुमार ने इनके नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया।
लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव द्वारा अपना पक्ष रखे जाने के बाद सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने आश्वासन दिया कि लोकसभा में इस विधेयक को लाने से पहले हम आपसे बात करेंगे। उन्होंने कहा कि यूं तो इस विधेयक पर राजग, संप्रग के पिछले और वर्तमान शासन के समय से ही राजनीतिक दलों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लोकसभा में यह विधेयक लाये जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाये जाने में कोई हर्ज नहीं है। श्री मुखर्जी ने कहा कि लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विभिन्न संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं, जिनसे मतभेद कम हो सकें।
महिला विधेयक पर आ रही अड़चनों की ओर संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जब एक सदन द्वारा किसी संविधान संशोधन विधेयक को मंजूर किये जाने पर दूसरा सदन उसे नामंजूर कर देता है और वह कानून नहीं बन पाता। श्री मुखर्जी ने कहा कि चर्चा के बाद यदि विधेयक में किसी संशोधन पर सहमति बनती है तो दूसरे सदन को भी उसे समाहित करना होगा। सदन को बाधित करके समस्याओं का हल नहीं हो सकता है। बातचीत से ही रास्ते निकलते हैं। सपा, राजद और जदयू के नेता उनके इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और इन दलों के सदस्य आसन के सामने आकर फिर से नारेबाजी करने लगे। इससे पहले आज सुबह कार्यवाही शुरू होते ही उपरोक्त दलों के सदस्य राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के तरीके पर विरोध जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। कुछ देर के हंगामे के बाद अध्यक्ष ने इन दलों के नेताओं को अपनी बात रखने की अनुमति दी। मुलायम सिंह ने कहा कि दावा किया जा रहा है कि इस विधेयक के जरिए महिलाओं को मजबूती मिलेगी, लेकिन जिस विधेयक में कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों और दलितों को बढ़ावा नहीं मिले उससे लोकतंत्र और सद्भावना कैसे बढ़ेगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा, एससी, एसटी, मुसलमान और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को आरक्षण दीजिये और सदन चलाइये। जनता दलयू नेता शरद यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के बाद से अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों ने आश्वासन दिया था कि आम सहमति बनने के बाद ही इस विधेयक को संसद में लाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अभी भी समय है, एक-दो दिन में पहाड़ नहीं टूट जायेगा। सारे दलों के लोग बैठक करें। हो सकता है कि कोई रास्ता निकले, हो सकता है ना भी निकले। रास्ता संवाद से निकलता है।

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